पहाड़ का पलायन रोकेगा 'चंदन वन': पतंजलि ने उत्तराखंड की बंजर भूमि पर उगाया सोना, योगी आदित्यनाथ भी रह गए हैरान!
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पहाड़ का पलायन रोकेगा ‘चंदन वन’: पतंजलि ने उत्तराखंड की बंजर भूमि पर उगाया सोना, योगी आदित्यनाथ भी रह गए हैरान!

आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के 'चंदन वन' मॉडल ने उत्तराखंड में पलायन रोकने की नई उम्मीद जगाई है। यमकेश्वर में बंजर भूमि पर लहलहाते चंदन के पेड़ों को देख सीएम योगी भी चकित रह गए। जानिए कैसे चंदन की खेती पहाड़ की तस्वीर बदल सकती है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Apr 27, 2026, 03:59 pm IST
in भारत, उत्तराखंड, पर्यावरण
Acharya Balkrishna showcasing Chandan Van (Sandalwood Plantation) in Uttarakhand to stop migration.

पतंजलि के 'चंदन वन' मॉडल से बंजर भूमि हुई लहलहाती, पलायन रोकने में मिलेगी मदद।

हरिद्वार । देश में चंदन की खेती लंबे समय तक दक्षिण भारत तक सीमित मानी जाती रही, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। उत्तराखंड में पतंजलि की ओर से विकसित ‘चंदन वन’ मॉडल ने साबित किया है कि अनुकूल परिस्थितियों में उत्तर भारत में भी चंदन की सफल खेती संभव है। प्रदेश के कई जिलों में इसके सकारात्मक उदाहरण सामने आ चुके हैं।

हरिद्वार स्थित पतंजलि के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने करीब दो दशक पहले चंदन की खेती पर प्रयोग शुरू किए थे। उस समय उत्तर भारत में इसकी खेती लगभग न के बराबर थी। पतंजलि के रिसर्च सेंटर और औषधीय उद्यान में लगाए गए चंदन के पौधों पर किए गए अध्ययन में सकारात्मक परिणाम मिले, जिसके बाद राज्य के कई जिलों में किसानों और निजी संस्थाओं ने इस मॉडल को अपनाना शुरू कर दिया।

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विशेषज्ञों के अनुसार चंदन एक अर्ध-परजीवी वृक्ष है, जिसकी वृद्धि के लिए अन्य पौधों की जड़ों से पोषण आवश्यक होता है। इसलिए इसकी खेती वैज्ञानिक पद्धति और उचित प्रबंधन पर निर्भर करती है।

आचार्य बालकृष्ण की खोज से शुरू हुई पहल

आचार्य बालकृष्ण ने अब से कई वर्ष पहले उत्तराखंड के मणिकूट पर्वत पर चंदन की मौजूदगी से जुड़े एक समाचार को पढ़ने के बाद इसकी संभावनाओं की पड़ताल की। दरअसल, समाचार में जिक्र था कि मणिकूट पर्वत की पहाड़ियों पर कभी चंदन होता था और इसे नदी के रास्ते यूपी के कन्नौज तक भेजा जाता था। इसकी सत्यता जानने के लिए आचार्य बालकृष्ण और उनकी टीम निकली। वैज्ञानिक जांच-पड़ताल के बाद बाद यह बात सामने आई कि चंदन के पेड़ की मौजूदगी इस क्षेत्र में रही है लेकिन गिनती भर की। उन्होंने हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में चंदन के पौधे लगाने का निर्णय लिया।

पतंजलि औषधीय उद्यान में लगाए गए पौधे कुछ ही वर्षों में विकसित होकर ‘चंदन वन’ के रूप में बदल गए। इसके बाद पौड़ी जिले सहित अन्य क्षेत्रों में भी यह प्रयोग सफल रहा। इस पहल ने उत्तराखंड में चंदन की खेती की संभावनाओं को मजबूत आधार दिया। जिससे ‘चंदन वन’ यानि चंदन की खेती को हाई-वैल्यू फसल के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तराखंड का पलायन रोक सकता है ‘चंदन वन’

उत्तराखंड में बढ़ते पलायन को रोकने के लिए आचार्य बालकृष्ण ने इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन विजन 2047 आईआईटी रुड़की में अपना स्पष्ट ‘विजन’ रखा। उन्होंने कहा कि रोजगार की तलाश में लोग पहाड़ छोड़ रहे हैं, जबकि स्थानीय संसाधनों के सही उपयोग से यहीं समृद्धि लाई जा सकती है।

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उन्होंने यमकेश्वर ब्लॉक का एक अनुभव साझा किया। कुछ वर्ष पहले वे वहां की पहाड़ियों में पहुंचे, जहां बड़े हिस्से में जमीन बंजर और सूखी पड़ी थी। इसी चुनौती को अवसर में बदलने के उद्देश्य से उन्होंने जलवायु के अनुरूप चंदन सहित अन्य पौधों का रोपण शुरू कराया। शुरुआती प्रयासों के बाद धीरे-धीरे यह प्रयोग सफल हुआ और कुछ ही वर्षों में वही क्षेत्र हरियाली से आच्छादित हो गया।

इसी क्रम में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक क्षेत्र यमकेश्वर पहुंचे, जहां आचार्य बालकृष्ण ने उन्हें वह इलाका दिखाया। यह वही भूमि थी, जिसे पहले अनुपयोगी और बंजर माना जाता था, लेकिन अब वहां ‘चंदन वन’ और घनी हरियाली विकसित हो चुकी थी। इस परिवर्तन को देखकर योगी आदित्यनाथ कुछ क्षणों के लिए ठिठक गए, रोमांचित हो उठे और अचंभित रह गए। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जहां कभी कुछ उगता नहीं था, वहां आज इतनी समृद्ध हरियाली देखना अविश्वसनीय है।

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आचार्य बालकृष्ण ने इस उदाहरण के माध्यम से बताया कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो न केवल बंजर भूमि को उपयोगी बनाया जा सकता है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। चंदन की खेती कम भूमि में की जा सकती है, जो 10–15 वर्षों में तैयार होकर प्रति पेड़ लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक का लाभ दे सकती है। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयास पहाड़ों में स्थायी आजीविका के नए अवसर पैदा करेंगे और पलायन को प्रभावी रूप से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Topics: Uttarakhand MigrationYemkeshwarSandalwood Cultivation India.Yogi AdityanathFarmers IncomePatanjaliAcharya BalkrishnaChandan VanSandalwood Farming
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