अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट आ रही है। अगस्त 2025 में अमेरिकी विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों की एंरोलमेंट में 45% की कमी आई है। ये आंकड़े ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल (GMAC) के 2025 एप्लीकेशन ट्रेंड्स सर्वे और प्रॉस्पेक्टिव स्टूडेंट्स सर्वे से आए हैं। साथ ही, भारतीय ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम्स में अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में 25% की बढ़ोतरी हुई है। इससे ये पता चलता है कि वैश्विक प्रबंधन शिक्षा बदलाव आ रहा है और अमेरिका की जगह दूसरे विकल्पों की ओर देख रहे हैं।
वीजा की अनिश्चितता और खर्चा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी वजह वीजा की अनिश्चितता है। क्योंकि वीजा अनिश्चितता, रिजेक्शन, निलंबन और इंटरव्यू में दिक्कतें बहुत बढ़ गई हैं। अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी पर लगातार बहस चल रही है, जिससे छात्रों में डर बैठ गया है। कई बार प्रवेश मिलने के बाद भी स्टूडेंट्स डिपॉजिट पेमेंट करके नहीं पहुंच पाते क्योंकि वीजा नहीं मिलता। अमेरिका के कार्यक्रमों में से लगभग 90% ने बताया कि भारत उन टॉप देशों में है जहां स्टूडेंट्स डिपॉजिट देते हैं, लेकिन मैट्रिकुलेट नहीं कर पाते।
इसकी दूसरी बड़ी वजह ऊंची लागत हाई कॉस्ट और क्षमताओं पर असर होना है। अमेरिका में पढ़ाई महंगी है, और भारतीय रुपए की वैल्यू सितंबर 2025 में कई बड़ी करेंसीज के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर पहुंच गई। इससे खर्च और बढ़ गया। अब छात्र और उनके परिवार पहले पैसे का हिसाब लगाते हैं, कॉलेज की रैंकिंग से ज्यादा। पहले जहां इंस्टीट्यूशनल रेपुटेशन सबसे ऊपर था, अब फाइनेंशियल फैक्टर्स ज्यादा मायने रखते हैं।
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अमेरिका की पसंद में गिरावट
GMAC के सर्वे से पता चलता है कि गैर अमेरिकी आवेदकों में अमेरिका पढ़ने की पसंद 2019 में 57% से घटकर 2025 में सिर्फ 42% रह गई। वहीं पश्चिमी यूरोप स्थिर रहा (63% के आसपास), और एशिया व पूर्वी यूरोप के लिए आवेदक बढ़े हैं। सेंट्रल और साउथ एशियन स्टूडेंट्स अब अपनी रीजन या ईस्ट-साउथईस्ट एशिया की तरफ ज्यादा जा रहे हैं।
दूसरे देशों के कड़े नियम
ये सिर्फ अमेरिका की बात नहीं। कनाडा में 2024 से इंटरनेशनल स्टडी परमिट कैप लगने से एप्लीकेशन्स और एप्रूवल्स में भारी गिरावट आई। यूके में डिपेंडेंट्स पर पाबंदी और पोस्ट-स्टडी वर्क पीरियड कम होने से 2024 में स्टूडेंट वीजा प्रोसेस्ड में 12% की कमी आई। ऑस्ट्रेलिया में नेशनल प्लानिंग लेवल की वजह से 2025 की पहली छमाही में पंजीयन 16% गिरे।
एशिया और यूरोप की तरफ शिफ्ट
पल्स सर्वे के मुताबिक, एशिया-पैसिफिक रीजन में 54% प्रोग्राम्स ने फॉल 2025 में ज्यादा इंटरनेशनल एंरोलमेंट देखा, जबकि अमेरिका में दो-तिहाई प्रोग्राम्स में गिरावट आई। भारत में भी अपने बिजनेस स्कूल प्रोग्राम्स में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स बढ़ रहे हैं।
















