उम्मीद पोर्टल में दर्ज नहीं हुई वक्फ संपत्तियाँ अब जाएंगी सरकार के कब्जे में
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उत्तराखंड: उम्मीद पोर्टल में दर्ज नहीं हुई वक्फ संपत्तियाँ अब जाएंगी सरकार के कब्जे में

उत्तराखंड में 7288 संपत्तियों को सूचीबद्ध किया गया था जिनमें 2105 औकाक संपत्तियों का उल्लेख किया गया शेष 5388 संपत्तियों में कब्रस्तान, ईदगाह, मस्जिद ,मदरसे मजारे ,इमामबाड़ा ,स्कूल आदि शामिल है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
May 6, 2026, 11:39 am IST
inउत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

देवभूमि उत्तराखंड में दर्जनों ऐसी संपत्तियों का ब्यौरा सामने आने लगा है जोकि वक्फ बोर्ड में चढ़ी हुई है लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जारी “उम्मीद पोर्टल ” में नहीं दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक इसके पीछे वजह ये बताई जा रही है कि उक्त संपत्तियों के बारे में कब्जेदारो के पास कोई दस्तावेज नहीं है, ये भी जानकारी मिली है कि इनमें बहुत से ऐसी संपत्तियाँ है जोकि सरकार जमीनों में कब्जे कर बनाई गई और उन्हें फिर वक्फ बोर्ड में दर्ज कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि वक्फ संपत्तियों के बारे में भारत सरकार ने जो नए नियम बनाए उसके तहत 6 दिसंबर 2025 तक सभी कब्जेदारो को उसकी सूचना,दस्तावेजों ,साक्ष्यों के साथ ” उम्मीद पोर्टल ” पर ऑनलाइन दर्ज करवाने थे। भारत सरकार और राज्य सरकार ने बाकायदा इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए और ” मुतवल्लियों ” को ये सिखाया गया कि कैसे ऑनलाइन प्रकिया अपनानी है। देशभर में बहुत सी संपत्तियां दर्ज भी हुई कुछ छूट गई ,केंद्र ने पुनः तीन माह का समय दिया और 6 फरवरी 2026 तक सभी वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा यहां दर्ज करने के लिए कहा गया।
बावजूद इसके भारी संख्या में संपत्तियों को दर्ज नहीं किया गया।

उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा

उत्तराखंड में 7288 संपत्तियों को सूचीबद्ध किया गया था जिनमें 2105 औकाफ़ संपत्तियों का उल्लेख किया गया शेष 5388 संपत्तियों में कब्रस्तान, ईदगाह, मस्जिद ,मदरसे मजारे ,इमामबाड़ा ,स्कूल आदि शामिल है। जिनमें से केवल 1597 ही एप्रूव होकर दर्ज हुई ,इसके साथ साथ 2105 औकाफ़  संपत्तियों को ही अभी तक उम्मीद पोर्टल में दर्ज किया गया है। यानि 3791 मस्जिद, मदरसों,ईदगाह, मजारों  आदि श्रेणी की संपत्तियां और 841 औकाफ़ श्रेणी की संपत्तियां के बारे में कब्जेदारो ने जानकारी उम्मीद पोर्टल पर दर्ज नहीं की है।

क्या कारण हो सकते हैं?

बड़ा सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों के विषय में जानकारी मांगे जाने के बावजूद लोग क्यों नहीं उसकी जानकारी उम्मीद पोर्टल पर दे रहे है ,जानकार बताते है कि  बहुत से लोग ऐसे है जिन्होंने उत्तराखंड की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके इस्लामिक सेंटर, मदरसे, मस्जिद मजारे आदि बना दी और फिर उन्हें वक्फ में चढ़ा दिया। अब उम्मीद पोर्टल पर जब साक्ष्यों की,भूमि दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई है तो उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। जबकि वक्फ /औकाफ़ संपति वो होती जोकि किसी के द्वारा दान में वक्फ बोर्ड को दी जाती है और उसकी आय से गरीबों की मदद की जाती है। यही वजह थी कि उत्तराखंड बनने के बाद देवभूमि में वक्फ की संपत्तियों में ढाई गुना की वृद्धि दर्ज की गई। इस विषय पर ऐसा भी बताया गया कि कुछ लोगों ने जानकारी के अभाव में उम्मीद पोर्टल पर ऑनलाइन ब्यौरा दर्ज नहीं किया। हालांकि ये बात इसलिए गले नहीं उतरती क्योंकि इस बारे में सरकार ने बकायदा प्रशिक्षण दिया और बहुत से मुस्लिम अधिवक्ताओं ने इस बारे में अपना सहयोग दिया।

क्या होगा बाकि संपत्तियों का?

अब सवाल उठता है कि जिन वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर तय सीमा में दर्ज नहीं किया गया उसका क्या होगा ? इस बारे में उत्तराखंड अल्पसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते कहते है ऐसी संपत्तियों को सरकार , अवैध कब्जा मानते हुए सरकार में निहित करेगी।वे बताते है कि 5 जून तक   उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के विषय में जिस संपत्ति की जानकारी नहीं दी जाएगी सरकार उसे अवैध कब्जा मानते हुए कारवाई करेगी। डॉ धकाते बताते है कि सरकार ऐसी संपत्तियों के भूमि संबंधी रिकार्ड खंगाल रही है जिनका ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी क्या कहते हैं?

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे है, अब कोई इसमें संपत्तियों को दर्ज नहीं करवा रहे है तो उन्हें सरकार द्वारा दिए गए सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा, इसमें संपत्ति के सरकार में निहित करने का प्रावधान भी शामिल है।

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