भुवनेश्वर: पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ओडिशा सरकार ने ईंधन संरक्षण, आर्थिक अनुशासन और सतत परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक अभियान शुरू किया है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “आर्थिक आत्मरक्षा” के आह्वान के अनुरूप मानी जा रही है। राज्य सरकार ने ईंधन की खपत कम करने और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें सरकारी काफिलों की संख्या घटाना, सरकारी वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देना तथा सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।
इस अभियान को राज्यपाल हरि बाबू कंभमपाटी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव तथा परिवहन मंत्री बिभूति भूषण जेना का मजबूत समर्थन मिला है। सभी नेताओं ने ईंधन पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने की घोषणा की है।
‘आर्थिक आत्मरक्षा’ की आवश्यकता: राज्यपाल
ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आर्थिक आत्मरक्षा” के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता देश की दीर्घकालिक समृद्धि तथा रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि लोग जिम्मेदारीपूर्वक संसाधनों का उपयोग करें और अनावश्यक खर्चों में कटौती करें, तो इससे देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। राज्यपाल ने नागरिकों से ईंधन बचाने और सतत जीवनशैली अपनाने की अपील की।
राजभवन और लोक भवन में लागू पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पूरे काफिले में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि लोक भवन पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होकर नेट-ज़ीरो कैंपस का उदाहरण बन चुका है।
उन्होंने बताया कि लोक भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के स्थान पर EV अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने वाले कर्मचारियों को परिसर में मुफ्त चार्जिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर सप्ताह में कम-से-कम एक दिन “पेट्रोल-डीजल वाहन मुक्त दिवस” मनाने का अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। उन्होंने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से भी अनावश्यक सरकारी वाहन उपयोग से बचने तथा ईंधन संरक्षण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की व्यापक अपील का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने लोगों से कम-से-कम एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने, खाद्य तेल की खपत कम करने, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ईंधन बचाना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और खाद्य तेल की खपत कम करना केवल बचत नहीं, बल्कि राष्ट्र को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

मुख्यमंत्री ने आधा किया आधिकारिक काफिला
ईंधन संरक्षण के समर्थन में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने आधिकारिक सुरक्षा काफिले में शामिल वाहनों की संख्या आधी करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से निजी वाहनों का उपयोग कम करने और अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने लोगों से अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने तथा वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने और सोने जैसी विलासिता की वस्तुओं की खरीद को कुछ समय के लिए स्थगित करने की भी सलाह दी, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी ईंधन बचत और खर्चों में कटौती संबंधी उपाय अपनाने लगे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने हटाए पायलट और एस्कॉर्ट वाहन
ईंधन संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाते हुए उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा में उपयोग होने वाले पायलट और एस्कॉर्ट वाहनों को हटाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब से वे सचिवालय जाने सहित सभी सरकारी और निजी कार्यों के लिए केवल एक वाहन का उपयोग करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने लोगों से प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते हुए निजी वाहनों का उपयोग कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का आग्रह किया।
सरकार के इस कदम को प्रशासनिक जिम्मेदारी और अनुकरणीय नेतृत्व का उदाहरण माना जा रहा है।
सरकार तैयार कर रही व्यापक ईंधन संरक्षण नीति ओडिशा सरकार विभिन्न विभागों में ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए व्यापक नीति तैयार कर रही है। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने संकेत दिए हैं कि वर्तमान ईंधन स्थिति को देखते हुए सरकार कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पर विचार कर रही है। इनमें सरकारी वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध और कुछ परिस्थितियों में सार्वजनिक परिवहन को अनिवार्य बनाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ईंधन उपयोग तथा सरकारी वाहनों के संचालन को लेकर जल्द ही दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा काफिला घटाने के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी ईंधन बचत संबंधी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।उन्होंने कहा कि आज और भी कई फैसले लिए जाएंगे, जिनकी जानकारी बाद में दी जाएगी।” इससे संकेत मिलता है कि सरकार जल्द ही और प्रशासनिक सुधारों की घोषणा कर सकती है। उल्लेखनीय है कि दिन में भुवनेश्वर के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन संकट की अफवाहों के चलते लोगों में घबराहट देखी गई और बड़ी संख्या में ईंधन की खरीदारी हुई।
ओएसआरटीसी की सभी बसें धीरे-धीरे होंगी इलेक्ट्रिक
दीर्घकालिक सतत परिवहन योजना के तहत ओडिशा सरकार ने सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की बड़ी घोषणा की है। परिवहन मंत्री बिभूति भूषण जेना ने कहा कि ओडिशा राज्य सड़क परिवहन निगम (OSRTC) की सभी बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के पर्यावरण संरक्षण तथा ईंधन खर्च कम करने के विजन के अनुरूप है। परिवहन मंत्री ने यह भी घोषणा की कि वे स्वयं भी इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग शुरू करेंगे और केवल एक सरकारी वाहन तक ही सीमित रहेंगे।उन्होंने कहा कि मितव्ययिता की शुरुआत खुद से होनी चाहिए। जेना ने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य मंत्री भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि लंबे समय में परिवहन लागत में भी भारी कमी आएगी। मंत्री ने लोगों से बसों और ट्रेनों जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों का अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार विभिन्न कंपनियों के साथ चर्चा कर रही है। प्रस्तावित 100 चार्जिंग स्टेशनों में से 30 पर काम पूरा हो चुका है, जिनमें भुवनेश्वर के 15 स्टेशन शामिल हैं। परिवहन मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने वाले उद्योगों और निर्माताओं को सरकार की ओर से हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दिया जाएगा।











