केंद्र सरकार महिलाओं को और ज्यादा अधिकार देने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ आज संसद में पेश करने जा रही है। सरकार ने इस काम के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इस कदम को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी पूरा समर्थन दिया है।
प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण बिल को खुलकर समर्थन दिया। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा और बदलाव लाने वाला कदम बताया। उन्होंने लिखा कि यह संवैधानिक बदलाव संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे देश का लोकतंत्र और मजबूत होगा। महिलाओं को फैसले लेने की प्रक्रिया में बराबर की जगह मिलने से बहसों में नई सोच और विविधता आएगी। नीतियां ज्यादा संतुलित और लोगों की भावनाओं को समझने वाली बनेंगी।
प्रतिभा पाटिल ने पत्र में कहा कि असली महिला सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाएं उन फैसलों को बनाने में बराबर हिस्सा लें जो पूरे देश को प्रभावित करते हैं। यह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि लैंगिक बराबरी के प्रति हम सबके संकल्प को दिखाता है। इससे खासकर गांवों और पिछड़े इलाकों की महिलाओं में नेतृत्व करने की हिम्मत बढ़ेगी और वे देश बनाने में आगे आएंगी।
क्या है ये विधेयक
नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देता है। यह बिल पहले ही संसद से पास हो चुका है। इसे 2029 के आम चुनावों तक लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सीटों की संख्या बढ़ानी होगी। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने का प्रस्ताव है। राज्य विधानसभाओं में भी इसी हिसाब से सीटें बढ़ाई जाएंगी।
मायावती और मीरा कुमार का बयान
इस बीच इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा है कि इस कदम से विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ेगी और लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।
कौन कर रहे विरोध
वहीं इस बिल का विरोध करने में राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता हैं। जहां, राहुल गांधी एक अलग ही गाना गाते हुए कह रहे हैं कि महिला आरक्षण के बहाने प्रधानमंत्री ओबीसी समुदाय का हक मार रहे हैं। वो इसे राष्ट्रविरोधी गतिविधि करार दे रहे हैं। जबकि अखिलेश यादव कह रहे हैं कि इससे पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) का हक मारने की कोशिश की जा रही है।

















