भारत के राजनीति की बड़ी विडंबना है कि नेतागण जनहित की बड़ी-बड़ी बातें अवश्य करते हैं, मगर जब अमल का मौका आता है तो बगले झाँकने लगते हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ सहयोगी यही नीति शक्ति वंदन अधिनियम के साथ अपना रहे हैं। महिला आरक्षण लागू करने वाले इस बिल के पास होने के दौरान कांग्रेस और विपक्ष के नेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। नारी सशक्तिकरण के लिए इस बिल की तारीफ कर रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने का मन बना लिया है तो अब यही विपक्षी दलों का असली चाल और चरित्र सामने आया है।
संसद नया कीर्ति बनाने जा रही
देश इस सदी का सबसे महत्वपूर्ण फैसला लेने जा रहा है और देश की संसद नया कृतिमान रचने जा रही है। मोदी सरकार का यह फैसला सिर्फ अतीत की संकल्पनाओं को ही साकार नहीं करेगा, बल्कि भविष्य के संकल्पों को भी पूरा करता दिख रहा है। यह निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है राज्यों की विधान विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का दशकों का इंतजार खत्म करने जा रहा है।
महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने के लिए तीन दिन का संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक होने जा रही है। इस दौरान इससे संबंधित तीन अहम विधेयक संसद में पेश किए जायेंगे। सरकार ने सांसदों को महिला आरक्षण संविधान 131वां संशोधन विधेयक का जो ड्राफ्ट बिल भेजा है, उसमें महिलाओं को तुरंत आरक्षण का लाभ का प्रावधान है। इसके अलावा लोकसभा और विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ाना और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को नई जनसंख्या के आधार पर फिर से निर्धारण का भी प्रावधान है। पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम में यह प्रावधान था कि महिलाओं के लिए एक तिहाई यानी 33% आरक्षण अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के बाद किया जाएगा।
क्या कहता है नया विधेयक
लेकिन नए विधेयक के अनुसार, अगली जनगणना का इंतजार किये बगैर महिलाओं की उनकी भागीदारी देना है। इस बिल के अनुसार जो प्रावधान किया जा रहा है उसके अनुसार, मौजूदा प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करके इस आरक्षण को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
बिल में अड़ंगा डाल रही कांग्रेस
कांग्रेस लम्बे समय से अपने को महिला आरक्षण का समर्थक बताने का मौका नहीं छोड़ती है। सोनिया गांधी नारी सशक्तिकरण को राजीव गांधी का सपना बताती रही है, मगर अब कांग्रेस पार्टी और उसके नेतागण सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस बिल में अड़ंगा डालने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। ये नेतागण जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दों का बहाना बनाकर इस बिल को ठंडे बस्ते में डालना चाहते हैं।
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महिलाओं को संसद-विधानसभाओं में मिलेगा आरक्षण
इस बिल के जरिए महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण मिलेगा। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि इस बिल का लक्ष्य महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें शामिल करना है। यह 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने और लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक कोशिश है।
इस बिल के जरिये 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण अधिनियम लागू होने के कारण लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 के करीब हो जाएगी जो वर्तमान संख्या से 307 अधिक है। इन 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों के लिए और बाकी 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।
क्या होगा इस बदलाव का असर
इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटों की संख्या बढ़ जाएगी और महिलाओं के लिए आरक्षण 15 साल के लिए होगा। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी। महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। यह आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव के आधार पर तय की जाएंगी।
संसद में घमासान के आसार
लेकिन संसद में महिला आरक्षण बिल पर महा घमासान के आसार नजर आ रहे हैं क्योंकि विपक्षी दल कह रहे हैं कि वो महिला आरक्षण के तो पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की ओर से तरफ से बुलाई गई। बैठक में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर साझा रणनीति को लेकर चर्चा की।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस महिला आरक्षण बिल पर अपना दोहरा चरित्र दिखा रही है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए 60 साल तक बिल को रोक कर रखा और अब इसे लागू करने के समय जनगणना, परिसीमन जैसे मुद्दों को बहाना बनाकर विरोध कर रही है। कांग्रेस पार्टी का इस मुद्दे पर हमेशा ढुलमुल रवैया रहा है। 2010 में जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी तब महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से तो पास हो गया लेकिन यह लोकसभा में पेश नहीं किया गया और लैप्स हो गया। आलोचक कहते हैं कि कांग्रेस अपनी सरकार होते हुए भी इसे कानून नहीं बना सकी।
20 सितंबर 2017 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण लाने की मांग की थी।2023 में लोकसभा में यह बिल लाया गया और लगभग सर्वसम्मति से पास भी हुआ। कांग्रेस ने भी तब समर्थन किया था। उस समय कांग्रेस का यह कहना था कि इस बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने की क्या जरूरत है। सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने 2023 में सदन में यही कहा कि महिला आरक्षण बिल को तत्काल लागू करना चाहिए। लेकिन अब केंद्र सरकार इसे लागू करने जा रही है तो सोनिया गांधी ने लेख लिखकर अपना विरोध जताया है।
महिला आरक्षण की बातें करने वाली कांग्रेस क्यों कर रही विरोध
सोनिया गांधी ने 20 सितंबर 2023 को लोकसभा में इस बिल का समर्थन करते हुए कहा था कि महिलाओं को और कितना इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन सोनिया गांधी का इस बिल को लेकर रुख बदल गया है। अब वो उस बिल को टालना चाहती हैं। राहुल गांधी भी इस मामले में पीछे नहीं है। एक जमाने में वो बार-बार यह कहते थे कि मोदी सरकार परिसीमन और जनगणना के नाम पर इस बिल को टालना चाहती है। राहुल गांधी ने सितंबर 2023 में एक बयान दिया था कि बिना नई जनगणना के इस बिल को लागू किया जा सकता है। सांसद प्रियंका गांधी ने 14 अक्टूबर 2023 को हैदराबाद में दिए गए एक भाषण में पूरी दमदारी से कहा था कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू करना चाहिए। मगर अब इसे लागू करने की बारी आ रही है तो प्रियंका गांधी का विचार बदलता हुआ दिख रहा है।
एनडीए के दल मोदी सरकार के संकल्प के समर्थन में
दूसरी तरफ एनडीए नेताओं ने 2019 से महिला आरक्षण लागू करने के मोदी सरकार की संकल्प की तारीफ की है। दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि यह निर्णय न केवल महिलाओं को सशक्त करेगा बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी नई मजबूती देगा। मोदी ने उम्मीद जताई और यह अपील की कि हर दल राजनीति से ऊपर उठकर देश की नारी शक्ति के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय लेगी।

















