गत 15 मार्च को चित्तौड़गढ़ में ‘समरसता संगोष्ठी : संगत और पंगत’ का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात दुर्गा वाहिनी से जुड़े ‘शुभांजलि ग्रुप’ की बहनों ने ‘खड्ग नृत्य’ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे ने कहा कि जाति, वर्ण और आर्थिक असमानता की बेड़ियों को तोड़कर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। सदियों पहले ऐसे जातिगत भेदभाव नहीं थे।
यह सब तो हमारी संस्कृति को नष्ट करने के षड्यंत्र के चलते हमलावरों द्वारा किया गया। हम सब देश में समरस होकर रहते थे। उसका जीता-जागता उदाहरण हमारे यहां आयोजित होने वाले कुंभ मेले हैं, जहां बिना किसी जातिगत भेदभाव के एक घाट पर हर कोई स्नान कर सकता है।
उन्होंने आह्वान किया कि छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को जड़ से समाप्त कर हमें ‘हिंदू हम सब भाई-भाई’ के भाव को आत्मसात करना चाहिए। संगत और पंगत के महत्व को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम साथ बैठते हैं (संगत) और साथ भोजन करते हैं (पंगत), तब हृदय की दूरियां मिटती हैं और अपनत्व बढ़ता है।
उन्होंने सांस्कृतिक एकता पर कहा कि हमारी जड़ें एक हैं, हमारे पूर्वज एक हैं। इसलिए समाज में किसी भी आधार पर विभाजन स्वीकार्य नहीं है। कार्यक्रम में संत विनोद जी यति महाराज जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धर्म वही है जो जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। गोष्ठी की अध्यक्षता राधेश्याम अमेरिया ने की। संगोष्ठी के पश्चात् सभी लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया।

















