दिल्ली विधानसभा ने सिख गुरुओं के खिलाफ विपक्ष की नेता आतिशी की कथित टिप्पणी वाले वीडियो को लेकर पंजाब के जालंधर में दर्ज मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है। विधानसभा सचिवालय ने पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले में 20 फरवरी तक अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
मामले से जुड़ी सारी सामग्री तलब
पत्र में पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को जालंधर में दर्ज प्राथमिकी, जिस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और फॉरेंसिक प्रयोगशाला, सोशल मीडिया विशेषज्ञ तथा पुलिस के तकनीकी प्रकोष्ठ की रिपोर्ट की प्रतियां पेश करने का भी निर्देश दिया गया है। यह मामला जनवरी में दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आतिशी की ओर से कथित तौर पर की गई एक टिप्पणी से उपजा है।
पुलिस ने दर्ज किया था केस
बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता की टिप्पणी सिख गुरुओं के प्रति अपमानजनक थी। उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की थी। इसी बीच, पंजाब पुलिस ने संबंधित वीडियो क्लिप को साझा किए जाने के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। यह मामला फॉरेंसिक प्रयोगशाला की एक रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें दावा किया गया था कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई है।
विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के पास केस
बाद में इस मामले को दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के निर्देश पर वीडियो क्लिप की फिर से फॉरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें दावा किया गया कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। आतिशी ने विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश दलीलों में अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है और विधानसभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की है।
विशेषाधिकार व अवमानना की चेतावनी
विधानसभा सचिवालय ने पंजाब के अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार, विशेषाधिकार समिति के विचार के लिए उनके जवाब और दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर उपलब्ध कराए जाने आवश्यक हैं, ऐसा न करने पर विशेषाधिकार का उल्लंघन और अवमानना मानी जा सकती है।













