यूं तो पाकिस्तान में हुई अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अपनी असफलता के कारण चर्चा में थी। मगर पाकिस्तान की एक पत्रकार के लिए यह एक और कारण से सिरदर्द बन गई। पाकिस्तान अपने आप को ऐसे देश के रूप में दिखाता है, जहां पर महिलाओं को लेकर कोई भी भेदभाव नहीं है और उसके सीरियल्स में भी लड़कियों को पश्चिमी लिबास में दिखाया जाता है। हाँ, वह बात दूसरी है कि जो लड़की पश्चिमी परिधान वाली होती है, वह बहुधा घर तोड़ने वाली और क्लेश करने वाली दिखाई जाती है। और जो काम करने वाली, सुघड़ और यहाँ तक कि ऑफिस में भी सभी कुछ कुशलता से चलाने वाली दिखाई जाती है, वह या तो सूट पहनने वाली, दुपट्टा डालने वाली या फिर हिजाब वाली या घर से बाहर चादर डालकर जाने वाली दिखाई जाती है।
तो क्या यह आम पाकिस्तानियों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए बनाए जाते हैं या फिर किसी की कल्पना की उपज है यह? हालांकि यह कल्पना की उपज लगता नहीं है क्योंकि पाकिस्तान में जो घटना हाल ही में अमेरिका और ईरान की वार्ता के मध्य हुई है, वह कुछ और ही कहानी कहती है।
कौन है गरीदा फारुकी?
पाकिस्तान की एक पत्रकार है गरीदा फारुकी और अब उन्हें ट्रोल किया जा रहा है, उन पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही हैं और साथ ही उनपर अभद्र बातें भी की जा रही हैं। दरअसल, ग़रीदा ने इस वार्ता के दौरान एक हरे रंग की ड्रेस पहनी थी और वह कुछ लोगों के अनुसर भद्दी थी। शॉर्ट टॉप और उसी रंग के ट्राउजर को पहनने वाली फारुकी लोगों की अश्लीलता का शिकार हो गईं। एक पाकिस्तानी पत्रकार शाहिद गोरया ने तो ग़रीदा फारुकी को फ़ेसबुक पर फिटनेस टिप्स भी दे डाले थे। उन्होंने उसकी हरे रंग की ड्रेस की तस्वीर लगाई और उसके बाद शरीर के विभिन्न कोणों में कहाँ से माँस कम करना है, वहाँ के निशान भी बनाए।
उसने लिखा कि फारुकी को बहुत गंभीरता से फिटनेस रूटीन पर ध्यान देना चाहिए। फिटनेस परफेक्शन की बात नहीं है, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास की बात है। पाकिस्तान में जो वार्ता हुई थी, और वार्ता पर सोशल मीडिया में चर्चा होनी चाहिए थी, तो उस समय फारुकी पर चर्चा हो रही है और फारुकी के कपड़ों पर चर्चा हो रही है। लोग बुर्के में पत्रकारों की कुछ एडिटिड तस्वीरें साझा कर रहे हैं और फारुकी पर लानतें भेज रहे हैं।
कपड़े से आई कयामत
ऐसा लग रहा है कि जैसे पाकिस्तान में एक महिला पत्रकार की पोशाक से कयामत आ गई है, कोई जलजला आ गया है और लोग उस में तबाह हो रहे हैं। लोगों को लग रहा है कि जैसे एक महिला पत्रकार के कपड़ों ने सारा ईमान ही खत्म करदिया है। ऐसे में लोग यह भी प्रश्न कर रहे हैं कि क्या एक लड़की के कपड़ों से ईमान खतरे में आ जाता है? क्या पत्रकार भी अब लोगों के मन के अनुसार कपड़े पहनेंगी? एक यूजर मोहम्मद अशफाक ने तीन महिला पत्रकारों की तस्वीरें साझा की। एक पत्रकार विदेशी लग रही है, तो उसने पश्चिमी परिधान पहने हुए हैं, एक ऊपर से नीचे तक काले बुर्के में है और एक ग़रीदा हैं। उसने लिखा कि “ये सभी एक बेहद काबिल पत्रकार हैं, और उनकी पत्रकारिता में काफी अच्छे काम भी शामिल हैं। उनकी बेबाक टिप्पणियाँ उनकी लेखनी को पढ़ने लायक बनाती हैं।
पहनावा होनी चाहिए महिला की पसंद
जहाँ तक उनके पहनावे की बात है, यह उनकी अपनी पसंद है। किसी को भी उनकी अजीबोगरीब तस्वीरें पोस्ट करने का कोई हक नहीं है। न ही उनके कपड़ों के आधार पर उन्हें ट्रोल किया जाना चाहिए। किसी भी महिला के शरीर के अंगों और पहनावे से परे सोचने की कोशिश करें। उनके काम पर टिप्पणी करना आपका अधिकार है। तस्वीर में दिख रही तीनों महिलाओं का पहनावा उनका अपना अधिकार है। तीनों ही सम्माननीय हैं। हम उनके काम पर टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन उससे ज़्यादा कुछ नहीं।“
@GFarooqi
ایک نہایت قابل صحافی ہیں اور ان کی صحافت میں گراں قدر خدمات ہیں بے باک تبصرے ان کی تحریریں پڑھنے کے قابل ہوتی ہیں
اب رہا ان کے لباس یہ ان کی چوائس ہے۔کسی کو بھی ان کی عجیب تصاویر لگانے کا حق نہیں۔اور نہ لباس کی بنیاد پہ ٹرول کیا جانا چاہئے۔کسی عورت کے جسمانی اعضاء… pic.twitter.com/F2FxwYd2Un— Muhammad Ashfaq (@ashfaqsasrana) April 13, 2026
मगर ऐसे कई लोग थे नहीं। लोगों ने जमकर उस ईरानी पत्रकार के साथ फारुकी की तुलना की, जिसने ऊपर से नीचे तक खुद को काले लिबास में ढका हुआ था। लोगों ने कहा कि पाकिस्तान का सामाजिक और नैतिक पतन हो रहा है। किसी ने लिखा कि हिजाब में पत्रकार ज्यादा सुंदर है।“ मगर वहीं कई शिक्षित पाकिस्तानियों ने इसका विरोध भी किया। एक यूजर ने लिखा कि जो गरीदा ने पहना है, वह पाकिस्तान में पहना जाना बहुत आम है और लड़कियां ऐसा पहनती ही हैं, इसलिए कोई कैसा कपड़ा पहनता है, इस पर कोई टिप्पणी होनी ही नहीं चाहिए।
जरा उस मुल्क की मानसिकता का अंदाजा लगाएं कि जहां पर कथित रूप से इतनी महत्वपूर्ण वार्ता हो रही है, कि जिसके कारण पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति शांति का नोबेल मांग रहे हैं, तो वहीं उसे समय वहाँ के बाशिंदे इस बात पर बहस कर रहे हैं कि एक महिला ने हरे रंग का चुस्त ड्रेस पहना हुआ है। और वह बह एक वरिष्ठ पत्रकार के लिए!
ग़रीदा पीटीवी होम, एटीवी, दुनीया टीवी, जियो न्यूज़, समा टीवी, और एक्सप्रेस न्यूज के लिए काम कर चुकी हैं। उनके पास मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री है और उन्होंने 2004 में एक मीडिया विश्लेषक के रूप में मीडिया जगत में कदम रखा था। वे पाकिस्तान की सबसे वरिष्ठ महिला पत्रकारों में से एक है, मगर उन्हें भी एक गंदी मानसिकता ने शिकार बना लिया और वह भी एक महत्वपूर्ण अवसर पर और उनके ही अपने मुल्क के लोगों ने!












