डॉ. भगवान दास माहौर: चंद्रशेखर आजाद के विश्वसनीय साथी और क्रांतिकारी की अनसुनी कहानी
July 1, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

डॉ. भगवान दास माहौर: चंद्रशेखर आजाद के विश्वसनीय साथी और क्रांतिकारी की अनसुनी कहानी

चंद्रशेखर आजाद और भगवान दास माहौर की कृष्ण-अर्जुन जैसी मित्रता। लाहौर कांड, बम-बारूद ढुलाई, जेल सजा और 1979 में आजाद की मूर्ति अनावरण के दौरान दिल का दौरा। क्रांतिकारी जीवन पर श्रद्धांजलि।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Feb 27, 2026, 11:29 am IST
in विश्लेषण, पंजाब
Chandrashekhar Azad Bhagwandas Mahaur

चंद्रशेखर आजाद और भगवानदास माहौर (बाएं से)

बात उन दिनों की है जब अंग्रेजों के खिलाफ देश के युवा हथियारबंद क्रान्ति कर रहे थे। लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसा कर उन्हें बलिदान कर दिया गया था। देशवासी लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अंग्रेज पुलिस अधिकारी जेम्स एलेक्जेंडर स्काट को इसके लिए जिम्मेवार मानने लगे। क्रान्तिकारियों ने खून का बदला खून से लेने की ठानी। क्रान्तिकारी चंद्रशेखर आजाद ने भगवान दास माहौर को लाहौर बुला लिया। योजना बनी, स्काट को मारा जाए और मारते समय भगवान दास की जिम्मेदारी थी कि यदि भगतसिंह और शिवराम राजगुरु से कोई चूक होती है तो विकल्प के तौर पर भगवान दास माहौर अंग्रेज अधिकारी को तुरंत गोली मार देंगे, साथ ही भगत सिंह और राजगुरु को कवर फायर भी देंगे। परंतु मारते समय भूलवश स्काट की जगह जॉन पायंट्ज साण्डर्स की हत्या हो गयी।

जीवन और मौत का साथ रहा आजाद व माहौर का

आज देश चंद्रशेखर आजाद आजाद के उस विश्वसनीय साथी भगवान दास माहौर की जयंती मना रहा है। दोनों की मित्रता कृष्ण और अर्जुन सरीखी रही। तभी तो यह संयोग है या पूर्व जन्मों का संबंध आजाद की पुण्यतिथि भी आज ही जब क्रान्तिकारी माहौर की जयंती है। दोनों में मित्रता इतनी गहरी थी कि आज न केवल दोनों की जन्मजयंती व पुण्यतिथि के दिन सांझे हैं, बल्कि क्रान्तिकारी माहौर की मौत भी चंद्रशेखर आजाद के जीवन प्रसंग से जुड़ी है। एक दिन पूरे परिवेश में ऊर्जा एवं उत्साह की लहर थी। देशभक्ति-भाव से वातावरण ओजमय था। देश की स्वतंत्रता में क्रांतिकारियों के योगदान की चर्चा हर जुबान थी। स्वतंत्रता के वेदिका में सांसों की समिधा समर्पित कर अमर हो गये क्रांतिपथिकों के प्रति उपस्थित जन समूह में श्रद्धा का सरोवर लबालब भरा हुआ था।

अवसर था लखनऊ में, महान बलिदानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के अनावरण का। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आजाद के घनिष्ठ मित्र ने ‘चंद्रशेखर आजाद अमर रहें’ के जनघोष के बीच मूर्ति पर ढंका कपड़ा हटाया, अश्रुपूरित नेत्रों से पुष्प माला पहनाई और प्रणाम हेतु चरणों में झुक गये। पूरा माहौल बलिदानी ओजस्वी नारों से गूंजता रहा। आजाद की मूर्ति के चरणों में झुका मुख्य अतिथि की शीश झुका ही रहा। एक सह-अतिथि ने हाथ का सहारा दे उठाना चाहा, पर यह क्या! उनके हाथों में निष्प्राण देह झूल गयी। अपने आदर्श, क्रांतिकारी साथी मां भारती के सपूत चंद्रशेखर आजाद के चरणों में मुख्य अतिथि ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मुख्य अतिथि थे डॉ. भगवान दास माहौर और दिन था 12 मार्च, 1979 सोमवार।

झांसी में जन्मे माहौर

चंद्रशेखर आजाद और सरदार भगत सिंह के प्रिय साथी भगवान दास माहौर का जन्म 27 फरवरी, 1910 को झांसी जनपद के बड़ौनी गांव में हुआ था जो अब मध्यप्रदेश के दतिया जिला अंतर्गत आता है। माता नन्नीबाई लाड़-प्यार लुटातीं पशु-पक्षियों एवं प्रकृति से जुड़ी कहानियां सुनातीं, फलत: बालक भगवान दास प्रकृति के सान्निध्य में शांति एवं सुख अनुभव करते प्रकृति से भावनात्मक रूप से जुड़ता गया। पिता रामचरन माहौर का मिठाई बनाने का व्यवसाय था, किंतु वह जीवन में शिक्षा के महत्व से परिचित थे। इसी कारण पढ़ाई की उम्र होते ही बालक को गांव के विद्यालय में भेजा जाने लगा और समय के साथ उसने पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली। आगे की शिक्षा हेतु गांव में विद्यालय उपलब्ध न था तो भगवान दास को कक्षा 6 में प्रवेश हेतु झांसी में रिश्तेदार नाथूराम माहौर के पास भेज दिया गया और वह मन लगाकर पढऩे लगे। प्रकृति और साहित्य से लगाव बढऩे लगा था, पर नियति ने तो कुछ और ही रच लगा था।

क्रान्तिकारी शचींद्रनाथ ने यूं ली माहौर की परीक्षा

कक्षा 9 में अध्ययन के दौरान भगवान दास का सम्पर्क क्रांतिकारी युवा शचींद्रनाथ बख्शी से हुआ। शचींद्रनाथ ने भगवान दास को चंद्रशेखर आजाद से मिलवाया। उम्र रही होगी 15-16 वर्ष, आजाद ने परीक्षा ली। शचींद्रनाथ ने पिस्तौल में गोली भरकर नली भगवान दास की ओर करके ट्रिगर दबाते हुए कहा कि गोली ऐसे चलाते हैं। इसी बीच आजाद ने शचींद्रनाथ का हाथ ऊपर उठा दिया, गोली छत से जा टकराई और छत का थोड़ा चूरा फर्श पर फैल गया। आजाद ने भगवान दास की नब्ज टटोली, दिल की धडक़न सुनी, सब सामान्य जैसे कुछ हुआ ही न हो। साहस के धनी भगवान दास न केवल क्रांतिकारी दल में शामिल कर लिए गये, बल्कि आजाद के घनिष्ठ और प्रिय साथी भी बन गये।

आजाद व माहौर की घनिष्ठ मित्रता

चंद्रशेखर आजाद का आगमन जब भी झांसी होता तो भगवान दास के साथ ही रहते। झांसी के ही दो क्रांतिकारी साथी सदाशिव मलकापुर एवं विश्वनाथ वैशम्पायन, जो बांदा में बहुत समय रहे और पढ़ाई की, भी मिलते। बारहवीं उत्तीर्ण कर आजाद के निर्देश पर भगवान दास ने 1928 में विक्टोरिया कालेज ग्वालियर में प्रवेश ले छात्रावास में रहने लगे। यहां क्रांतिकारी साथियों का बहुत आना-जाना लगा रहता था, किसी को शक न हो जाये, यह सोच कर भगवान दास ने छात्रावास छोडक़र बाहर शहर में एक मकान किराये पर लिया। यहां पर क्रांतिकारियों का छिपना-रहना आसान हो गया।

सांडर्स का वध और क्रान्तिकारी माहौर

लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठियों की मार से लाला लाजपत राय का बलिदान हो चुका था। बदला लेने और देश में उत्साह जगाने के लिए लाठी चार्ज का आदेश देने वाले अंग्रेज अधिकारी जेम्स अलेक्जेंडर स्काट का वध आवश्यक था। चंद्रशेखर आजाद ने भगवान दास को लाहौर बुला लिया। योजना बनी, भूलवश स्काट की जगह जॉन पायंट्ज साण्डर्स की हत्या हो गयी। पर विषय यह नहीं है कि किसकी हत्या हुई, विषय यह है कि भगवान दास की जिम्मेदारी थी कि यदि भगतसिंह और शिवराम राजगुरु से कोई चूक होती है तो विकल्प के तौर पर भगवान दास माहौर अंग्रेज अधिकारी को तुरंत गोली मार देंगे, साथ ही भगत सिंह और राजगुरु को कवर फायर भी देंगे।

लाहौर काण्ड के बाद क्रान्तिकारियों को छिपाया

इस घटना के बाद कुछ क्रांतिकारी ग्वालियर आ गये। भगवान दास ने सभी को विभिन्न स्थानों पर छिपा दिया। क्रांति कभी भी लुक-छिपकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से नहीं होती। अत: आजाद के निर्देश पर भगवान दास माहौर और शिवदास मलकापुर 1930 में बम-बारूद और हथियारों की पेटी लेकर शिवराम राजगुरु के पास अकोला के लिए निकले।

मुखबिर ने फंसाया और मुखबिर की हत्या का प्रयास

जयगोपाल एवं फणींद्रनाथ घोष की मुखबिरी से भुसावल में पकड़ लिए गये। जलगांव में मुकदमा चला और भगवान दास माहौर को 14 साल की जेल सजा हुई। इस मुकदमें के दौरान पहचान के लिए दोनों मुखबिर जलगाव कोर्ट में गवाही देने आने वाले थे। चंद्रशेखर आजाद ने सदाशिव मलकापुर के भाई शंकर राव के हाथ 20 फरवरी को भोजन पात्र में एक भरी पिस्तौल भगवान दास को भेज कर दोनों मुखबिरों की हत्या का निर्देश दिया। 21 फरवरी को पेशी थी, न्यायालय के बाहर भोजन करते मुखबिरों पर भगवान दास ने गोली चलाई किंतु सुरक्षाकर्मी आगे आ गया, दोनों मुखबिर मेज के नीचे छिप गये, पर अगली दो गोलियों ने दोनों को घायल कर दिया था। भगवान दास को जेल में बंद कर कठोर यातना दी गई।

जेल से रिहाई

वर्ष 1938 में जब कांग्रेस मंत्रिमंडल बना तब आठ साल की जेल के बाद भगवान दास को रिहा किया गया, किंतु आंदोलनों में सक्रियता के कारण वह 1940 में फिर जेल में बंद कर दिये गये।

जेल से रिहाई के बाद की पढ़ाई

वर्ष 1945 में जेल से छूटने के बाद भगवान दास ने बीए, एमए करके आगरा विश्वविद्यालय से ‘1857 के स्वाधीनता संग्राम का हिंदी साहित्य पर प्रभाव’ विषय पर शोध कर पीएचडी उपाधि प्राप्त की और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में अध्यापन कार्य किया।

जितने तलवार के धनी उतने ही कलम के धनी

वह कलम के धनी थे, साहित्य के आंगन में विचरण करते थे। क्रांतिकारियों के जीवन पर ‘यश की धरोहर’ तथा कहानी संग्रह ‘यक्ष प्रश्न’ लिख साहित्य भंडार को समृद्ध किया। एक रेडियो रूपक भी लिखा – ऐसे तो घर नहीं बनता मम्मी, जो बहुत चर्चित और लोकप्रिय हुआ। संगठन गढऩे में कुशल, अचूक निशानेबाज एवं क्रांतिकारियों में ‘कुठे गुंतला’ नाम से सम्बोधित क्रांतिवीर डॉ. भगवान दास माहौर ने 12 मार्च, 1979 को अपनी अंतिम सांस अपने आदर्श के चरणों में समर्पित कर दी। उनकी एक काव्य पंक्ति- मेरे शोणित की लाली से कुछ तो लाल धरा होगी, से श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। आज के पावन दिवस पर हम महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद व भगवान दास माहौर को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

Topics: Dr. Bhagwan Das MahorChandrashekhar Azad companionBhagwan Das Mahor birth anniversaryBhagwan Das Mahor death anniversaryभगवान दास माहौरडॉ भगवान दास माहौरचंद्रशेखर आजाद साथीभगवान दास माहौर जयंतीभगवान दास माहौर पुण्यतिथिBhagwan Das Mahor
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

No Content Available
Load More

ताज़ा समाचार

कर्नाटक: 10 से 12 जुलाई तक बेलगावी में होगी संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक

Uttarakhand Minority Education Authority Madarsa Board Abolished CM Pushkar Singh Dhami NCERT Books

उत्तराखण्ड में शिक्षा सुधार का नया अध्याय शुरू, मदरसा बोर्ड समाप्त कर बना नया शिक्षा मॉडल

UP STF Arrested Cow Smuggler Nurul Khan Chandauli Police Bihar Crime

यूपी STF ने बिहार से दबोचा गो-तस्कर नूरूल खान, 50 हजार के इनामी की चंदौली पुलिस को थी तलाश!

प्रतीकात्मक तस्वीर

काशी के दालमंडी में मस्जिदों के कुछ हिस्सों के ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू, शांति व्यवस्था सामान्य

up stf arrested akeel saifi mastermind fake aadhaar card cloning racket

UP STF का बड़ा एक्शन: फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का खुलासा, मास्टरमाइंड अकील सैफी गिरफ्तार, हैरान कर देगा तरीका

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बड़ा आदेश: पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष कैंप, गड़बड़ियां होंगी दूर!

2 जुलाई का पंचांग

2 जुलाई का पंचांग: कल की तिथि, नक्षत्र, शुभ योग, ग्रह स्थिति और लग्नारंभ समय

देश के आर्थिक विकास के लिए ‘IIT’ की तरह ‘ITI’ का भी सक्षम होना आवश्यक- सुनील आंबेकर जी

पंजाब मुख्यमंत्री, भगवंत सिंह मान

बेअदबी कानून बना मान सरकार के लिए सियासी बूमरैंग?

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Generated Image)

दिल्ली के सागरपुर में हनुमान चालीसा के दौरान विवाद, पथराव का वीडियो वायरल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies