पश्चिम एशिया में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक विमान सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। भारत की प्रमुख विमान सेवा कंपनी ‘एयर इंडिया’ ने सुरक्षा कारणों से अमेरिका और यूरोप के लिए अपनी 22 अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रविवार को रद्द करने की घोषणा कर दी। इससे पहले भी कई उड़ानें रद्द की जा चुकी थीं। इसके पीछे कंपनी का कहना है कि क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और नियामक एजेंसियों की सलाह के बाद यह कदम उठाया गया है। इस निर्णय से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।
सैन्य कार्रवाई के बाद बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा संयुक्त सैन्य अभियान के तहत पश्चिम एशिया में किए गए हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है। इसी पृष्ठभूमि में भारत के विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने 11 पश्चिम एशियाई देशों के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने से बचने की सलाह दी है। अधिकांश भारत-यूरोप और भारत-अमेरिका उड़ानें इसी क्षेत्र के ऊपर से होकर गुजरती हैं, इसलिए एयरलाइंस को अपने संचालन में बदलाव करना पड़ रहा है।
कई यूरोपीय शहरों की उड़ानें रद्द
एयर इंडिया ने सोशल मीडिया मंच पर जारी सूचना में बताया कि दिल्ली से यूरोप के कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें रद्द रहेंगी। इनमें ब्रिटेन के शहर बर्मिंघम, नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम, स्विट्जरलैंड का प्रमुख शहर ज्यूरिख, इटली का औद्योगिक केंद्र मिलान, ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना और डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के लिए एक-एक उड़ान शामिल है।
लंदन और फ्रैंकफर्ट मार्ग भी प्रभावित
इसके अलावा दिल्ली से ब्रिटेन के व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक हीथ्रो एयरपोर्ट के लिए दो उड़ानें और जर्मनी के आर्थिक केंद्र फ्रैंकफर्ट के लिए एक उड़ान भी रद्द की गई है। मुंबई से भी लंदन हीथ्रो जाने वाली एक उड़ान को निरस्त किया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन सभी मार्गों पर वापसी की उड़ानें भी प्रभावित रहेंगी।
पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
एयर इंडिया ने इससे पहले शनिवार को भी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने की घोषणा की थी। इनमें दिल्ली से लंदन हीथ्रो जाने वाली दो उड़ानें, मुंबई से लंदन हीथ्रो के लिए एक उड़ान और अमृतसर से लंदन गैटविक जाने वाली एक उड़ान शामिल हैं।
अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर भी असर
इसके अलावा अमेरिका के लिए जाने वाली कई लंबी दूरी की उड़ानों को भी रद्द किया गया है। इनमें दिल्ली से जॉन एफ. कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेएफके) जाने वाली उड़ान, मुंबई से जेएफके के लिए उड़ान, मुंबई से न्यूआर्क के लिए उड़ान तथा वियना के रास्ते दिल्ली से शिकागो जाने वाली उड़ान शामिल हैं।
कनाडा और यूरोप के मार्ग भी प्रभावित
इसके अलावा वियना के रास्ते दिल्ली से कनाडा के टोरंटो जाने वाली दो उड़ानें भी रद्द कर दी गई हैं। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट और फ्रांस की राजधानी पेरिस के लिए भी कई उड़ानों को निरस्त किया गया है। विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) का कहना है कि पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए उड़ान भरने वाले अधिकांश विमान खाड़ी क्षेत्र और आसपास के देशों के ऊपर से होकर गुजरते हैं। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं या सुरक्षा जोखिम उत्पन्न होता है, तो एयरलाइंस को उड़ानों का मार्ग बदलना या उन्हें रद्द करना पड़ता है।
डीजीसीए की सलाह से बढ़ी चुनौती
डीजीसीए द्वारा जारी परामर्श में दो मार्च तक पश्चिम एशिया के 11 देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी गई है। इससे विमान कंपनियों के सामने दो विकल्प हैं या तो लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाया जाए, जिससे उड़ान समय और ईंधन खर्च बढ़ेगा, या फिर अस्थायी रूप से उड़ानों को रद्द किया जाए।
यात्रियों को हो रही परेशानी
उड़ानों के रद्द होने से हजारों यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई हैं, जबकि कुछ को अपनी यात्रा तिथि बदलनी पड़ रही है। एयर इंडिया ने प्रभावित यात्रियों को टिकट रिफंड या वैकल्पिक उड़ान में स्थान देने का आश्वासन दिया है। कंपनी ने कहा है कि यात्रियों को उड़ान की स्थिति के बारे में अद्यतन जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट और ग्राहक सेवा चैनलों की जांच करते रहना चाहिए। एयरलाइंस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
वैश्विक विमानन उद्योग पर संभावित असर
विशेषज्ञों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल भारतीय विमानन कंपनियों पर ही नहीं बल्कि वैश्विक विमान सेवाओं पर भी पड़ेगा। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पहले ही वैकल्पिक मार्ग अपनाने लगी हैं, जिससे उड़ानों का समय बढ़ रहा है और परिचालन लागत में वृद्धि हो रही है। फिलहाल एयर इंडिया सहित अन्य विमान कंपनियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों के आधार पर अपने संचालन में बदलाव कर रही हैं।














