अमेरिका और ईरान के बीच इन दिनों शांति है। मगर यह शांति कितनी गहरी और सच्ची है, इस पर तो राजनेता ही सही तरीके से बता पाएंगे, परंतु ईरान में इन दिनों जो वहाँ की महिलाओं के साथ सरकार और सेना कर रही है, वह किसी को भी स्तब्ध कर देने वाला है। ईरान में जो भी वहाँ की अपनी महिलाओं के साथ हो रहा है, वह शायद ही कभी किसी भी सभ्यता या देश ने अपनी महिलाओं के साथ किया हो। इस्लामिक रिपब्लिक ईरान ने अब अपना विरोध करने वालों पर दमनचक्र बहुत तेज कर दिया है।
महिला अत्याचार की खौफनाक कहानी
द मीडिया लाइन नामक पोर्टल ने वहाँ पर सरकार का विरोध कर रही महिलाओं को लेकर जो खुलासे किये हैं, वह दिल दहला देने वाले हैं। क्या कभी कोई कल्पना कर सकता है कि किसी लड़की को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण पैलेट गन से गोली मारी जाएगी और जब वह उसके चेहरे मे धँसेगी तो उसे उसी स्थिति में गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसकी गोली को भी नहीं निकाला जाएगा? क्या कोई कल्पना भी कर सकता है कि कोई नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, सरकार द्वारा गिरफ्तार कर ली जाएंगी, और जेल में उन्हें दिल का दौरा पड़ेगा, मगर फिर भी उन्हें कोई बहुत अधिक मेडिकल सुविधा या इलाज नहीं मिलेगा? क्या ऐसी पीड़ा कभी विमर्श का हिस्सा बन सकेगी?
क्या यह तथ्य कभी विमर्श का हिस्सा बन सकेगा कि सरकार का विरोध करने प्रदर्शनकारियों पर जब सरकार ने दमनचक्र चलाया था, तो कुछ घायल लोगों को जिंदा ही सेना और सुरक्षा बलों ने अस्पताल से उठवा लिया था और उन्हें शवों के थैलों में भरकर मरने के लिए छोड़ दिया था। यह जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान की बातें हैं। 20 फरवरी 2026 को द मीडिया लाइन ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि कैसे एक आदमी ने मरने का नाटक करके अपनी जान बचाई थी। जब उसने महसूस किया कि शवों के थैलों मे बंद जिंदा नागरिकों पर गोलिया चलाई जा रही हैं, तो वह बिना हिले डुले उस थैले में पूरे तीन दिनों तक रहा, जब तक कि अपने प्रिय जनों की तलाश मे आए हुए परिवारों ने वहाँ पर धावा नहीं बोला और अंतत: वह आजाद हुआ।
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क्या हो रहा है विरोध प्रदर्शन करने वाली महिलाओं के साथ?
यह प्रश्न उठता है कि आखिर विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं के साथ क्या हो रहा है? कमेलिया नामक एक महिला, जो कि हाल ही में ईरान के किसी शहर में बंद किसी डिटेन्शन सेंटर से रिहा हुई है, उसने यह बताया कि उसके घर पर मुखौटा पहने हुए कुछ लोगों ने हमला कर दिया और हथियारबंद उन लोगों ने उसे उसके साथी के सामने ही गिरफ्तार कर लिया। हालांकि वह लगातार विरोध करती रही, मगर फिर भी उसे हिरासत में ले लिया गया। उसके साथी को बुरी तरह से मारा गया।
कमरे में 8 महिलाओं को कैद रखा
कमेलिया के अनुसार उसे दो सप्ताह तक एक 20 वर्ग मीटर के कमरे में आठ और अन्य महिलाओं के साथ रखा गया था। यहीं पर उसने देखा कि एक 16 साल की लड़की भी है, जिसे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन से गोली लगी थी और चेहरे पर उस घाव के साथ उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके चेहरे से गोली निकाली गई थी, केवल पट्टी ही की जा रही थी। उसके बाद कमेलिया को एक अकेली जेल में भेजा गया, जहां पर उससे पूछताछ हुई। पूछताछ करने वाले पुरुष और महिला अधिकारियों ने उसके साथ अभद्रता की और साथ ही उसे तवायफ़ और जासूस कहा। उससे कहा गया कि वह इन आरोपों को स्वीकारे कि उसने विरोधी समूहों के साथ मिलकर प्रदर्शन करवाए थे। जब कमेलिया ने इनकार किया तो उसे पीटा गया और फिर लाठी के साथ उसका बलात्कार किया और सामूहिक बलात्कार की धमकी भी दी।
हालांकि उसे परिवार के बढ़ते दबाव के कारण रिहा तो कर दिया गया, परंतु किसी भी यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। वह जिस मानसिक पीड़ा से गुजरी है, उसका इलाज चल रहा है।
नोबल विजेता नरगिस मोहम्मदी को भी किया प्रताड़ित
ऐसे ही नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी उन लोगों में से हैं, जिनकी जान को गंभीर खतरा है। ज़ंजन जेल में दिल का दौरा पड़ने के बावजूद, उन्हें न तो कोई दवा मिली है और न ही कोई इलाज। मंगलवार को उन्होंने अपना 54वां जन्मदिन जेल में ही बिताया, जहाँ उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं था; इससे पहले भी वह इस्लामिक गणराज्य की विभिन्न जेलों में अपने जीवन के दस साल बिता चुकी हैं।
विरोध प्रदर्शनों को दबाने की आड़ में ईरान में अल्पसंख्यक समूहों पर भी निशाना साधा जा रहा है। शकीला घसेमी, जो बहाई हैं, उन्हें 11 सप्ताह से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है, और उन्हें वकील भी नहीं दिया गया है। उनकी बहन ने द मीडिया लाइन को बताया कि उनकी बहन ने साफ कहा था कि उन्होनें विरोध प्रदर्शनों में भाग नहीं लिया था, और अभी तक यह निश्चित नहीं है कि उन्हें किन आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
ईरान में मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों का कहना है कि युद्ध ने दमन चक्र को और भी तेज कर दिया है। कुर्द और बलोच समुदाय भी निशाने पर हैं।











