भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियां तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में भारत और इटली रक्षा क्षेत्र में मिलकर हथियार बनाने जा रहे हैं। इसको लेकर गुरुवार को नई दिल्ली में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें इस दिशा में बड़े कदम तय किए गए।
क्या है पूरा मामला
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने मॉनेकशॉ सेंटर में बातचीत की। क्रोसेटो अपनी टीम के साथ आए थे। बैठक से पहले उन्होंने नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की। खासतौर पर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर बात हुई। राजनाथ सिंह ने बाद में सोशल मीडिया पर लिखा कि हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
सैन्य सहयोग योजना
बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना 2026-27 का आदान-प्रदान किया। यह योजना अगले दो सालों के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच ट्रेनिंग, संयुक्त अभ्यास, स्टाफ एक्सचेंज और अन्य गतिविधियों का रोडमैप तय करती है। इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाओं और तटरक्षक बल के बीच संपर्क बढ़ाने और क्षमता विकास पर भी जोर दिया गया। इटली के तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों से अलग से मुलाकात की।
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हथियारों का होगा संयुक्त विकास
सबसे अहम फैसला रक्षा उद्योग सहयोग को लेकर हुआ। दोनों देश अब मिलकर हथियार और रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय रक्षा कंपनियों और इटली की रक्षा कंपनियों के बीच समझौते होंगे। इन समझौतों के तहत उच्च तकनीक वाले हथियार, आधुनिक समुद्री तकनीक, जहाज निर्माण और दूसरे रक्षा प्लेटफॉर्म पर काम होगा।
दोनों देश अपनी-अपनी ताकत के हिसाब से सहयोग करेंगे। बने हुए उत्पादों का इस्तेमाल अपनी सेनाएं करेंगी और उनका निर्यात भी किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए रक्षा उत्पादक उद्योगों के बीच ये समझौते होंगे।
रणनीतिक आधार
दोनों मंत्रियों ने कहा कि भारत-इटली का रणनीतिक सहयोग शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और परस्पर सम्मान पर टिका होगा। यह सहयोग मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच दोनों देशों को मजबूती देगा। भारत पहले से ही इटली के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। 2023 में राजनाथ सिंह की इटली यात्रा के दौरान भी रक्षा सहयोग पर MoU साइन हो चुका था। अब यह नया कदम उस रिश्ते को और मजबूत बनाता है।

















