तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित होने वाले हैं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी को शुरुआती रुझानों में बड़ा झटका लगा है। चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को 5 हजार रुपये देने और उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म विरोधी बयानों के बावजूद पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर दिख रही है। रुझानों में डीएमके का सूपड़ा साफ होता दिख रहा है। अभिनेता से नेता बने थलापति जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। इससे डीएमके का किला TVK की सुनामी से ध्वस्त होता नजर आ रहा है।
क्या 5000 रुपये ट्रांसफर करने का दांव उल्टा पड़ा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले महिलाओं को आर्थिक रूप से साधने का बड़ा प्रयास किया था। दरअसल, स्टालिन सरकार पहले से ही महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि भेज रही थी, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एकमुश्त 5 हजार रुपये महिलाओं के बैंक खातें में ट्रांसफर कर दिए थे। हालांकि, यह उनका यह आइडिया फेल हो गया?
उत्तर भारतीयों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी
डीएमके के लिए यह चुनाव एक संकेत हो सकता है कि केवल कल्याणकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। उत्तर भारतीयों, सनातन धर्म और हिंदी भाषा के अपमान को नहीं भुलाया जा सकता। फरवरी 2026 में तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पनीरसेल्वम ने उत्तर भारतीयों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उत्तर भारत के जो लोग केवल हिंदी जानते वो तमिलनाडु आकर मजदूरी, टेबल साफ करने या पानी पूरी बेचने जैसे काम करते हैं। भाजपा ने इस बयान का विरोध करते हुए इसे उत्तर भारतीयों के प्रति अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएमके नेता बार-बार हिंदी भाषियों को निशाना बना रहे हैं।
हिंदी भाषा का विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम के स्टालिन ने जनवरी 2026 में कहा था कि राज्य में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं है। हम इसे थोपने का हमेशा विरोध करेंगे। तमिल भाषा के लिए हमारा प्यार कभी नहीं मरेगा। जब भी हिंदी को हम पर थोपा गया, इसका हमारे द्वारा उसी तेजी से विरोध भी किया गया। स्टालिन केंद्र सरकार के तीन भाषा फार्मूले (Three Language Policy) का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि राज्य की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) से शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को फायदा हुआ है। तमिलनाडु में दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) ही जारी रहेगी।
‘सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए’
खुद को पेरियार का समर्थक कहने वाले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने वर्ष 2023 में एक सम्मेलन के दौरान सनातन धर्म के विरोध में विवादास्पद बयान दिया था, जिससे दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक में हंगामा मच गया। उदयनिधि ने कहा था, “सनातन का सिर्फ विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे समाप्त ही कर देना चाहिए। सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जा सकता, उन्हें पूरी तरह समाप्त ही कर देना चाहिए। हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं कर सकते। हमें इसे मिटाना है। इसी तरह हमें सनातन को भी मिटाना है।”
विवादित बयानों ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया
चुनाव से पहले एमके स्टालिन सरकार ने महिलाओं को एकमुश्त 5000 रुपये देने जैसी योजनाओं की घोषणा की। यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को साधने के उद्देश्य से उठाया गया था, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल आर्थिक लाभ ही वोट दिलाने के लिए पर्याप्त है? क्या वैचारिक असंतोष आर्थिक प्रलोभनों पर भारी पड़ सकता है? शुरुआती रुझानों से स्पष्ट हो गया है कि इस बार मतदाता केवल योजनाओं से प्रभावित नहीं हुए। मंदिरों के प्रबंधन, हिंदू परंपराओं का संरक्षण और डीएमके के विवादित बयानों ने भावनात्मक स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित किया है।
अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह न केवल सत्ता परिवर्तन होगा, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जाएगा कि जनता विकास के साथ-साथ हिंदू धर्म के प्रति सम्मान भी चाहती है।

















