चंडीगढ़। कानूनी जंग, सियासी मंच और किसानों की चिंता के बीच 27 जनवरी की एसवाईएल पर हुई अहम बैठक ने संवाद की उम्मीद जगाई। दशकों से सुलग रहे सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर हरियाणा और पंजाब सूबे के मुख्यमंत्रियों की बैठक भले किसी ठोस फैसले पर खत्म नहीं हुई, लेकिन बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत अवश्य है। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आमने-सामने बैठे। बैठक करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने माहौल को सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बताया। यह बयान स्पष्ट रुप से दर्शा रहा है कि इस बार मंच पर राजनीतिक बयानबाजी कम और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक रही।
यह है पूरा विवाद
एसवाईएल नहर का मकसद रावी-ब्यास के पानी का बंटवारा तय करना और हरियाणा को उसका हिस्सा दिलाना है। 1981 के समझौते के तहत बनी योजना के अनुसार नहर की कुल लंबाई 214 किलोमीटर होनी थी। हरियाणा ने अपने हिस्से का निर्माण लगभग पूरा कर लिया, लेकिन पंजाब में काम रुक गया। बाद में पंजाब ने जमीन डिनोटिफाई कर दी और नहर का बना हिस्सा भी समतल कर दिया। यहीं से मामला अदालतों और राजनीति के दलदल में फंस गया।सुप्रीम कोर्ट पहले हरियाणा के पक्ष में टिप्पणी कर चुका है और केंद्र भी समाधान के लिए राज्यों को बातचीत की सलाह देता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में यह ताजा बैठक हुई।आज प्रेसवार्ता में भगवंत मान से नहर संबंधित प्रश्न दागा गया था,लेकिन वह उसे अपने चिर परिचित अंदाज में टाल गये।
बैठक की कारगुजारी
सबसे बड़ा संकेत यह रहा कि दोनों राज्यों ने मुद्दे को अब अफसरों के हवाले करने का फैसला किया है। यानी अगली जंग राजनीतिक मंच से हटकर तकनीकी रुप से आन टेबल होगी। तय हुआ है कि जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी नियमित बैठकों में डेटा, जल उपलब्धता और वास्तविक जरूरतों का आकलन करेंगे। साथ ही चर्चा में नदियों में वास्तविक पानी की उपलब्धता,दोनों राज्यों की सिंचाई आवश्यकताओं,भविष्य की जल संकट आशंकाओं, संरक्षण और वैकल्पिक प्रबंधन उपायों पर फोकस रहेगा।अधिकारियों की रिपोर्ट सीधे दोनों मुख्यमंत्रियों को सौंपी जाएंगी। आवश्यकता होगी तो फिर दोनों मुख्यमंत्रियों के स्तर की बैठक होगी।
मान की दो टूक और नायब ने दोहराई हक की बात
भगवंत मान ने दो टूक कहा कि पानी का सवाल भावनाओं से नहीं, हकीकत से तय होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि पहले यह साफ होना चाहिए कि पानी उपलब्ध कितना है। बिना संसाधन सुनिश्चित किए नहर निर्माण की बात करना पंजाब के लिए मुश्किल है।दूसरी तरफ नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के हक की बात दोहराई, लेकिन लहजा टकराव वाला नहीं था। उन्होंने कहा कि समाधान टकराव से नहीं, संवाद से निकलेगा और दोनों राज्यों को भाईचारे की भावना से आगे बढ़ना चाहिए।
सियासत भी गरम
बैठक के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने सवाल दागना शुरू कर दिया है। कुछ ने इसे समय खींचने की कवायद, तो कुछ ने चुनावी वर्षों में एसवाईएल मुद्दा अक्सर बातचीत की मेज रेंगने वाला कहा,जबकि वास्तविकता यह है कि जमीन पर कुछ नहीं बदलता।इस बैठक को प्रशासनिक तंत्र मानता है कि यह तकनीकी स्तर पर बातचीत ही इस विवाद की असली चाबी है, क्योंकि अदालत भी यही चाहती है कि राज्य आपसी सहमति से ही हल निकालें।
(संपादक विश्व संवाद केंद्र)












