केंद्र सरकार ने मैथिली भाषा में रसायन शास्त्र की मूलभूत शब्दावली को प्रकाशित कर दिया है। यह काम भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के साथ मिलकर किया गया है। अब मिथिलांचल के स्कूलों में बच्चे रसायन शास्त्र को अपनी मातृभाषा मैथिली में पढ़ और समझ सकेंगे।
नई शिक्षा नीति का असर
केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (एनईपी) में जोर दिया गया है कि बच्चों को अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई मिले। इसी के तहत यह शब्दावली तैयार हुई है। इससे स्कूल स्तर पर विज्ञान विषयों में तकनीकी शब्दों की कमी बहुत हद तक दूर हो जाएगी। खासकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम के लिए यह बहुत काम की साबित होगी। इसमें करीब 3,500 शब्द शामिल हैं, जो रसायन शास्त्र के बेसिक टर्म्स को मैथिली में व्यक्त करते हैं। शिक्षा मंत्रालय की योजना है कि आगे सभी विषयों की किताबों का मैथिली में अनुवाद हो। इस शब्दावली से रसायन की किताबों का अनुवाद आसान हो जाएगा।
कैसे तैयार हुई यह शब्दावली
इसके लिए वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग ने एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी। इसमें रसायन शास्त्र के एक्सपर्ट्स के साथ अंग्रेजी, मैथिली और संस्कृत के जानकार शामिल थे। समिति के समन्वयक और सहायक निदेशक मर्सी ह्मार रहे। कई नामी लोगों ने इसमें योगदान दिया, जिसमें डॉ. प्रेम मोहन मिश्र (एलएनएमयू रसायन विभाग के पूर्व अध्यक्ष), डॉ. अवधेश कुमार मिश्र (केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के पूर्व मुख्य समन्वयक), प्रो. देवनारायण झा (कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति), डॉ. अजय कुमार मिश्र (केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जनकपुरी), डॉ. बीणा ठाकुर (एलएनएमयू मैथिली विभाग की पूर्व अध्यक्ष), डॉ. सुरेंद्र भारद्वाज (सीएम कॉलेज, दरभंगा), डॉ. संजय कुमार झा (जेएनयू), डॉ. सविता झा (दिल्ली विश्वविद्यालय) और एल एंड डी स्कूलनेट इंडिया के डॉ. वागीश कुमार झा को शामिल किया गया था।
दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं पर भी चल रहा काम
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ मैथिली के लिए नहीं, बल्कि दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी वैज्ञानिक शब्दावली तैयार करने का काम चल रहा है। डॉ. अवधेश कुमार मिश्र ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय की योजना सभी विषयों की किताबें मैथिली में लाने की है। इस शब्दावली से स्कूलों में विज्ञान पढ़ाने-पढ़ने में तकनीकी शब्दों की दिक्कत कम होगी। माना जा रहा है कि यह कदम मैथिली भाषा बोलने वाले बच्चों के लिए काफी उपयोगी है। अब वे केमेस्ट्री के कॉन्सेप्ट्स को अपनी भाषा में आसानी से ग्रहण कर पाएंगे।











