दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में पंचपीर दरगाह को डीडीए ने ध्वस्त किया है। यह कार्रवाई बुधवार (6 मई) की सुबह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच की गई। इसे ‘पंच पीरान दरगाह’ के नाम से भी जाना जाता है। मंगोलपुरी में अवैध दरगाह के नाम पर करीब 1000 गज जमीन पर कब्जा किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि हिंदू समुदाय द्वारा इस स्थान को सदियों से पवित्र माना जाता है। यह वही स्थान है, जहां वे सबसे पहले दिल्ली में आकर बसे थे। ये लोग अवैध दरगाह को हटाने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र के फेज-2 में रेलवे लाइन के पास मौजूद इस दरगाह को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से ढहा दिया। करीब 6 बजे डीडीए के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उनके साथ बुलडोजर भी था। रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में पंचपीर दरगाह और उसके आसपास के अवैध निर्माण को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी विरोध की स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। बताया जा रहा है कि यह करीब 200 साल पुरानी थी।
रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण
रेलवे के अनुसार, यह निर्माण रेलवे की जमीन पर था, जिससे परिचालन और सुरक्षा में बाधा आ रही थी। अभियान के दौरान सुरक्षा कारणों से आसपास के रास्तों पर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेशों और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने के अभियान का हिस्सा है।
अवैध कब्जा करने वालों की सूची तैयार करने का आग्रह
इस मामले में प्रीत सिरोही ने भी शोध किया और पाया कि यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि यह ढांचा न केवल अवैध है, बल्कि जमीन हड़पने वाले इसका विस्तार भी कर रहे हैं। शिकायत में डीडीए से ढांचे को हटाने, अवैध कब्जा करने वालों की सूची तैयार करने और विभाग की वेबसाइट पर विवरण अपलोड करने का आग्रह किया गया। डीडीए ने इस संबंध में यहां रहने वालों को कारण बताओ नोटिस भेजा और उन्हें दस्तावेज दिखाने का निर्देश दिया गया, लेकिन वे जमीन से जुड़े दस्तावेज नहीं नहीं दिखा पाए।
कहा जा रहा है कि नवंबर 2024 में धार्मिक समिति द्वारा इस मामले की सुनवाई की गई। उचित प्रक्रिया के पालन और न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) के अभाव में यह निर्णय लिया गया कि जब भी आवश्यकता होगी, दिल्ली पुलिस अवैध दरगाह को हटाने की कोई भी कार्रवाई कर सकती है। आखिरकार, बुधवार सुबह बुलडोजर की मदद से इस अवैध ढांचे को ढहा दिया गया।
दरगाह कमेटी के अध्यक्ष ने नाराजगी जताई
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दरगाह कमेटी के अध्यक्ष समीर यूनुस कुरैशी ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। यूनुस कुरैशी का कहना है कि करीब दो सौ साल पहले गांव के लोगों ने दरगाह के लिए यह जमीन दान में दी थी। तब से यहां हर धर्म और समुदाय के लोग इबादत और दुआ के लिए आते रहे हैं।













