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होम भारत पंजाब

पंजाब के आतंकवाद पीड़ित परिवार अब तक सुविधाओं के लिए भटक रहे: बलिदानों पुलिस वालों के आश्रितों का दर्द

पंजाब में आतंकवाद के दौर में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिवार आज भी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। फौज शहीदों जैसा लाभ क्यों नहीं? मांगें: 10 लाख मदद, 10 हजार पेंशन, प्लॉट और आयोग गठन। मंत्री मुंडियां से बैठक में उठे मुद्दे।

Written byराकेश सैनराकेश सैन — edited by कुलदीप सिंह
Feb 7, 2026, 12:50 pm IST
in पंजाब
Bhagwant mann

भगवंत मान

पंजाब में आतंकवाद के दौर में हजारों परिवार ऐसे थे, जिन्होंने अपनों को खो दिया। काफी पुलिस वालों ने आतंकियों से लोहा लेते हुए अपनी जान न्योछावर कर दी लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि इनके आश्रित आज तक घोषित सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं। इन परिवारों ने पूछा कि उनमें और बलिदान सैनिकों के परिवारों में क्या अंतर है? सैनिक सीमा पर देश की रक्षा करते हुए बलिदान होते हैं और हमारे परिजनों ने सीमा के भीतर आतंकवाद से लोहा लेते और देश की एकता अखण्डता की रक्षा करते हुए बलिदानी प्राप्त की।

पंजाब के बलिदान परिवारों का कहना है कि विभिन्न सरकारों ने इन परिवारों को जो देने का वादा किया था वे अभी तक नहीं मिल पाया है। ये आश्रित आज अपने साथ पक्षपात रवैये का भी आरोप लगाते हैं। पंजाब में 32,514 आतंकवाद पीडि़त और 2046 पुलिस बलिदान परिवार हैं।

ऑल इंडिया टेररिस्ट विक्टिम एसोसिएशन व ऑल इंडिया माइग्रेंट फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल की बैठक पंजाब के राजस्व व पुनर्वास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां व अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा के साथ हुई। करीब एक घंटा चली इस बैठक में एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. बीआर हस्तिर और सतिंदर पाल सिंह सिद्धू ने पीड़ित परिवारों की समस्याओं व मांगों से उन्हें अवगत करवाया। बैठक में आतंकवाद पीड़ित आयोग गठित करने पर चर्चा की गई जिसके माध्यम से इन आश्रितों की समस्याओं का सरकारी स्तर पर समाधान किया जा सके। इस बारे में मंत्री मुंडियां मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।

बैठक में हुई इन मांगों पर चर्चा

  • आतंकवाद में मारे गए लोगों के आश्रितों को 5 व पुलिस शहीदों के आश्रितों को 10 लाख रुपये वित्तीय मदद दी जाए।
  • आयोग का गठन किया जाए, पेंशन एवं गुजारा भत्ता 6 हजार बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रति माह किया जाए।
  • 23 जुलाई 2001 को तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुए एक बैठक में आश्रितों के लिए कई घोषणाएं की गई थीं। साल 2002 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता की वजह से कई घोषणाएं लागू नहीं हुईं, उन्हें लागू करने की मांग।
  • कुछ पीड़ित परिवारों को प्लॉट दिए गए मगर बहुत से रह गए, उन्हें प्लॉट देने की मांग।
  • काफी पीड़ितों के पास रेड कार्ड नहीं है। उन्हें कोटे का लाभ भी नहीं मिल पाता।
  • एक्सग्रेशिया रिवाइज्ड नहीं हुआ और बच्चों को भी योग्य अनुसार नौकरी नहीं मिली।

आंखों के सामने छह परिजन भून डाले

आतंकवाद के दौर में दर्द झेलने वाले लोगों के जख्म आज भी हरे हैं। सुशीला नेगी के पिता गवर्नर हाउस में नौकरी करते थे। वे अपने परिवार के साथ ससुराल जा रही थी। लालड़ू के पास माता रिक्खी देवी, पिता मातवर सिंह, पति फतेह सिंह, बेटा विनोद व जगमोहन व बेटी गीता को बस में उसके सामने आतंकियों ने गोलियां ने भून दिया था। उन्हें भी गोलियों के छर्रे लगे मगर वे बच गई। 12 साल नौकरी की मगर पेंशन नहीं मिली। प्लॉट भी नहीं मिला आज भी किराये पर रह रही हैं।

फौज के शहीदों की तरह लाभ मिले

चरणजीत कौर के पति कश्मीर सिंह भी 27 जनवरी 1992 को आतंकियों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए थे। उन्हें भी बहादुरी पुरस्कार मिला मगर राज्य की ओर से सुविधाओं के लिए वे आज तक भटक रही हैं। फौज में यदि कोई जवान बलिदान होता है तो केंद्र व राज्य सरकार उनके आश्रितों को काफी लाभ देती है। इसी तरह पुलिस के बलिदान जवान को भी मिलना चाहिए, क्योंकि पीड़ा और परेशानियां दोनों के आश्रितों के समक्ष एक जैसी होती हैं। एक्सग्रेशिया का आकलन ठीक से नहीं हुआ लिहाजा लाभ कम मिला। उन्हें कोई प्लॉट भी नहीं मिला और पेंशन भी बहुत कम मिलती है।

घर फूंक दिया, पंजाब छोड़ना पड़ा

डॉ. बीआर हस्तिर ने बताया कि उनके डीएसपी चाचा पंडित ताराचंद आतंकियों से लड़ते हुए 6 नवंबर 1987 को बलिदान हुए। बटाला में कई बार उनके घर पर हमला हुआ और घर को आग लगा दी गई। दहशत की वजह से परिवार को पंजाब छोडऩा पड़ा। अंबाला और पानीपत के बाद दिल्ली में रहे। आतंकवाद का दौर खत्म हुआ तो वापस अमृतसर आए। आश्रितों को कोई प्लॉट नहीं हुआ। सुविधाओं के लिए बहुत से पीड़ित आज भी भटक रहे हैं।

Topics: पंजाब में आतंकवाद पीड़ित परिवारों की मांगेंPunjab terrorism victimspolice martyr familiesdemands of terror victimsPunjab martyr benefitsdemands of terrorism-affected families in Punjabपंजाब आतंकवाद पीड़ितपुलिस बलिदानी परिवारआतंक पीड़ित मांगेंपंजाब बलिदानी सुविधाएं
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