नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि भाषण या कला से कोई भी व्यक्ति किसी समुदाय को बदनाम नहीं कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति, जिसमें सरकारी और गैर-सरकारी लोग शामिल हैं, उसके लिए भाषण, मीम, कार्टून या विजुअल आर्ट के जरिए किसी भी समुदाय को बदनाम करना संविधान के हिसाब से गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कही है।
कार्टून या दृश्य कला से किसी समुदाय को नीचा दिखाना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य
सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि भाषण, मीम, कार्टून या दृश्य कला के माध्यम से किसी समुदाय को बदनाम करना या नीचा दिखाना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने यह टिप्पणी की है। इस बीच फिल्म निर्माताओं द्वारा शीर्षक बदलने के बाद अदालत ने ये मामला बंद कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि फिल्म घूसखोर पंडित का शीर्षक एक विशेष समुदाय को अपमानित करता है।

जस्टिस भुइयां ने दिया अलग निर्णय…
इस मामले में जस्टिस भुइयां ने अलग से निर्णय लिखते हुए कहा कि वे भाईचारे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों को दोहराना चाहते हैं ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवाद सुलझ चुका है और मामले को समाप्त किया जा सकता है। इस पर जस्टिस भुइयां ने कहा कि मुझे अपने विचार व्यक्त करने से मत रोकिए। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत संविधान की प्रस्तावना के ‘मार्गदर्शक मूल्यों’ का हिस्सा हैं। उन्होंने अनुच्छेद 51अ (ई) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह देश के सभी लोगों के बीच ‘सद्भाव और भाईचारे’ को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म या भाषा से परे भाईचारे की भावना विकसित करना और दूसरों का सम्मान करना हम सबका संवैधानिक धर्म है।
मंत्रियों को धर्म, जाति, भाषा के आधार पर लोगों को टारगेट नहीं करना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे सार्वजनिक व्यक्तियों को धर्म, भाषा, जाति या क्षेत्र के आधार पर किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना संविधान का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने जोर दिया कि मंत्री जैसे ऊंचे संवैधानिक पदों पर बैठे पब्लिक लोगों को धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी भी समुदाय को टारगेट नहीं करना चाहिए।
















