जम्मू से श्रीनगर तक चली 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, जानिये किराया से लेकर सबकुछ
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होम भारत जम्‍मू एवं कश्‍मीर

जम्मू से श्रीनगर तक चली 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, जानिये किराया से लेकर सबकुछ

कटरा और श्रीनगर के बीच नियमित रूप से ट्रेन परिचालन शुरू होने से पर्यटकों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, छात्रों आदि के साथ साथ माल की कम समय में आवाजाही का सस्ता एवं सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

Written byएजेंसीएजेंसी
Apr 30, 2026, 08:14 pm IST
inजम्‍मू एवं कश्‍मीर
जम्मू-श्रीनगर के बीच चली 20 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन

जम्मू-श्रीनगर के बीच चली 20 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन

जम्मू। जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू और ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर आज सीधी रेल सेवा से जुड़ गईं। इसी के साथ श्रीनगर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की क्षमता ढाई गुनी की गई है जिससे पर्यटकों, तीर्थयात्रियों एवं स्थानीय आबादी को आसानी से टिकट सुलभ होगा।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय रेल, सूचना प्रसारण, इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकीमंत्री अश्विनी वैष्णव, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जम्मू रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में बीस कोच वाली 26401 जम्मू – श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अश्विनी वैष्णव और जितेन्द्र सिंह ने बाद में इसी ट्रेन से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक यात्रा की और वहां से सड़क मार्ग से अंजी खड्ड रेलवे पुल और चिनाब पुल के निरीक्षण के लिए गए। ट्रेन में यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में रेलमंत्री ने कहा कि इस रेलवे लाइन से कश्मीर घाटी में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को साल भर निर्बाध आवागमन की सुविधा मिली है। इससे कश्मीर घाटी के किसानों एवं व्यापारियों को अपना माल बाहर भेजने और आमदनी बढ़ाने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में रेल लाइनों का विस्तार किया जाएगा। लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि सेब के बागानों और स्थानीय प्राकृतिक स्वरूप को कोई भी नुकसान नहीं हो। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यात्रियों एवं रेल संपत्ति की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है।

आठ कोच की जगह बीस कोच

गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा से श्रीनगर के बीच 26401/26402 और 26403/26404 वंदे भारत एक्सप्रेस गाड़ियों को जम्मू से शुरू किया गया है। लगभग 266 किलोमीटर के कॉरिडोर पर इन ट्रेनों की नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू होगी। उस समय दोनों ट्रेनों में आठ आठ कोच के रैक इस्तेमाल किए जा रहे थे। अब ये 20-20 कोच के रैक लाए गए हैं। यानी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की क्षमता में ढाई गुना वृद्धि की गई है।

ट्रेन के प्रस्थान का समय

पहली रेल (रेल संख्या 26401) जम्मू तवी से सुबह 6:20 बजे प्रस्थान करेगी और श्री माता वैष्णो देवी कटरा, रियासी और बानिहाल स्टेशनों पर रुकते हुए सुबह 11:10 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। इस यात्रा में चार घंटे पचास मिनट लगेंगे। वापसी की रेल (रेल संख्या 26402) श्रीनगर से दोपहर 2:00 बजे प्रस्थान करके और शाम 6:50 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। यह रेल जोड़ी सप्ताह में छह दिन संचालित होगी। मंगलवार को सेवा उपलब्ध नहीं रहेगी। इन गाड़ियों में स्थानीय व्यंजनों को परोसा जाएगा ।

दूसरी सेवा (रेल संख्या 26404) श्रीनगर से सुबह 8:00 बजे प्रस्थान करेगी। बनिहाल और कटरा में रुकते हुए और दोपहर 12:40 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। इसकी वापसी सेवा (रेल संख्या 26403) जम्मू तवी से दोपहर 1:20 बजे प्रस्थान करेगी और शाम 6:00 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। यह जोड़ी बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।

ये दोनों जोड़ियां मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि यात्रियों के पास सप्ताह के अधिकांश दिनों में कॉरिडोर के दोनों छोर से सुबह और दोपहर में वंदे भारत का विकल्प हो, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाने में आसानी हो। जम्मू श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 20 कोच में आरपीएफ के जवानों के साथ ही आठ कोरस कमांडो भी तैनात रहेंगे जिन्हें किसी भी परिस्थिति खासकर आतंकवादियों के हमले से निपटने का प्रशिक्षण प्राप्त है।

ट्रेन का किराया

श्रीनगर और श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच का सभी शुल्क सहित किराया चेयर कार श्रेणी में 715 रुपये और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1320 रुपये है। जम्मू से किराया दरें अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गईं हैं। इन दोनों ट्रेनों के चलने से देश के विभिन्न हिस्सों से कटरा पहुंचने वाले पर्यटकों और रेलयात्रियों को कश्मीर पहुंचने में आसानी हो गई। उनकी सात घंटे की सड़क मार्ग की यात्रा अब तीन घंटे में पूरी हो रही है। हर मौसम जम्मू से श्रीनगर और बारामूला तक का सफर कुछ घंटे में तय हो रहा है।

कटरा और श्रीनगर के बीच नियमित रूप से ट्रेन परिचालन शुरू होने से पर्यटकों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, छात्रों आदि के साथ साथ माल की कम समय में आवाजाही का सस्ता एवं सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध हो रहा है। इसी के साथ तीन ओर से शत्रुओं के घिरे दोनों केन्द्र शासित प्रदेशों में सैनिकों की आवाजाही के साथ रक्षा रसद का तीव्र, सुरक्षित एवं सतत परिवहन सुनिश्चित हुआ है। जम्मू के अलग रेल मंडल बन जाने से जम्मू कश्मीर में रेलवे की परियोजनाओं में और तेजी आयी है।

आजादी से पहले देखा था सपना

जम्मू कश्मीर को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना महाराजा हरि सिंह ने आजादी से पहले देखा था। उन्होंने अंग्रेजों के सहयोग से जम्मू-कश्मीर तक नैरो गेज टॉय ट्रेन चलाने के लिए सर्वेक्षण कराए थे लेकिन दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस पर आगे बढ़ना संभव नहीं हो पाया। बाद में इस सपने पर वर्ष1983 में काम शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जम्मू से ऊधमपुर तक 53 किलोमीटर के रेलमार्ग की आधारशिला रखी थी। उस लाइन पर 1800 करोड़ रुपए की लागत आई थी और 22 साल बाद 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्घाटन किया।

वर्ष 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कश्मीर घाटी को रेलवे लिंक से जोड़ने के फैसले पर मुहर लगाई। वर्ष 2008-09 में ऊधमपुर श्रीनगर बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर काम शुरू हुआ जो दिसम्बर 2024 में पूरा हुआ और जनवरी 2024 में रेल संरक्षा आयुक्त ने संगलदान कटरा के करीब 67 किलोमीटर के आखिरी खंड को प्रमाणपत्र प्रदान किया। इस प्रकार से 272 किलोमीटर की जम्मू कश्मीर रेल लिंक परियोजना का काम पूरा करने में चार दशक से अधिक समय लग गया।

एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है चिनाब पुल

दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज चिनाब पुल एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है। चिनाब नदी तल से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है। फ्रांस की राजधानी पेरिस के मशहूर एफिल टॉवर की ऊंचाई 324 मीटर है। इसकी ऊंचाई एफिल टॉवर से करीब 35 मीटर अधिक है। विश्व का दूसरा सबसे ऊंचा रेलपुल चीन के बेईपैन नदी पर बना शुईबाई रेलवे पुल है जिसकी ऊंचाई 275 मीटर है।

तगड़े भूकंप को भी झेल सकता है पुल

यह क्षेत्र भूगर्भीय हलचल की दृष्टि से जोन चार में आता है लेकिन पुल का निर्माण सर्वाधिक हलचल वाले जोन पांच की जरूरतों के हिसाब से किया गया है। यह पुल रिक्टर स्केल पर आठ तीव्रता के झटके को आसानी से झेल लेगा। यह पुल 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवा को सहने में सक्षम है। रेलवे पुल में हवा की रफ्तार नापने के लिए सेंसर भी लगे हैं। 90 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हवा की रफ्तार होने पर सिग्नल लाल हो जाएगा और रेल संचालन को रोक दिया जाएगा।

टीएनटी विस्फोट से भी बाल बांका नहीं होगा

आतंकवादी गतिविधियों या तोड़फोड़ की अन्य गतिविधियों की आशंका के कारण इसे इतना सुरक्षित बनाया गया है कि 40 किलोग्राम तक के टीएनटी विस्फोट से इस पुल का बाल भी बांका नहीं होगा। पुल में 63 मिमी मोटा विशेष ब्लास्ट प्रूफ स्टील इस्तेमाल किया गया है। पुल के खंभे इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे धमाकों को झेल सकें। साथ ही खंभों पर ऐसा पेंट लगाया गया है जो कम से कम 15 साल चलेगा। पुल की निगरानी के लिए सुरक्षाकर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही आपातकालीन स्थिति में पुल और यात्रियों की रक्षा के लिए एक ऑनलाइन निगरानी और चेतावनी प्रणाली लगाई गई है। करीब 1315 मीटर लंबे चिनाब रेल पुल के निर्माण पर आरंभिक लागत 500 करोड़ आंकी गई थी जो बढ़कर लगभग 1200 करोड़ रुपये हो गयी है। पुल में नदी के दोनों छोरों को इस्पात के एक विशालकाय अर्द्धचंद्र आकार के ढांचे से जोड़ा जाएगा। पुल के निर्माण में करीब 25000 टन इस्पात का इस्तेमाल होगा। पुल की आयु 120 साल होगी।

अंजी ब्रिज भी इसी रेल मार्ग पर

इसी रेल मार्ग पर अंजी ब्रिज देश का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है। अंजी खड्ड पुल भारतीय रेलवे का एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू-कश्मीर में अंजी नदी की गहरी खाई पर बना है। यह भारत का पहला केबल-स्टेयड रेल पुल है, जिसकी कुल लंबाई 473.25 मीटर है और यह नदी तल से 331 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस पुल की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकल मुख्य पिलर है, जिससे 96 केबल जुड़े हुए हैं जो पूरे डेक को मजबूती प्रदान करते हैं। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में निर्मित यह पुल 213 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और तीव्र भूकंपीय झटकों को सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो तकनीकी रूप से भारतीय रेलवे की एक ऐतिहासिक उपलब्धि को दर्शाता है।

36 सुरंगें और 943 पुल

यूएसबीआरएल परियोजना में 36 सुरंगें (119 किलोमीटर तक फैली हुई) और 943 पुल शामिल हैं। इस परियोजना की सबसे लंबी सुरंग टी-49 (टनल टी-49) है, जिसकी कुल लंबाई 12.75 किलोमीटर है। यह सुरंग रामबन जिले में सुंबर और अर्पिनचला स्टेशनों के बीच स्थित है और इसने पीर पंजाल सुरंग (11.2 किमी) को पीछे छोड़ते हुए भारतीय रेलवे की सबसे लंबी परिवहन सुरंग होने का गौरव प्राप्त किया है। यूएसबीआरएल परियोजना के निर्माण में लगभग 43,780 करोड़ रुपये की लागत आई है।

 

Topics: जम्मू-कश्मीर रेलवंदे भारत ट्रेनअश्विनी वैष्णवजम्मू-श्रीनगर वंदे भारतवंदे भारत 20 कोच
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