नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान का युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था। एक महीने से अधिक हो गया लेकिन यह युद्ध अभी तक रुका नहीं है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजराइल ईरान पर भीषण बमबारी कर रहा है वहीं दूसरी तरफ ईरान भी झुकने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देश एक-दूसरे को खत्म करने की धमकी दे रहे हैं। ईरान ने इस युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्तता को एक सिरे से नकार दिया था और वहां की सेना का कहना था कि वे अमेरिका को नरक में पहुंचा देंगे।
US ने ईरान के 750 स्कूलों को बनाया निशाना, 310 छात्र-शिक्षकों की मौत
इस युद्ध में सबसे अधिक नुकसान ईरान को हुआ है। ईरान का दावा है कि अमेरिका-इजरायल के हमलों में 310 छात्र और शिक्षकों की मौत हो चुकी है। इस संघर्ष में अमेरिका ने ईरान के 750 से अधिक स्कूलों को निशाना बनाया है। ईरान के शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल के इन हमलों में अब तक 210 से अधिक छात्र और शिक्षक घायल हुए हैं।
अमेरिका और इजरायल के पहले ही हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। ईरान का दावा है कि इसके बाद अमेरिका-इजरायल ने वहां के परमाणु ठिकानों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया। शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के हमलों से शिक्षा ढांचे को बहुत नुकसान हुआ है। सबसे अधिक नुकसान होर्मोजगान, मार्कजी, तेहरान और पूर्वी अजरबैजान प्रांतों में शिक्षा ढांचे पर हुआ है।
ट्रंप ने दी धमकी- अगर समझौता नहीं किया तो भीषण हमले करेंगे
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को कड़ी धमकी देते आ रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अगर ईरान ने समझौते नहीं किया तो उस पर भीषण हमले होंगे। इसके बाद अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूस से ईरान पर बमबारी की है। वहीं ट्रंप की इन धमकियों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि 1.4 करोड़ ईरानी स्वेच्छा से अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं।











