अमेरिका से तनाव के बीच ईरान, रूस और चीन के साथ नौसैनिक अभ्यास कर रहा है। इसको लेकर रूसी राष्ट्रपति के सहायक निकोलाय पैट्रुशेव ने जानकारी दी है। तीनों देशों के बीच हो रहे अभ्यास का नाम मैरीटाइम सुरक्षा बेल्ट 2026 है। खास बात ये है कि ये अभ्यास हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास और ओमान की खाड़ी व उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में हो रहा है, जो कि ईरान से ही लगा हुआ है।
तीनों देशों के बीच ये अभ्यास ईरान की नौसेना की ही पहल पर शुरू किया गया था। तब से ये 2021 को छोड़कर हर साल होता रहा है। तीनों देशों की ओर से इसमें तीन युद्धपोत भेजा है। इसके अलावा इसमें विभिन्न जहाज, विमान और नौसैनिक बल शामिल हैं। अभ्यास में समन्वय, सामरिक तैयारी, तेज प्रतिक्रिया प्रक्रियाएं, समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, जहाज बचाव अभियान जैसी चीजें प्रैक्टिस की जा रही हैं।
पैट्रुशेव ने एक साक्षात्कार में कहा कि ये मैन्यूवर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। उन्होंने इसे पश्चिमी समुद्री वर्चस्व के जवाब में बताया और कहा कि तीनों देश मिलकर समुद्रों पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके शब्दों में, “पश्चिम ने लंबे समय तक समुद्रों पर राज किया, लेकिन अब उनकी यह स्थिति काफी हद तक बीते जमाने की बात हो गई है।” उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र फिर से सैन्य आक्रामकता और गनबोट कूटनीति का मंच बन रहे हैं, जैसे वेनेजुएला और ईरान के आसपास हाल की घटनाएं।
इसी सप्ताह से शुरू होगा संयुक्त अभ्यास
ये सैन्य अभ्यास इसी महीने हो रहा है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, रूस और ईरान अलग से भी इस हफ्ते संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं, जो ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंधों को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा बढ़ाना है।











