नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों की जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट में 20 हजार से ज्यादा नाविक फंसे हुए हैं। इनकी जिंदगी अधर में लटकी हुई है क्योंकि इन जहाजों में फंसे लोगों का राशन और पीने का पानी खत्म होने लगा है। इस समय होर्मुज में करीब 2000 मालवाहक जहाज हैं। जिनके पास संसाधनों की कमी होने लगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, समंदर में फंसे इन जहाजों के कैप्टन मौत के खौफ के कारण अपना जहाज आगे बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। सबकी नजर अब इस्लामाबाद में होने वाले ईरान और अमेरिका की बातचीत पर टिकी हुई है क्योंकि इसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की योजना भी शामिल है।
राशन-पानी का भारी संकट बनी आफत
बता दें कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। हालांकि यहां से भारतीय जहाजों को ईरान ने आने दिया था। ऐसी स्थिति में होर्मुज में 2 हजार से अधिक जहाज फंस गए। जिनमें अब राशन और पीने के साफ पानी का स्टॉक खत्म हो रहा है। भले ही अभी अस्थायी सीजफायर हुआ हो लेकिन इन जहाजों के लिए संकट की स्थिति बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों से इमरजेंसी मैसेज आ रहे हैं और राशन की कमी की बात कहने के साथ ही मदद की गुहार लगाई जा रही है। अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण बंदरगाहों से कोई भी सप्लाई बोट इन जहाजों तक राहत सामग्री लेकर नहीं पहुंच पा रही है। सीजफायर को लेकर स्पष्टता न होने के कारण भी इन जहाजों के नाविक डर के साये में हैं। क्योंकि ईरानी मीडिया में होर्मुज स्ट्रेट को बंद किये जाने की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि जहाजों के कैप्टन और क्रू मेंबर्स जान को लेकर खौफ में हैं। वहीं, दूसरी तरफ अस्थायी सीजफायर के बाद भी कोई समुद्री बीमा कंपनी इन जहाजों और उन पर लदे अरबों डॉलर के माल की सुरक्षा गारंटी लेने को तैयार नहीं है। बिना बीमा सुरक्षा के कोई भी कमर्शियल जहाज होर्मुज से बाहर नहीं निकल सकता। इन जहाजों के मालिकों को अचानक से युद्ध शुरू होने का डर सता रहा है। क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में इस्लामाबाद में हो रही अमेरिका और ईरान की वार्ता पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।












