पाञ्चजन्य बात भारत की कार्यक्रम में बोले स्वामी दीपांकर- "एक हैं तो सेफ हैं",जातिवाद पर दिया बड़ा संदेश
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पाञ्चजन्य बात भारत की कार्यक्रम में बोले स्वामी दीपांकर- “एक हैं तो सेफ हैं”,जातिवाद पर दिया बड़ा संदेश

पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना वर्ष पर "बात भारत की" कार्यक्रम में स्वामी दीपांकर ने जातिवाद खत्म करने और हिंदू एकता पर जोर दिया। 1165 दिनों से चल रही भिक्षा यात्रा में 1 करोड़ 15 लाख लोग जुड़े, जानें उनका संदेश "एक हैं तो सेफ हैं"।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 30, 2026, 12:56 pm IST
in भारत
Panchjanya baat bharat ki Swami Deepankar

पाञ्चजन्य के बात भारत की कार्यक्रम में बोलते स्वामी दीपांकर

पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित “बात भारत की” कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने जातिवाद की समस्या को लेकर कहा कि संवाद हर चीज का हल है। आज जरूरत एक ऐसे व्यक्ति की है, जो ये कहे कि एक हैं तो सेफ हैं।

उन्होंने बताया कि वो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के अंतर्गत देवबंद तहसील क्षेत्र में देवीकुंड नामक स्थान के पास स्थित एक श्मशान में रहते हैं। स्वामी दीपांकर ने बताया कि वो पिछले 1165 दिनों से जातियों में बंटे हुए हिन्दू समाज को एक करने के मिशन पर हैं। इस यात्रा में मैंने लोगों से एक ही भिक्षा मांगी कि वो संकल्प ले कि वो जातियों में न बंटकर एक रहेगा। 23 नवंबर 2022 को शुरू हुई हमारी ये यात्रा के तहत अब तक 6 राज्यों को कवर किया जा चुका है। अब तक 1 करोड़ 15 लाख लोग इसमें जुड़ चुके हैं। इस मौके पर स्वामी दीपांकर ने कहा कि जातियों में विभक्त समाज बहुत ही कमजोर होता है। ये यात्रा सनातना एकता को मजबूत करने की है। हिन्दुत्व की परिभाषा को चरितार्थ करने की है ये यात्रा।

वह अपनी यात्रा को लेकर कहते हैं-

श्वेत भी मैं हूं, शुद्ध भी मैं हूं, विरुद्ध हो मेरे तो युद्ध भी मैं हूं।
इस भारत की धरती का मैं केंद्र बिन्दु हूं, भाई साहब मैं ही हिन्दू हूं।।

क्या जातिवाद ऐसी गंभीर समस्या है, जिसे हटाने में वर्षों लग जाएंगे, या संवाद से चीजें सही हो सकती हैं?

संवाद हर चीज का हल है। हमारे तो मर्यादा पुरुषोत्तम तो वही थे, जो आदिवासी, वनवासी औऱ गिरवासी सभी को साथ लेकर चले थे। आज जरूरत एक ऐसे व्यक्ति की है, जो ये कहे कि एक हैं तो सेफ हैं। हम लोग चाहें तो चीजें बदल सकती हैं। समय लगेगा तो लगाएंगे, लेकिन समाज को बिखरने नहीं देंगे। हिन्दू मतलब हिन्दू बस बात खत्म।

कोई भी नीति या नियम हिन्दू एकता में बाधा नहीं बन सकते हैं?

जिस तरह से मीडिया में सवर्णों के सड़कों पर होने की खबरें चलाई जा रही है, मुझे लगता है कि ये कहना चाहिए कि हिन्दू सड़कों पर है और ये मांग कर रहा है कि हमें हमारे भाईयों से विभाजित मत कीजिए। संत रविदास कहा करते थे, ‘जाति-पांति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’। हमारी ताकत तो आप सब ही हैं।

इसके साथ ही स्वामी दीपांकर ने बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों के द्वारा दीपू चंद्र दास की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार से दीपू के दर्द को हमने समझा, उसी तरह से हमें सामान्य वर्ग के छात्रों के दर्दों को समझना होगा, लेकिन किसी एक के दर्द को समझना किसी दूसरे का विरोध नहीं है। हम सभी संगठित होकर चलें यही एक रास्ता है।

जो समाज हजारों-लाखों की संख्या में कभी एक हो जाता है वो अगले ही दिन क्यों बंटने लग जाता है?

बिल्कुल होगा और हो ही रहा है। हां ये सच है कि चुनौतियां आएंगी-जाएंगी, लेकिन सनातन को संगठित होकर मजबूत होना होगा। हमें तटस्थ रहकर एक होने के भाव को चरितार्थ करना होगा।

कुरान में ऐसा क्या है कि उसे मानने वाले घर में पैदा हुआ बच्चा अपनी टोपी नहीं भूलता और हम तिलक भूल गए?

हमारे यहां चैम्पियन तो बहुत थे, लेकिन वो जातियों के थे। इसके लिए जनसहभागिता आवश्यक है। मात्र एक संगठन करे, उससे नहीं होगा, उसके लिए हमारा यानि जनता का सहभाग आवश्यक है। जब सनातन के लिए काम करने के लिए निकलते हैं, तो सबसे पहली चुनौती एक सनातनी ही होता है। हमें हर नुक्कड़ पर एक रायचंद मिलते हैं। लेकिन करमचंद नहीं मिलता है, लेकिन जिस तेजी से समाज बदल रहा है अब करमचंद भी मिलेंगे। आने वाले वक्त में समाज स्वयं को एक सूत्र में बांधने का प्रयास करेगा। सनातन के संगठित होना जरूरी भी है और मजबूरी भी है। कल वक्त नहीं आएगा।

जातिगत जनगणना पर बात

जातिगत जनगणना पर एक सवाल के जवाब में स्वामी दीपांकर ने कहा कि इस देश में जाति को जिंदा रखने का काम नेताओं ने ही किया है। लेकिन अगर जाति को समाप्त होते देखना है तो कुंभ या भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में चले जाइए, वहां जाति ही नहीं दिखेगी।

Topics: हिंदुत्वसनातन एकताHindutvaIndia's perspectiveहिंदू एकताbegging pilgrimageजातिवादunited we are safecasteismस्वामी दीपांकरHindu Unityएक हैं तो सेफ हैंSwami Dipankarभिक्षा यात्रा#panchjanyaSanatan Unity
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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