अमेरिका के राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ का हथियार के तौर पर कर रहे हैं। इसी के तहत उन्होंने कई ईयू अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया था। इस पर अब फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक पत्र लिखकर कुछ यूरोपीय अधिकारियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की अपील की है।
मैक्रों ने कहा ये अन्याय
मैक्रों ने इन प्रतिबंधों को “अन्यायपूर्ण तरीके से लगाया गया” बताया और ट्रंप से “इन फैसलों पर पुनर्विचार” करने की गुजारिश की। उन्होंने खास तौर पर दो फ्रांसीसी नागरिकों पूर्व यूरोपीय आयोग के कमिश्नर थियरी ब्रेटन और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के जज निकोलस गुइयो का जिक्र किया है। मैक्रों का कहना है कि वे ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से यह बात ध्यान में दिलाना चाहते हैं।
थियरी ब्रेटन पर प्रतिबंध क्यों लगे
थियरी ब्रेटन पूर्व में यूरोपीय संघ के इंटरनल मार्केट कमिश्नर थे और उन्होंने डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) जैसे नियमों को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। यह कानून 2022 में आया, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), फेसबुक और गूगल पर यूरोप में कंटेंट मॉडरेशन के सख्त नियम लगाए गए। अमेरिका का मानना है कि ये नियम अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स पर अमेरिकी नागरिकों की फ्री स्पीच को दबाने की कोशिश हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि ब्रेटन ने “अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स को जबरदस्ती अमेरिकी विचारों के खिलाफ सजा देने” की कोशिश की। मैक्रों ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ये प्रतिबंध “यूरोपीय नियामक स्वायत्तता को कमजोर करते हैं” और “गलत विश्लेषण” पर आधारित हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय डिजिटल नियम सिर्फ यूरोप में लागू होते हैं, इनका कोई एक्स्ट्राटेरिटोरियल प्रभाव नहीं है और ये सभी कंपनियों पर बिना भेदभाव के लागू होते हैं।
निकोलस गुइयो पर प्रतिबंध का कारण
निकोलस गुइयो ICC के जज हैं। अगस्त 2025 में अमेरिका ने उन पर और ICC के कुछ अन्य जजों पर प्रतिबंध लगाए थे। वजह यह थी कि ICC ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गाजा में युद्ध अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अमेरिका ICC के इस कदम से असहमत है। मैक्रों ने लिखा कि इन प्रतिबंधों से “न्यायिक स्वतंत्रता का सिद्धांत” और “ICC के जनादेश” को नुकसान पहुंचता है।
फ्री स्पीच तर्को को कहा था बकवास
यह पत्र ऐसे समय आया है जब मैक्रों सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा और एल्गोरिदम की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों के फ्री स्पीच वाले तर्कों को “पूरी बकवास” कहा था। साथ ही, 2026 में फ्रांस G7 की अध्यक्षता कर रहा है, जहां मैक्रों इन मुद्दों को प्रमुखता देना चाहते हैं। अमेरिका और यूरोप के बीच डिजिटल रेगुलेशन और फ्री स्पीच पर मतभेद पहले से चल रहे हैं, और ये प्रतिबंध उस तनाव का हिस्सा लगते हैं।











