भारतीय क्रिकेट का सुनहरा दौर चल रहा है। भारत की क्रिकेट टीम लगभग हर टूर्नामेंट और मैच जीत रही है और देश का नाम रोशन कर रही है। यह गर्व का समय है और कुछ पूर्व क्रिकेटर्स और फिलहाल भाजपा विरोधी नेता इस बात पर कुपित हैं कि क्यों वर्तमान कैप्टन सूर्य कुमार यादव विश्व कप की ट्रॉफी लेकर मंदिर चले गए?
विश्व कप के साथ मंदिर जाने पर कीर्ति आजाद का टीम इंडिया पर निशाना
दरअसल कभी भाजपा के नेता रहे पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद अभी तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम पर निशाना साधा है। वे इस बात से नाराज हैं कि कप्तान सूर्य कुमार यादव अपनी टीम के साथ विश्वकप लेकर हनुमान मंदिर क्यों गए। कीर्ति आजाद ने पोस्ट लिखा कि “टीम इंडिया पर शर्म आती है! जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे। आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?।’
उन्होंने लिखा कि “यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है या कि सूर्य कुमार यादव के परिवार को या शाह के परिवार को! सिराज ने कभी भी इसकी परेड मस्जिद में नहीं कराई, संजू सैमसन इसे लेकर कभी भी चर्च नहीं गया, जबकि संजू सैमसन का इस जीत में योगदान था और उसे टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था।” उन्होंने यह भी लिखा कि यह ट्रॉफी हर पंथ के 1.4 बिलियन लोगों से जुड़ी है, न कि केवल एक धार्मिक विजय की गोद से!”
SHAME ON TEAM INDIA! 😡
When we won the World Cup under Kapil Dev in 1983, we had Hindu Muslim Sikh and Christian in the team.
We brought the trophy to our religious birth place our motherland India Bharat Hindustan
Why The Hell Is The Indian Cricket Trophy is being Dragged.…
— Kirti Azad (@KirtiAzaad) March 9, 2026
एक्स पर कीर्ति आजाद का यह पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। दरअसल सबसे पहले तो यह प्रश्न कीर्ति आजाद से पूछा जाना चाहिए कि यह टिप्पणी एक खिलाड़ी होने के आधार पर की है या फिर ऐसे राजनेता के रूप में, जिसका उद्देश्य मात्र भाजपा और हिन्दू विरोध है? क्योंकि एक खिलाड़ी के रूप में कीर्ति आजाद यह टिप्पणी कर ही नहीं सकते हैं।
क्रिकेट में आस्था भी निजी
यह सर्वविदित है कि भारत में क्रिकेट को लेकर एक अजीब जुनून है। भारत में क्रिकेट विश्व कप में शायद ही ऐसा कोई दिन जाता हो जब टीम की जीत के लिए मंदिरों में विशेष पूजा न की जाती हो। टीम की जीत के लिए हवन की तस्वीरें लगातार ही सामने आती रहती हैं। इसके साथ ही हर मत के खिलाड़ी भी अपने आस्था के केंद्रों में जाकर जीत की प्रार्थना करते ही होंगे। यदि कोई खिलाड़ी अपने मत के आस्था केंद्र में ट्रॉफी को लेकर जाना चाहेगा तो क्या कोई भी खिलाड़ी या बोर्ड इससे इनकार करेगा?
कीर्ति आजाद के बयान पर घमासान
दरअसल, यह नेता कीर्ति आजाद की वह हिन्दू और भाजपा विरोधी राजनीतिक घृणा है, जो तृणमूल कांग्रेस का मूल है। भारत जैसे हिन्दू आस्था के केंद्र वाले देश में क्या खिलाड़ी अपनी टीम की विजयी ट्रॉफी लेकर मंदिर भी नहीं जा सकते हैं? क्या कप्तान सूर्य कुमार यादव अपनी आस्था के केंद्र में टीम की ट्रॉफी को लेकर नहीं जा सकते हैं? सबसे महत्वपूर्ण कि क्या कीर्ति आजाद का यह वक्तव्य अपने राजनीतिक वोटबैंक को साधने का ही एक माध्यम है? कीर्ति आजाद की इस पोस्ट पर क्रिकेटर से राजनेता बने हरभजन सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि “भारत बहुत ही शानदार खेला है। सभी खिलाड़ियों को बधाई व शुभकामनाएं। जहां-जहां मन करता जाएं, मंदिर भी जाएं, मंदिर जाएं गुरुद्वारा जाएं खेल को धर्म के रंग से नहीं देखना चाहिए।’
वहीं विजयी टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे ईशान किशन का भी वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे कीर्ति आजाद के पोस्ट को लेकर कह रहे हैं कि कुछ अच्छा सवाल कीजिए, अब कीर्ति आजाद क्या कह रहे हैं इस पर मैं क्या बोलूं!” कीर्ति आजाद का यह पोस्ट मात्र एक ऐसे नेता का है जो अब भाजपा विरोधी तृणमूल पार्टी से जुड़ा हुआ है, और भाजपा विरोध में वह हिन्दू विरोध और मंदिर विरोध करने से नहीं चूकता है।











