जम्मू कश्मीर । जम्मू में फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने मौलवी मोहम्मद शाहनवाज को दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है। आखिरकार नौ साल बाद आया यह फैसला पीड़िता के परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। बता दें कि यह मामला नगरोटा थाने से जुड़ा हुआ है और 12 मार्च 2018 की घटना से संबंधित है।
मस्जिद में हुई वारदात
सात वर्षीय पीड़िता बच्ची कटल बटल मस्जिद में कुरान की तालीम लेने जाती थी। उसी मस्जिद में दोषी मोहम्मद शाहनवाज वहां मौलवी के पद पर कार्यरत था। अभियोजन के मुताबिक, उस दिन आरोपी ने बाकी बच्चों को बाहर भेज दिया और नाबालिग बच्ची को मस्जिद के एक कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
इसके बाद घर लौटने पर बच्ची ने तेज दर्द और तकलीफ की शिकायत की, जिसके बाद उसकी मां उससे सारा हाल पूछा और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
ट्रायल में पेश हुए सबूत
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान कुल 16 गवाह पेश किए। जिसमे पीड़िता का बयान, उसकी मां, रिश्तेदार, स्वतंत्र गवाह, चिकित्सक और जांच अधिकारी भी शामिल थे। वहीं अदालत ने भी पीड़िता के बयान को स्वाभाविक, सुसंगत और विश्वसनीय माना। साथ ही बयान में कोई बड़ा विरोधाभास नहीं पाया गया।
नाबालिग पीड़िता के बयान पर अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग से यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म के मामलों में यदि पीड़िता का बयान भरोसेमंद हो, तो केवल उसी के आधार पर भी दोषसिद्धि हो सकती है। इसके अलावा अतिरिक्त पुष्टिकरण की जरूरत नहीं पड़ती।
साथ ही अदालत ने गवाहों के बयानों में आई मामूली विसंगतियों को स्वाभाविक बताया और कहा कि इससे मामले की जड़ पर कोई असर नहीं पड़ता।
चिकित्सीय साक्ष्य और बचाव पक्ष के दावों का खंडन
बता दें कि इस मामले में चिकित्सीय रिपोर्ट भी अभियोजन के पक्ष में रही और घटना के दावे से मेल खाती पाई गई। जिसके बाद बचाव पक्ष के झूठे फंसाने के आरोप को अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
साथ ही जज ने टिप्पणी की कि कोई भी अभिभावक अपनी नाबालिग बेटी की गरिमा और भविष्य को दांव पर लगाकर किसी निर्दोष को फंसाने का जोखिम नहीं उठाता।

















