असम विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी हैं। सभी दल अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों का बटवारे करके उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ चुनाव मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी असम जातीय परिषद, माकपा, आल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस सहित अन्य सहयोगियों के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है।
ये रिश्ता क्या कहलाता है
मगर असम में एक गठबंधन पर्दे के पीछे गुप्त तरीके से हो रहा हैं। यह गठगबंधन कांग्रेस पार्टी और बदरुद्दीन अजमल के आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच है। इस गठबंधन के तहत जहाँ कांग्रेस पार्टी गुपचुप तरीके से होजाइ जिले के बिन्नाकंडी विधानसभा सीट पर बदरुद्दीन अजमल को चुनाव में मदद करेगी, वहीं अजमल और उनकी पार्टी अन्य सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को उतारेगी, जिससे की भाजपा का वोट विभाजित हो और कांग्रेस पार्टी को मदद मिल सके।
बिन्नाकंडी सीट का हाल
बिन्नाकंडी विधानसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 1,13,244 मतों की बढ़त भाजपा उम्मीदवार पर मिला था। लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी को 154164 मत मिला जो तो कुल पड़े मतों का 74.61 प्रतिशत था। बिन्नाकंडी विधानसभा सीट काज़ीरंगा लोकसभा सीट के अंतर्गत है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सीट के अंतर्गत आने वाले 10 विधासभा की सीटों में केवल एक सीट बिन्नाकंडी पर ही कांग्रेस पार्टी आगे रही थी, शेष 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने बढ़त बनाई थी।
लोकसभा चुनाव में बिन्नाकंडी विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन

फिर भी कांग्रेस ने बिन्नाकंडी विधानसभा सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने के बदले अपने सहयोगी असम जातीय परिषद को यह सीट गठबंधन में दे दिया है। असम जातीय परिषद् ने इस सीट पर रेजाउल करीम चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी अजमल को चुनाव में मदद पहुंचने के लिए पहले तो खुद इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही है और दूसरा की पार्टी ने अपने सहयोगी से भी कमजोर उम्मीदवार उतरवाया है, जिससे कि अजमल की विधानसभा की राह आसान हो जाए।
धुबरी से तीन बार सांसद रहे हैं अजमल
वहीं बदरुद्दीन अजमल की बात करें तो वे लगातार तीन लोकसभा चुनाव 2009, 2014 और 2019 में असम के धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। मगर 2024 में बदरुद्दीन अजमल देश में सर्वाधिक 1012476 मतों से अपने परम्परागत सीट धुबरी में कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन से चुनाव हार गए। इतना ही नहीं, बल्कि धुबरी लोकसभा सीट के अंतर्गत 11 विधानसभा की सीटों में किसी भी सीट पर अजमल प्रथम पायदान पर नहीं आ सके थे। 2024 में लोकसभा चुनाव में बुरी हार के बाद अजमल और उनके पार्टी के भविष्य पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया था।
मगर लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद अजमल और कांग्रेस पार्टी में गठबंधन की शुरुआत हो गई थी। रकीबुल हुसैन के द्वारा खाली किये गए सीट सामगुरी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अजमल की पार्टी ने रकीबुल हुसैन के पुत्र और कांग्रेस उम्मीदवार तंज़ील हुसैन को समर्थन दिया। मगर इसके बावजूद भी तंज़ील हुसैन 25000 मतों के भारी अंतर से भाजपा के डिपलू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए। सामगुरी विधानसभा सीट का उपचुनाव परिणाम काफी चौंकाने वाला था।
रकीबुल हुसैन 2001 से लगातार इस सीट से चुनाव जीत रहे थे इसके बावजूद उनके पुत्र और कांग्रेस प्रत्याशी तंज़ील का चुनाव हारना बड़ा संदेश था। इस सीट पर रकीबुल हुसैन की पकड़ बहुत ही मजबूत थी। 2011 के विधानसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने असम के दो बार के लोकतान्त्रिक निर्वाचित मुख्यमंत्री प्रफ्फुल कुमार महंता को चुनाव में बड़े मतों के अंतर से शिकश्त दी थी। सामगुरी उपचुनाव ने बदरुद्दीन अजमल और कांग्रेस पार्टी को यह संदेश दिया कि दोनों के गठबंधन को जनता स्पष्ट तौर पर हराना चाहती है। इसी चुनाव परिणाम के बाद दोनों दलों ने यह निश्चय किया कि दोनों दल गुप्त समझौता करके अलग अलग लड़कर एनडीए का वोट विभाजित करके ही अपने अस्तित्व को बचा सकती हैं।

















