पटना । बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। लंबे समय तक सत्ता में रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही राज्य में ‘नीतीश युग’ का अंत हो गया है। अब भाजपा नेता सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री के रूप में सामने आए हैं। मंगलवार शाम उन्हें भारतीय जनता पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया। राजग की औपचारिक बैठक के बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। वह बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री भी होंगे।
जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल को लोकभवन में उनका शपथग्रहण समारोह आयोजित होगा। इस बदलाव को बिहार राजनीति बदलाव और नए मुख्यमंत्री बिहार के रूप में देखा जा रहा है।
लालू खेमे से भाजपा तक : सम्राट चौधरी का सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। राजनीति उन्हें परिवार से विरासत में मिली। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापकों में रहे और कई बार विधायक व सांसद बने। उनकी माता पार्वती देवी भी राजनीति में सक्रिय रहीं।
सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में राजनीति की शुरुआत की और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने।
हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा बदलते हुए भाजपा का दामन थामा। वर्ष 2018 में भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया, जिससे सम्राट चौधरी राजनीतिक सफर चर्चा का विषय बना।
भाजपा में तेजी से उभार और सत्ता तक पहुंच
भाजपा में आने के बाद सम्राट चौधरी को संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। 2019 में वे प्रदेश उपाध्यक्ष बने, 2020 में विधान परिषद पहुंचे और 2022 में नेता प्रतिपक्ष बने। 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिसने उनकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया। इसके बाद 2024 में वे उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बने और आगे चलकर गृह विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी यह यात्रा भाजपा बिहार नेतृत्व में उनके मजबूत स्थान को दर्शाती है।
कड़क प्रशासनिक छवि और सख्त फैसलों की पहचान
गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने सख्त प्रशासनिक रुख अपनाया। अपराध के खिलाफ उनकी नीति स्पष्ट रही—“या तो अपराध छोड़ो या बिहार।” बेगूसराय में गैंगस्टर के खिलाफ कार्रवाई और अवैध गतिविधियों पर सख्ती को उनकी निर्णायक कार्यशैली के रूप में देखा गया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘अभय ब्रिगेड’ और ‘पिंक पुलिसिंग’ जैसी पहल शुरू की गईं, वहीं डायल 112 के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के निर्देश दिए गए। इन कदमों ने उन्हें कानून व्यवस्था बिहार के मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया।
जातीय समीकरण में भाजपा की नई रणनीति
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं, जो राज्य में प्रभावशाली माना जाता है। भाजपा ने उन्हें आगे कर ‘लव-कुश’ समीकरण में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई है, जो पहले नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी एक मजबूत ओबीसी नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिससे बिहार जातीय समीकरण में बदलाव संभव है।
नई सरकार से बढ़ी उम्मीदें
नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद अब बिहार नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहा है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार से विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं। अब सभी की नजरें 15 अप्रैल को होने वाले शपथग्रहण और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं, जिसे बिहार नई सरकार के रूप में अहम माना जा रहा है।












