राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में आज से चुनावी मैदान में उत्तर रहे हैं, वे पार्टी के लिए उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में चुनाव प्रचार करेंगे। राहुल गांधी के द्वारा प्रचार के लिए चयनित स्थानों पर गौर करें तो पाते हैं कि ये जिले मुस्लिम बाहुल्य हैं। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के द्वारा प्रचार के तरीकों से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पार्टी खुद को मुस्लिम परस्त पार्टी मान चुकी है। अगर राहुल गाँधी द्वारा उनके द्वारा किये गए भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा का विश्लेषण करें तो पाते हैं कि उस समय भी राहुल गाँधी ने मुस्लिम बाहुल्य या उन स्थानों पर अपनी यात्रा की जहाँ कांग्रेस पार्टी पूर्व से मजबूत थी।
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बाहुल जिलों पर राहुल का ध्यान
आज राहुल गांधी के द्वारा चयनित किये गए जिले मुस्लिम बाहुल्य हैं और यहाँ कांग्रेस पार्टी का जनाधार अभी भी शेष है। कांग्रेस पार्टी ने विगत लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 11 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाई थी। यानी प्रथम पायदान पर रही थी। इनमें 6 विधानसभा की सीट मुस्लिम बाहुल्य मालदा जिले में हैं। मालदा जिले की 12 विधानसभा सीटों में आठ सीटों पर कांग्रेस पार्टी सीधे मुकाबले में थी। अतएव राहुल गांधी वैसा स्थान पर प्रचार नहीं कर रहे हैं, जहाँ पार्टी कमजोर हैं, बल्कि पार्टी की मजबूती का इस्तेमाल वो अपनी छवि को निखारने के लिये करना चाह रहे हैं।

मुर्शिदाबाद जिले में 22 विधानसभा की सीट है, जिनमें 2024 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी चार सीटों बहरामपुर, लालगोला, फरक्का और समसेरगंज पर कांग्रेस पार्टी आगे रही थी। वहीं सूती, रघुनाथगंज, सागरदिघी, नबाग्राम, कंडी, भरतपुर, रेजीनगर, बेलडांगा और नौडा सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी। विदित हो कि विगत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी 11 विधानसभा की सीटों पर प्रथम पायदान और 14 सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी। इस तरह कांग्रेस पार्टी कुल 25 सीटों पर सीधे संघर्ष में रही थी। अब सवाल यह है क्या राहुल गांधी के चुनाव प्रचार से कांग्रेस पार्टी की राज्य में शून्यता समाप्त हो सकेगी। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी का राज्य विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है। 1952 के बाद यह पहला अवसर है जब पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी का कोई भी विधायक नहीं है।
2023 में सागरदिघी विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के विधायक के निधन के कारण हुए उपचुनाव में अप्रत्याशित तौर पर कांग्रेस पार्टी के बायरन बिस्वास ने चुनाव जीता मगर ममता बनर्जी ने बिना देर किए बिस्वास को अपने पार्टी में शामिल करवा लिया था। आज के चुनाव प्रचार से यह भी स्पष्ट होगा कि ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस पार्टी को बायरन बिस्वास के रूप में दिए गए जख्म पर राहुल गाँधी क्या नज़रिया रखते हैं।

















