नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान और इजराइल का युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध में अब परमाणु ठिकाने भी निशाना बनने लगे हैं। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया तो वो होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों की चेतावनी दे चुके हैं।
इस युद्ध में ईरान अमेरिका और इजराइल पर जमकर पलटवार कर रहा है। वहीं इजराइल और अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को इस युद्ध में खत्म कर दिया है। ईरान ने भी अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। यह युद्ध अभी समाप्त नहीं होने वाला। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि उनका ध्यान इस युद्ध को समेटने पर है। इससे यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका इस युद्ध को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा सकता है। इस युद्ध के तीन हफ्ते हो चुके हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि ईरान भी लगातार इजराइल पर हमला कर रहा है जिससे कई लोगों की मौत हुई है।
ईरान ने दी अमेरिका को कड़े हमले की चेतावनी
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों से हुई। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके कई सलाहकार, ईरान के मंत्री और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कई शीर्ष कमांडर मारे गए। अयातुल्ला की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने गद्दी संभाली। इजराइल ने इस युद्ध में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की भी हत्या कर दी। ईरान के खुफिया विभाग के प्रमुख और आईआरजीसी के प्रवक्ता हमलों में मारे गए। इस जंग में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को तबाह कर दिया लेकिन उसके बाद भी ईरान झुकने का नाम नहीं ले रहा और अमेरिका पर कड़े हमले की चेतावनी दे रहा है।
ईरान में 32 लाख से अधिक लोग विस्थापित
इस युद्ध में ईरान में 1,300 से 1,400 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और 1,000 से अधिक मौतें हुई हैं। ईरान ने पलटवार करते हुए इजराइल और पड़ोसी खाड़ी देशों कुवैत, बहरीन, यूएई, कतर, सऊदी अरब के ऊर्जा और तेल ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और भारी नुकसान पहुंचाया है। युद्ध में इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा संयत्र पार्स गैस फील्ड पर हमला किया और इसे नष्ट कर दिया। इस युद्ध में अमेरिका ने भी अपने सात सैनिकों की मौत की बात को कबूला है। इजराइल में भी सैकड़ों की मौतें हुई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। हालांकि ईरान ने भारत और चीन सहित कुछ देशों के लिए यहां से जहाजों की आवाजाही को इजाजत दी है। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक का रिकॉर्ड बना चुकी हैं।

















