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बिना अनुमति घर से निकली महिला तो होगी जेल : तालिबान के नए क्रिमिनल कोड ने उड़ाई मानवाधिकार की धज्जियां

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने 90 पन्नों का नया क्रिमिनल कोड लागू किया, जिस पर सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हस्ताक्षर किए। नए कानून में महिलाओं की स्वतंत्रता, घरेलू हिंसा और न्याय प्रक्रिया को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Feb 18, 2026, 11:40 pm IST
inविश्व
File Photo

File Photo

अफगानिस्तान तालिबान सरकार ने 90 पन्नों का नया क्रिमिनल कोड लागू कर दिया है, जिस पर सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हस्ताक्षर किए हैं। इस कानून के लागू होते ही मानवाधिकार संगठनों में गहरी चिंता देखी जा रही है। विशेषज्ञों की माने तो यह कोड खास तौर पर महिलाओं के अधिकारों पर गंभीर असर डालेगा, साथ ही इससे मानवाधिकार भी प्रभावित होंगे।

अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर जेल

नए कानून के तहत यदि कोई विवाहित महिला अपने पति की स्पष्ट अनुमति के बिना अपने रिश्तेदारों से मिलने जाती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है।

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घरेलू हिंसा को लेकर बढ़ी चिंता

बता दें कि इस अफगानिस्तान नया कानून में ऐसे प्रावधान शामिल हैं जिनके तहत पति या पिता को तय सीमा में महिलाओं और बच्चों को शारीरिक दंड देने की अनुमति दी गई है। जिससे  घरेलू हिंसा को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल सकती है।

कानून के अनुसार, कम गंभीर अपराधों में पति अपनी पत्नी को मारपीट कर सजा दे सकता है। वहीं गंभीर अपराधों के मामलों में शारीरिक सजा का अधिकार मजहबी मौलवियों को दिया गया है।

मजहबी नेताओं को कानूनी छूट

90 पेज के इस कोड में इस्लामी ग्रंथों की पुरानी शर्तों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट्स की माने तो, इससे ऊंचे रसूख वाले मजहबी नेताओं को आपराधिक मामलों में लगभग छूट मिल जाती है, जबकि मजदूर और आम वर्ग के लोगों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है।

महिलाओं के लिए न्याय पाना और मुश्किल

इस नए कानून में महिलाओं को न्याय पाने का रास्ता तो दिया गया है, लेकिन उसकी प्रक्रिया बेहद कठिन है। यदि किसी महिला पर हमला होता है, तो उसे अदालत में अपने घाव दिखाकर गंभीर शारीरिक नुकसान साबित करना होगा और इसके साथ ही उसे पूरी तरह से ढका रहना होगा।

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इसके बावजूद अगर कोई महिला सभी कानूनी अड़चनों को पार कर यह साबित भी कर दे कि उसके पति ने उस पर गंभीर हमला किया है, तो भी आरोपी पति को अधिकतम 15 दिन की सजा ही दी जा सकती है।

गुलामी जैसे रिवाजों को मान्यता

इस नए तालिबान क्रिमिनल कोड में कथित तौर पर ऐसे प्रावधान भी शामिल हैं जिन्हें ‘गुलामी जैसे रिवाजों’ को मान्यता देने वाला बताया जा रहा है। कुछ मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इससे महिलाओं की स्थिति और कमजोर हो सकती है तथा उन्हें समाज में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

बरहाल इस नए कानून के लागू होने के बाद अफगानिस्तान महिला अधिकार संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। कई का मानना है कि यह कदम महिलाओं की सामाजिक, कानूनी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गहरा असर डाल सकता है।

अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कानून पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच तालिबान सरकार का रुख क्या रहता है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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