टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट अथॉरिटी के इंजीनियरों और उत्तराखंड हाइड्रोइलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन के एक्सपर्ट्स की देखरेख में, सीप्लेन ने टिहरी झील पर सुरक्षित लैंडिंग की और फिर सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस ट्रायल से टिहरी झील में टूरिज्म सेक्टर में नई संभावनाओं की संभावना बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टिहरी झील में वॉटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स के बाद अब सी-प्लेन टूरिस्ट के लिए एक बड़ा अट्रैक्शन बन जाएगा।
सी-प्लेन से उत्तराखंड में पर्यटन को नई उड़ान
उत्तराखंड सरकार सुदूर हिमालय शिवालिक रेंज में बनी प्राकृतिक और बनाई गई झीलों जलाशयों में सी प्लेन के जरिए पर्यटन तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी कार्य योजना तैयार कर रहा है। टिहरी डैम झील, ऋषिकेश गंगा बैराज में इस सर्विस की सफल टेस्टिंग के साथ ही भविष्य में राज्य के दूसरे जलाशयों में भी सी प्लेन की आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है। उल्लेखनीय है कि सी-प्लेन एक विशेष विमान है जो पानी की सतह नदियों, झीलों या समुद्र से उडान भर सकता है और वहीं लैंड भी कर सकता है।
सी प्लेन सेवा से पर्यटन और संपर्क को मिलेगा बढ़ावा
आमतौर पर यह 12 से 19 सीटों वाला एक छोटा विमान होता है। इसे टेक-ऑफ करने के लिए मात्र 300-500 मीटर के जलाशय की आवश्यकता होती है। ये विमान जमीन और पानी दोनों जगह उतरने में सक्षम होते हैं। बैराज जलाशय में जो विमान उतरा है वह 19 सीटर है। जिसने बैराज जलाशय में दो बार सफल लैंडिंग और उडान भरी है। डसके अलावा पूरे बैराज जलाशय और चीला नहर की रेकी भी की है। उत्तराखंड उड्डयन विभाग के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि सी प्लेन सेवा प्रारंभ होने से उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिलेगी। दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित और सुगम हवाई संपर्क स्थापित होगा और आपदा एवं राहत कार्यों में भी तेजी आएगी। यह पहल राज्य के आर्थिक विकास एवं आधुनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में समतल भूमि का आभाव है इस लिए सरकार ने सी प्लेन के विकल्प को तलाशने का कार्य शुरू किया है जोकि सफल हो रहा है।

















