तमिलनाडु विधासभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में दलों के बीच आपसी तनाव बढ़ता जा रहा है। इस गठबंधन के दो बड़े घटक दलों द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और कांग्रेस पार्टी में आपसी घमाशान बढ़ता जा रहा है। द्रमुक अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक साथ मंच साझा करने पर संशय बढ़ता जा रहा है। इससे इन दलों के समर्थको और कार्यकर्ताओं में आपसी अविश्वास बढ़ता जा रहा है। जमीन पर दोनों दलों में कोई भी आपसी सामंजस्य देखने को नहीं मिल रहा है।
डीएमके और कांग्रेस की खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है
तमिलनाडु में ऐसा होना कोई नहीं राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि अभी सम्पन हुए पुडुचेरी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक का आपसी खींचतान खुलकर सामने आ गई थी। पुडुचेरी में चुनाव प्रचार के दौरान गठबंधन के बावजूद भी राहुल गांधी और स्टालिन एक ही दिन प्रदेश में चुनाव प्रचार किया। लेकिन, एक दूसरे के साथ मंच साझा नहीं किया। वर्तमान तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक को कांग्रेस पार्टी की जरूरत ज्यादा है, क्योंकि वो सत्ता बचाने की लड़ाई लड़ रही है। इसके अलावा स्टालिन अपनी चुनावी सीट कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में बुरी तरह से घिर गए है।
स्टालिन पड़ोसी राज्य तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की तरह 2023 के कामरेड्ड़ी विधासभा सीट पर चुनाव हारने के कगार पर खड़े हैं। राव अपनी एक सीट हारने के साथ ही उनकी पार्टी भी चुनाव हार गई थी। कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के इस आपसी संघर्ष के कारण न सिर्फ इन दोनों दलों, बल्कि धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के अन्य दलों में भी काफी परेशानी का माहौल है।
















