लॉटरी निकलना वैसे तो खुशी और सौभाग्य की बात माना जाता है परंतु पंजाब में बदतर कानून व्यवस्था के चलते लॉटरी मौत का संदेश लेकर आने लगी है। परिणामस्वरूप कई लॉटरी विजेता या तो भूमिगत हो गए और कई विजेता अपना पुरस्कार तक लेने नहीं आए। लोगों ने प्रश्न उठाया है कि गैंगस्टरों को लॉटरी विजेताओं की सूचना व निजी जानकारी आखिर कहां से मिलती है? कहीं यह लॉटरी व्यवस्था में चूक या सांठगांठ का मामला तो नहीं तो नहीं है?
जयपुर निवासी को मिली धमकी
नवंबर 2025 के महीने में जयपुर के सब्जी विक्रेता अमित सेहरा को पंजाब सरकार की लॉटरी बंपर का 11 करोड़ का पुरस्कार निकला। पुरस्कार निकलते है उसे पंजाब से गैंगस्टरों के फोन आने शुरू हो गए, परेशान हो अमित को राजस्थान पुलिस की सुरक्षा देनी पड़ी।
फरीदकोट में विजेता परिवार हुआ भूमिगत
दिसम्बर में पंजाब के फरीदकोट जिले के एक गरीब दिहाड़ी मजदूर परिवार की किस्मत उस समय चमक उठी जब उन्होंने पंजाब स्टेट लॉटरी में 1.5 करोड़ रुपये का पहला पुरस्कार जीत लिया। लेकिन खुशी मनाने के बजाय यह परिवार डर के साए में जीने लगा। फिरौती और धमकी के डर के चलते ये परिवार घर छोड़कर चुपचाप गायब हो गया। गांव वालों ने जब दंपति का घर बंद देखा, तो उन्हें चिंता हुई। उन्होंने कई बार फोन किया, लेकिन दोनों के मोबाइल बंद थे। किसी अनहोनी की आशंका में ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस जांच में जुटी और कुछ दिनों बाद परिवार को एक ऐसी जगह से ढूंढ निकाला, जिसका खुलासा सुरक्षा कारणों से नहीं किया गया है। बता दें कि लॉटरी विजेता नसीब कौर और उनके पति राम सिंह मजदूरी कर अपना परिवार पालते हैं। दोनों अपने बेटे के साथ फरीदकोट जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर सैदेके गांव में रहते हैं। कुछ दिन पहले नसीब कौर ने पंजाब स्टेट लॉटरी का टिकट खरीदा था, लेकिन खरीद के समय उन्होंने अपने पति का फोन नंबर दर्ज कराया था। लॉटरी विक्रेता राजू ने बताया कि राम सिंह पिछले दो साल से टिकट खरीदते आए हैं, पर इस बार उन्होंने 200 रुपये का महंगा टिकट लेकर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। किस्मत ने उन्हें करोड़पति बना दिया। आज भी यह परिवार अपने गांव में रहने की हिम्मत जुटा नहीं पा रहा है।
कई विजेता ईनाम नहीं लेने आ रहे
लॉटरी विभाग के अधिकारी बताते हैं कि आज विजेता अपने नाम-पते देने से घबराते हैं और कई विजेता तो जीतने के बाद ईनाम की राशि लेने तक नहीं आए। पंजाब सरकार जनवरी में लोहड़ी/नववर्ष बंपर, मार्च में होली बंपर, अप्रैल में बैसाखी बंपर, अगस्त में राखी बंपर और अक्तूबर/नवंबर में दीवाली बंपर निकालती है। इन बंपरों में करोड़ों के ईनाम होते हैं जो गैंगस्टरों को आकर्षित करते हैं।
जालंधर में आप नेता की हत्या
दूसरी ओर राज्य की ढिलमुल कानून व्यवस्था का दूसरा उदाहरण है कि पंजाब में पिछले दो दिनों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से जुड़े दो नेताओं की अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी। आज शुक्रवार को जालंधर में गुरुद्वारा साहिब के बाहर आप नेता लक्की ओबरॉय की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सुबह-सुबह गोलियों की आवाज से इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात उस समय हुई जब लक्की ओबरॉय मॉडल टाउन में गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने आठ-दस राउंड फायरिंग की।
हमलावरों ने थार में जा रहे लक्की पर 8 से 10 गोलियां चलाई, जिसमें से कुछ गोलियां उनकी छाती और सिर में लगी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। लक्की ओबरॉय पार्षद का चुनाव लड़ चुके थे। पुलिस के अनुसार, वारदात सुबह करीब सवा आठ बजे हुई। बदमाशों ने ओबरॉय की थार को निशाना बनाया। पुलिस के अनुसार, हमलावर बाइक पर सवार होकर आए थे। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है।
दो दिन में दो नेताओं की हत्या
एक दिन पहले तरनतारन के गांव चीमा खुर्द में आप के सरपंच गुरभेज सिंह की तेजधार हथियारों से हमला करके हत्या कर दी गई थी। इस वारदात को अंजाम किसी और ने नहीं, बल्कि आप पार्टी से संबंधित पूर्व सरपंच शरणजीत सिंह ने अपने साथियों से मिलकर दिया। चीमा खुर्द का शरनजीत सिंह कांग्रेस के कार्यकाल दौरान गांव का सरपंच रह चुका है। बाद में उसने आप ज्वाइन कर ली। पंचायती चुनाव के दौरान शरनजीत सिंह ने पार्टी की तरफ से चुनाव लडऩे लिए आवेदन दिया, लेकिन गांव वालों की सहमति से गुरभेज सिंह के नाम चुना गया था।













