पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका एक इंटरव्यू वीडियो वायरल हुआ है। पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा कि इतिहास की किताबों में जिन्हें विदेशी आक्रमणकारी या लुटेरे बताया जाता है, उनमें महमूद गजनवी और लोदी वंश के शासक शामिल हैं, लेकिन वे असल में भारतीय ही थे।
हामिद अंसारी ने क्या कहा?
अंसारी ने इंटरव्यू में कहा, “इतिहास की पुस्तकों में जिन्हें विदेशी आक्रमणकारी और लुटेरे लिखा गया है, उनमें महमूद गजनवी भी शामिल हैं। वे वास्तव में ‘भारतीय लुटेरे’ थे। वे बाहर से नहीं आए थे। राजनीतिक रूप से यह कहना सुविधाजनक है कि उन्होंने यह नष्ट किया, वह नष्ट किया, लेकिन वे सब भारतीय थे।” उन्होंने लोदी वंश का भी जिक्र किया और कहा कि ये लोग उस समय के भारत के हिस्से से ही थे, इसलिए इन्हें विदेशी कहना गलत है।
यह बयान महमूद गजनवी के संदर्भ में खासा चर्चा में रहा, जिन्होंने 11वीं सदी में भारत पर कई बार हमले किए थे, खासकर सोमनाथ मंदिर पर। लोदी वंश के शासक भी अफगान मूल के माने जाते हैं और दिल्ली सल्तनत में शासन किया था।
बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया
बीजेपी ने इस बयान पर फौरन हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो शेयर करते हुए कहा कि कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम अब महमूद गजनवी का गुणगान कर रहा है, जिसने सोमनाथ मंदिर को नष्ट और अपवित्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा ऐसे लोगों के साथ खड़ी रही है जो हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार करने वाले रहे हैं।
पूनावाला ने दिल्ली दंगों के कुछ आरोपियों जैसे उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र भी किया और कहा कि कांग्रेस अलगाववादी सोच वालों को सपोर्ट करती रही है। बीजेपी ने इसे “बीमार मानसिकता” बताया और कहा कि यह इतिहास को सफेदपोश करने की कोशिश है। अन्य बीजेपी नेताओं ने भी कहा कि गजनवी ने 17 बार भारत पर हमले किए और सोमनाथ को लूटा, ऐसे में उसे भारतीय कहना इतिहास के साथ अन्याय है। पार्टी ने कांग्रेस पर सवाल उठाया कि क्या यह उनकी सोच है।
क्या है पूरा मामला
हामिद अंसारी 2007 से 2017 तक उपराष्ट्रपति रहे और उस समय यूपीए सरकार कांग्रेस की थी। वे पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। यह बयान एक पुराने इंटरव्यू या हालिया बातचीत से निकला माना जा रहा है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे कांग्रेस के इतिहास की नई व्याख्या के रूप में देखा जा रहा है, जबकि बीजेपी इसे हिंदू विरोधी मानसिकता से जोड़ रही है।
अभी तक कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है। यह मामला राजनीतिक बहस को और गरमा सकता है, क्योंकि इतिहास की व्याख्या पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद पुराने हैं।
















