नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान पर ही सवाल उठने लगे हैं। ये सवाल कोई और नहीं बल्कि ट्रंप के पूर्व सलाहकार जनरल माइक फ्लिन ने उठाए हैं। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के रास्ते ईरान को मिसाइलें भेजी जा रही हैं तो एक ईमानदार मध्यस्थ कैसे हो सकती है? किसी को तो हकीकत का सामना करना ही होगा।
पाक के रास्ते ईरान भेजी गई थी चीनी मिसाइल
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जनरल माइक फ्लिन ने उन रिपोर्ट्स पर चिंता जताई है जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला करने के लिए जिन चीनी मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, वे पाकिस्तान के रास्ते भेजी गई थीं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोसाद कमेंट्री की एक रिपोर्ट का जवाब देते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने जिस अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने के लिए मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दी गई थीं और पाकिस्तान के रास्ते भेजी गई थीं।
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पाक नहीं कर सकता अमेरिका-ईरान के बीच ईमानदार मध्यस्थता
उन्होंने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सच है तो यह एक्ट ऑफ वार यानी युद्ध छेड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को फौरन चीन को चेतावनी देनी चाहिए और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले पांच लाख चीनी छात्रों पर प्रतिबंध जैसे कड़े कदम उठाने चाहिए। जनरल माइक फ्लिन ने कहा कि अगर ये रिपोर्ट सच हैं तो फिर पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर या लंबे समय तक चलने वाली शांति संधि पर बातचीत में एक ईमानदार मध्यस्थ की भूमिका कैसे निभा रहा है? उन्होंने कहा कि सभी युद्ध, खासकर महंगे युद्ध, बहुत बुरे होते हैं। लेकिन एक बार जब हम उनमें शामिल हो जाते हैं तो अब हमारे पास दो ही रास्ते बचते हैं या तो हम इस युद्ध को जीतें और निर्णायक रूप से जीतें—या फिर हम इस झमेले से खुद को बाहर निकाल लें।
अमेरिकी मिलिट्री थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने भी इन दावों की पुष्टि की है। अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी मिलिट्री थिंक टैंक ने भी कहा कि चीन ने कई बार ईरान को मिसाइल फ्यूल बनाने का कच्चा माल भेजा है। ईरान उन भूमिगत मिसाइल बंकरों और साइलो को फिर से खोदकर निकाल रहा है जिन्हें अमेरिका और इजरायल ने नष्ट किया था। गौरतलब है कि फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य संघर्ष जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ है।
इजरायल लेबनान में कर रहा है भीषण बमबारी
दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में भीषण बमबारी की है। ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम के बाद भी इजरायल ने साफ कर दिया है कि वो हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। बुधवार को लेबनान में इजरायल के हमलों में कम से कम 300 लोग मारे गए और 1,150 घायल हुए हैं।











