Jaya Ekadashi 2026 Katha, Aarti, Puja Vidhi and Paran Time: आज यानी 29 जनवरी को जया एकादशी है। इस व्रत को रखने से मान-सम्मान, सफलता और विजय की प्राप्ति होती है। इस दिन लक्ष्मी-नारायण भगवान की विशेष पूजा होती है। जया एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है।
जया एकादशी शुभ मुहूर्त 2026 (Jaya Ekadashi Shubh Muhurat 2026)
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 05:55 बजे से 06:22 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या – शाम 05:58 बजे से 07:17 बजे तक
- अमृत काल – शाम 09:26 बजे से 10:54 बजे तक
जया एकादशी पारण समय 2026 (Jaya Ekadashi Paran Time 2026)
30 जनवरी 2026 की सुबह 07:10 से 09:20 बजे तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 11:09 का है।
जया एकादशी व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा है कि स्वर्ग लोक में इंद्रदेव का भव्य राज्य था। देवता, गंधर्व और अप्सराएं वहां निवास करती थीं। इन्हीं में एक गंधर्व पुष्पदंत और एक अप्सरा माल्यवान थी। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। एक दिन स्वर्ग में एक दिव्य नृत्य-गान का आयोजन हुआ। इसमें दोनों को अपनी कला का प्रदर्शन करना था। किंतु प्रेम के वशीभूत होने के कारण वे अपनी सुध-बुध खो बैठे। सुर और ताल में त्रुटि होने लगी और वे देव-मर्यादा का पालन करना भूल गए। क्रोधित होकर इंद्रदेव ने उन्हें पिशाच योनि में जाने का शाप दे दिया।
शाप के प्रभाव से दोनों हिमालय की कठोर परिस्थितियों में पिशाच बनकर रहने लगे। एक दिन संयोगवश जया एकादशी का दिन आया। उस दिन दोनों को भोजन प्राप्त नहीं हुआ और अनजाने में ही उनका एकादशी व्रत संपन्न हो गया। भगवान विष्णु इससे प्रसन्न हुए और दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई।
Jaya Ekadashi Puja Vidhi: जया एकादशी 2026 पूजा विधि
-जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
-घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित करें।
-भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, अक्षत, चंदन, फल, पंचामृत अर्पित करें।
-भगवान को तुलसी चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें।
-इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
-शाम के समय जया एकादशी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
Vishnu Ji Ki Aarti: ओम जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा, स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥













