Chaitra Navratri 2026: 19 या 20 मार्च? जानिए कलश स्थापना का सही समय और पूजा विधि
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Chaitra Navratri 2026: 19 या 20 मार्च? जानिए कलश स्थापना का सही समय और पूजा विधि

इस साल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसलिए चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी और इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी।

Written byMahak SinghMahak Singh
Mar 6, 2026, 02:34 pm IST
inधर्म-संस्कृति

हिंदू धर्म में नवरात्र का पर्व विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। साल में चार नवरात्र आते हैं, लेकिन चैत्र मास में पड़ने वाले चैत्र नवरात्र को सबसे प्रमुख माना जाता है। यह पर्व शक्ति की आराधना और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है। इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और घरों में धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

19 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र- इस वर्ष चैत्र नवरात्र की शुरुआत को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन है कि कलश स्थापना 19 मार्च को होगी या 20 मार्च को। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही नवरात्र का आरंभ माना जाता है। इस साल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसलिए चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी और इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विधि के माध्यम से मां दुर्गा को घर में आमंत्रित किया जाता है और पूरे नौ दिनों तक उनकी पूजा की जाती है। इसलिए कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक होता है। इस वर्ष कलश स्थापना का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक होगा। इन दोनों समयों में भक्त विधि-विधान से कलश स्थापना कर सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहे हैं। मान्यता है कि जब नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होते हैं तो देवी का आगमन डोली पर होता है। इसे शुभ संकेत माना जाता है और यह भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा तथा सकारात्मकता में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है- मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। भक्त हर दिन इन रूपों की पूजा कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कलश स्थापना के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा को साफ करके वहां चौकी रखें। मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ बो दें। फिर तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखकर नारियल स्थापित करें। इसके बाद कलश को जौ के पात्र में रखकर मां दुर्गा का आह्वान करें, पूजा करें और अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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