असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी और बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में गुप्त समझौता सामने आ रहा है। किसी चुनाव में गठबंधन सिर्फ सीटों के बंटवारे के द्वारा नहीं, बल्कि एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़कर अपने संयुक्त विपक्षी दल के वोट का बंटवारा करके भी किया जाता है। दोनों दल कांग्रेस पार्टी और बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट इसी सूत्र पर असम विधानसभा चुनाव में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। इन दोनों दलों के एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़कर मदद करने की शुरुआत सामगुरी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार से शुरू हुई थी।
वोट बांटने की साजिश
सामगुरी विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन 2021 में लगातार पांचवीं बार विधायक निर्वाचित हुए थे। 2011 में इस सीट पर हुसैन ने असम के दो बार के निर्वाचित मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत को 19980 मतों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी थी। मगर रकीबुल हुसैन के सांसद बनाने के बाद हुए उपचुनाव में रकीबुल हुसैन के पुत्र और कांग्रेस प्रत्याशी तंज़ील हुसैन भाजपा के डिपलू रंजन शर्मा से बड़े मतों से चुनाव हार गए थे। इस उपचुनाव में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ ने कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था. मगर इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी की इस सीट पर बड़े मतों के अंतर से हार ने दोनों दलों को अपनी दिनो-दिन कम होती साख पर सोचने को विवश कर दिया। उसके बाद इन दोनों दलों ने यह तय किया कि साथ में चुनाव लड़कर भाजपा से चुनाव जीतना काफी दुष्कर हैं, अतएव ये दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़कर क्षेत्रवार ऐसा उम्मीदवार देंगे जो भाजपा का मत विभाजित करके एक दूसरे को मदद करें।
सामगुरी विधानसभा सीट का 2024 लोकसभा और उपचुनाव का परिणाम

कांग्रेस-एआईयूडीएफ की रणनीति
लोकसभा चुनाव में सामगुरी विधानसभा सीट पर भाजपा को केवल 22.18% मत मिला, वहीं उपचुनाव में पार्टी का मत ढाई गुना बढ़कर 57.36% हो गया है। वहीं कांग्रेस पार्टी और एआईयूडीएफ का संयुक्त वोट 75.57% वोट घटकर लगभग आधा 40.08% हो गया। उपचुनाव में दोनों दलों का गठबंधन होने के बाद इन दलों का मत प्रतिशत आधा हो गया है। यहीं से दोनों दलों ने यह निर्णय लिया कि अलग-अलग चुनाव लड़कर ही भाजपा का वोट बांटकर ही भाजपा को चुनौती दी जा सकती है।
सामगुरी उपचुनाव में एआईयूडीएफ द्वारा कांग्रेस पार्टी को समर्थन करना ही चिंतन का विषय था क्योंकि इस सीट के विधायक रकीबुल हुसैन ने एआईयूडीएफ सुप्रीमो बदरुद्दीन अजमल ने 1012476 मतों के अंतर से चुनाव में शिकस्त दी थी। 2024 लोकसभा चुनाव में यह सर्वाधिक जीत का अंतर था। यह परिणाम चौंकाने वाला था, क्योंकि विगत तीन लोकसभा चुनाव 2009, 2014 और 2019 में बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पार्टी को बड़े मतों के अंतर से चुनाव में पराजित किया था।
रकीबुल हुसैन की जीत का अंतर कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसदों के जीत के अंतर से भी अधिक था। मगर कांग्रेस पार्टी ने हुसैन को संसदीय दल में कोई भी पद जैसे लोकसभा में नेता, उपनेता या व्हिप नहीं दिया। ऐसा माना जाता है कि कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र एआईयूडीफ से गठबंधन करने के लिए और अजमल को खुश रखने के लिए कोई पद रकीबुल हुसैन को नहीं दिया। मगर सामगुरी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत ने इन दलों का पूरा समीकरण बदल दिया और इन दोनों दलों ने तय किया कि भाजपा को हराने के लिए जरुरी हैं कि ये एक दूसरे के खिलाफ लड़कर भाजपा का मत विभाजित करें।

















