कनाडा और फ्रांस ने ग्रीनलैंड में अपने कांसुलेट खोल दिए हैं। ये कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से इस आर्कटिक द्वीप पर कब्जे की बात दोहराई है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, और ये घटनाक्रम NATO देशों के बीच तनाव को दिखाता है।
दुनिया का सबसे बड़ा आईलैंड है ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो डेनमार्क के अधीन है लेकिन काफी हद तक खुद अपना फैसला लेता है। यहां की आबादी बहुत कम है, ज्यादातर इन्यूइट लोग रहते हैं। ये जगह आर्कटिक में रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिका पहले से ही यहां थुले एयर बेस चलाता है। ट्रंप ने पहले 2019 में भी ग्रीनलैंड खरीदने की बात की थी, और अब 2026 में फिर से जोर दिया है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ये जरूरी है। उन्होंने कहा कि रूस और चीन यहां खतरा पैदा कर सकते हैं। लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ मना कर दिया कि ये बिकने वाला माल नहीं है। रूस और चीन ने भी कहा कि उनके कोई इरादे नहीं हैं।
कनाडा ने खोला कांसुलेट
6 फरवरी 2026 को कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने न्यूक (ग्रीनलैंड की राजधानी) में अपना कांसुलेट खोला। ये समारोह डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोत्जफेल्ट के साथ हुआ। कनाडा ने कनाडाई झंडा फहराया और आनंद ने कहा कि वो ग्रीनलैंड और डेनमार्क के संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा समर्थन करते हैं। ये कदम कनाडा की आर्कटिक फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा है, जिसकी योजना 2024 में ही बन गई थी – ट्रंप की हालिया बातों से पहले। मौसम खराब होने से नवंबर में उद्घाटन टल गया था। कनाडाई गवर्नर जनरल मैरी साइमन भी वहां पहुंचीं। आनंद ने कहा कि ये सिर्फ दिखावा नहीं है, बल्कि डिफेंस, सिक्योरिटी, इकोनॉमिक टाइज और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर लंबे समय तक साथ काम करने की बात है।
फ्रांस का कांसुलेट और यूरोपीय सपोर्ट
फ्रांस ने भी न्यूक में कांसुलेट जनरल खोला, और वो पहला EU देश बन गया जिसने ग्रीनलैंड में ऐसा कांसुलेट बनाया। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बाररो ने खुद को कांसुल जनरल घोषित किया। फ्रेंच फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा कि फ्रांस डेनमार्क के क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और इसका समर्थन करता है। फ्रांस के राजदूत क्रिस्टोफ पेरिसोट ने कहा कि ये ग्रीनलैंड और डेनमार्क के दोस्तों के लिए सॉलिडैरिटी का संकेत है – जब जरूरत पड़ती है, तो असली दोस्त दिखते हैं।
डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में किया सैन्य अभ्यास
हाल ही में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में मिलिट्री एक्सरसाइज की, जिसमें जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे और UK ने छोटे-छोटे दल भेजे। ये सब NATO सहयोगी हैं। ट्रंप ने इन यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी दी थी, लेकिन बाद में वापस ले ली और कहा कि NATO सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुट्टे के साथ ग्रीनलैंड पर कोई फ्रेमवर्क डील हो गई है – हालांकि डिटेल्स नहीं बताए। डेनमार्क की पार्लियामेंट डिफेंस कमिटी के चेयर रास्मस जारलोव ने कहा कि रूस-चीन से कोई खतरा नहीं है।
















