मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध में अमेरिका बहुत ही बुरी तरह से फंस गया है। शायद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बात का आभास हो चुका है कि ईरान पर हमला करके वो बहुत ही बुरी तरह से फंस चुके हैं। क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है। अब ट्रंप चाहते हैं कि उनके सहयोगी देश भी उनकी मदद करें ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मुक्त कराया जा सके। उन्होंने इन देशों से होर्मुज स्ट्रेट में जहाज भेजने की मांग की है।
ट्रंप का कहना है कि यह जगह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल का रास्ता है, जहाँ से रोज़ाना दुनिया का करीब एक पाँचवाँ हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। लेकिन अभी ईरान ने इसे लगभग बंद कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया भर में ऊर्जा का संकट गहरा गया है।
क्यों बंद हुआ है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दरअसल, पिछले माह ही अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। तेहरान ने कहा कि अमेरिका, इज़रायल या उनके सहयोगी देशों के तेल टैंकरों को तुरंत निशाना बनाया जाएगा। अब तक 16 टैंकरों पर हमले हो चुके हैं। ईरान ने माइंस बिछाने की धमकी भी दी है। नतीजा ये है कि जहाज़ों का आना-जाना लगभग रुक गया है। पहले रोज़ 138 जहाज़ गुजरते थे, अब सिर्फ 2-3। यह इतिहास की सबसे बड़ी तेल सप्लाई बाधा मानी जा रही है।
क्या है ट्रंप का बयान
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि कई देश, खासकर वो जो इस रास्ते से तेल लेते हैं, अमेरिका के साथ मिलकर वॉरशिप भेजेंगे ताकि स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला रखा जा सके। उन्होंने खास तौर पर ब्रिटेन (UK), चीन, फ्रांस, जापान, साउथ कोरिया और दूसरे देशों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि ईरान को “पूरी तरह खत्म” कर दिया गया है और अब दूसरे देश भी मदद करें। अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा कि चीन से बात चल रही है और वो “कंस्ट्रक्टिव पार्टनर” बन सकता है।
ब्रिटेन का रुख
ब्रिटेन के डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि वो सहयोगियों से बात कर रहे हैं और शिपिंग की सुरक्षा के लिए कई विकल्प देख रहे हैं। एनर्जी सेक्रेटरी एड मिलिबैंड ने बीबीसी को बताया कि स्ट्रेट को दोबारा खोलना बहुत ज़रूरी है। वो अमेरिका और दूसरे देशों से चर्चा कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ब्रिटेन माइन-हंटिंग ड्रोन्स भेजने पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी कोई बड़ा कमिटमेंट नहीं हुआ। मिलिबैंड ने कहा, “जो भी ऑप्शन स्ट्रेट खोलने में मदद करेंगे, वो देखे जा रहे हैं।”
जापान और साउथ कोरिया की प्रतिक्रिया
जापान के एक बड़े नेता तकायुकी कोबायाशी ने NHK को बताया कि कानूनी तौर पर वॉरशिप भेजना मुमकिन है, लेकिन इसका थ्रेशोल्ड “बहुत ऊँचा” है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में बहुत सावधानी से फैसला लेना होगा। साउथ कोरिया, जो तेल के लिए इस रास्ते पर बहुत निर्भर है, ने ट्रंप की बात पर नज़र रखने और अमेरिका से बात करने की बात कही। उनका विदेश मंत्रालय बोला कि वो स्थिति को हर एंगल से देख रहे हैं और एनर्जी रूट्स की सुरक्षा के लिए कदम सोच रहे हैं।
चीन और फ्रांस ने मना किया
चीन ने अभी तक कोई मिलिट्री मदद की बात नहीं की। क्योंकि वो ईरान का करीबी दोस्त है और वहाँ से बहुत तेल लेता है। चाइनीज एम्बेसी ने कहा कि वो मिडिल ईस्ट में सब पक्षों से बात बढ़ाएगा और डी-एस्केलेशन के लिए कंस्ट्रक्टिव रोल निभाएगा। वहीं फ्रांस ने भी स्ट्रेट में जहाज भेजने से इंकार कर चुका है। वहीं जर्मनी जैसे देश संशय में हैं।

















