मां नर्मदा: प्रलय मुक्त,चार युगों की साक्षी और नारी शक्ति के आदर्श की प्रतीक
July 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

मां नर्मदा: प्रलय मुक्त,चार युगों की साक्षी और नारी शक्ति के आदर्श की प्रतीक

महर्षि मार्कण्डेय, जिन्होंने नर्मदा की परिक्रमा की थी उन्होंने नर्मदा के विभिन्न स्वरूपों को अलग-अलग कल्पांतों में देखा है।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा — edited by Mahak Singh
Jan 25, 2026, 01:14 pm IST
in भारत

नर्मदाष्टक में आचार्य शंकर (आदि शंकराचार्य मां नर्मदा की स्तुति करते हैं कि हम लोगों ने शिव जी की जटाओं से प्रकट हुई रेवा के किनारे भील – भाट, विद्वान, नटों से आपका अमृतमय यशोगान सुना, घोर पाप – ताप को हरने वाली और सभी जीवों को सुख देने वाली माता नर्मदा आपके चरणों को मैं प्रणाम करता हूँ।

अहोऽमृतं स्वनं श्रुतं  महेश केश जातटे, 
किरात – सूत वाडवेषु पंडिते शठे नटे, 
दुरंत पाप-ताप-हारि सर्वजन्तु शर्मदे, 
त्वदीय पाद पंकजम् नमामि देवी नर्मदे।। 

महर्षि मार्कण्डेय, जिन्होंने नर्मदा की परिक्रमा की थी उन्होंने नर्मदा के विभिन्न स्वरूपों को अलग-अलग कल्पांतों में देखा है। मत्स्य कल्प में जब महर्षि मार्कण्डेय महामत्स्य रुपी महेश्वर के मुख में प्रविष्ट हुए तो महासमुद्र में प्रामदा रुपी नर्मदा को देखा-

“नद्यास्तस्यातु मध्यस्था प्रमदा कामरुपणी,
नीलोत्पलदल श्यामा महत्वप्रक्षोभवाहिनी दिव्यदृष्टिकाचित्रांगि कनकोज्वलशोभिताद्वाम्यां संगृह्य जानुन्नयां महत्पोतंव्यवस्थिता।।

अर्थात् नीलकमल के समान श्यामल रंग वाली, उत्तम कोटि के चित्र – विचित्र आभूषणों से शोभित वह प्रमदा ‘नर्मदा’ अपने घुटनों से एक विशाल नौका को उस प्रलय पयोधि में संतुलित किए हुए थीं। पौराणिक आख्यानों में माँ नर्मदा प्रलय के प्रभाव से मुक्त हैं। नर्मदा अयोनिजा हैं इसलिए उनके लिए जन्म अथवा जयंती जैसे शब्दों का प्रयोग सर्वथा अनुचित है। अतः उनका अवतरण, प्राकट्योत्सव (प्रकटोत्सव, प्रगटोत्सव)है और यही शिरोधार्य होना तर्कसंगत एवं धर्मसम्मत है।

“एक कन्या जिसे प्रेम और विवाह में धोखा दिया गया परंतु उसने आत्महत्या नहीं की वह कन्या विचलित और अवसादग्रस्त भी नहीं हुई वरन् अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से जगत माता के रुप में प्रतिष्ठित हुई, जबकि सोनभद्र और जोहिला केवल भौगोलिक अभिव्यक्ति ही बन कर रह गए ” – “आखिर क्यों? माँ नर्मदा विश्व में नारी सशक्तिकरण की सबसे बड़ी आदर्श हैं।” आद्य महाकल्प से प्रवाहित श्री शिव पुत्री प्रतिकल्पा माँ नर्मदा भौगोलिक और भूगर्भीय दृष्टि से न केवल भारत वरन् विश्व की सबसे प्राचीन नदी है, वहीं पौराणिक दृष्टि से चारों काल की साक्षी हैं और ऐतिहासिक दृष्टि से माँ नर्मदा नदी ही नहीं वरन् एक जीवित संस्कृति हैं, जहाँ आदिमानव से लेकर वर्तमान तक की संयोजक कड़ियां दृष्टिगोचर होती है। इस दृष्टि से माँ नर्मदा की संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन है। माँ नर्मदा का मानव कल्याण के लिए लिए धरती पर पृथक – पृथक कालखंडों में 3 बार अवतरण हुआ। ब्रह्मसृष्टि में पृथ्वी पर नर्मदा के अवतरण तीन बार इस प्रकार है। प्रथम बार पाद्मकल्प के प्रथम सतयुग में, द्वितीय बार दक्षसावर्णि मन्वन्तर के प्रथम सतयुग में और तृतीय बार वर्तमान वैवस्वत मन्वन्तर के प्रथम सतयुग में।

प्रथम कथा

इस सृष्टि से पूर्व की सृष्टि में समुद्र के अधिदेवता पर ब्रह्मा जी किसी कारण रुष्ट को गये और उन्होंने समुद्र को मानव जन्म धारण का शाप दिया, फलत: पाद्मकल्प में समुद्र के अधिदेवता राजा पुरुकुत्स के रूप में पृथ्वी पर उत्पन्न हुए। एक बार पुरुकुत्स ने ऋषियों तथा देवताओ से पूछा भूलोक तथा दिव्य लोक में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कौंन-सा है ? देवताओं ने बताया रेवा ही सर्वश्रेष्ठ तीर्थ हैं। वे परम पावनी तथा शिव को प्रिय हैं। उनकी अन्य किसी से तुलना नहीं है।राजा बोले – तब उन तीर्थोत्तमा रेवा को भूतल पर अवतीर्ण करने का प्रयत्न करना चाहिये। कवियों तथा देवताओ ने अपनी असमर्थता प्रकट की। उन्होंने कहा, वे नित्य शिव-सांनिध्य मे ही रहती हैं। शंकर जी भी उन्हें अपनी पुत्री मानते हैं वे उन्हें त्याग नहीं सकते। लेकिन राजा पुरुकुत्स निराश होने वाले नहीं थे। उनका संकल्प अटल था। विन्ध्य के शिखर पर जाकर उन्होंने तपस्या प्रारम्भ की। पुरुकुत्स की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव प्रकट हुए और उन्होंने राजा से वरदान माँगने को कहा। पुरुकुत्स बोले, परम तीर्थभूता नर्मदा का भूतल पर आप अवतरण करायें। उन रेवा के पृथ्वी पर अवतरण के सिवाय मुझे आपसे और कुछ नहीं चाहिये।

भगवान शिव ने पहले राजा को यह कार्य असम्भव बतलाया, किंतु जब शंकर जी ने देखा कि ये कोई दूसरा वर नहीं चाहते तो..उनकी निसपृहता एवं लोकमङ्गल की कामना से भगवान् भोलेनाथ बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने नर्मंदा को पृथ्वीपर उतरने का आदेश दिया। नर्मदा जी बोली, पृथ्वी पर मुझे कोई धारण करने वाला हो और आप भी मेरे समीप रहेंगे, तो में भूतल पर उतर सकती हूँ। शिवजी ने स्वीकार किया कि वे सर्वत्र नर्मदा के सन्निधिमें रहेंगे। आज भी नर्मदा का हर पत्थर शिवजी की प्रतिमाका द्योतक है तथा नर्मंदा का पावन तट शिवक्षेत्र कहलाता है। जब भगवान् शिव ने पर्वतो को आज्ञा दी कि आप नर्मदा को धारण करें, तब विंध्याचल के पुत्र पर्यंक पर्वत ने नर्मदा को धारण करना स्वीकार किया।

पर्यंक पर्वत के मेकल नाम की चोटी से बाँस के पेड़ के अंदर से माँ नर्मदा प्रकट हुई।इसी कारण इनका एक नाम ‘मेकलसुता’ हो गया। देवताओं ने आकर प्रार्थना की कि यदि आप हमारा स्पर्श करेंगी तो हमलोग भी पवित्र हो जायेंगे। नर्मदा ने उत्तर दिया, मै अभी तक कुमारी हूँ अत: किसी पुरुष का स्पर्श नहीं करूँगी, पर यदि कोई हठपूर्वक मेरा स्पर्श करेगा तो वह भस्म हो जायगा। अत: आप लोग पहले मेरे लिये उपयुक्त पुरुष का विधान करें। देवताओं ने बताया कि राजा पुरुकुत्स आपके सर्वथा योग्य हैं, वे समुद्र के अवतार हैं तथा नदियों के नित्यपति समुद्र ही हैं।वे तो साक्षात् नारायण के अङ्ग से उत्पन्न उन्ही के अंश हैं, अत: आप उन्हीं का वरण कों।नर्मदा ने प्रतीकात्मक राजा पुरुकुत्स को पतिरूप में वरण कर लिया, फिर राजा की आज्ञा से नर्मदा ने अपने जल से देवताओ को पवित्र किया।

द्वितीय कथा

दक्षसावर्णि मन्वन्तर में महाराज हिरण्यतेजा ने नर्मदा के अवतरण के लिये १४ हजार वर्षतक तपस्या की।तपस्या से संतुष्ट होकर भगवान् शिव ने दर्शन दिया, तब हिरण्यतेजा ने भगवान शंकर से नर्मदा-अवतरण के लिये प्रार्थना की। नर्मदा जी ने इस मन्दन्तर में अवतार लेते समय अत्यन्त विशाल रूप धारण कर लिया।ऐसा लगा कि वे द्युलोक तथा पृथ्वी का भी प्रलय कर देगी। ऐसी स्थिति में पर्यंक पर्वत के शिखर पर भगवान् शंकर के दिव्य लिङ्ग का प्राकट्य हुआ।उस लिङ्ग से हुंकार पुर्वक एक ध्वनि निकली कि रेवा ! तुम्हें अपनी मर्यादा में रहना चाहिये। उस ध्वनि को सुनकर नर्मदा जी शान्त हो गयी और अत्यन्त छोटे रूप में आविर्भूत लिङ्ग को स्नान कराती हुई पृथ्वी पर प्रकट हो गयी। इस कल्प में जब वे अवतीर्ण हुई तो उनके विवाह की बात नहीं उठी; क्योंकि उनका विवाह तो प्रथम कल्प में ही हो चुका था।

तृतीय कथा

इस वैवस्वत मन्वन्तर में राजा पुरूरवा ने नर्मदा को भूतल पर लाने के लिये तपस्या की। यह ध्यान देने योग्य है कि पुरूरवा ने प्रथम चार अरणि मन्थन कर के अग्रिदेव को प्रकट किया था और उन्हें अपना पुत्र माना था। वैदिक यज्ञ इस मन्वन्तर में पुरूरवा से ही प्रारम्भ हुए। उससे पहले लोग ध्यान तथा तप करते थे। पुरूरवा ने तपस्या करके शंकर जी को प्रसन्न किया और नर्मदा के पृथ्वी पर उतरने का वरदान माँगा। इस कल्प में विन्ध्य के पुत्र पर्यंक पर्वत का नाम अमरकण्टक पड़ गया था; क्योंकि देवताओं को जो असुर कष्ट पहुँचाते थे, इसी पर्वत के वनों में रहने लगे थे।जब भगवान् शंकर के बाण से जल कर त्रिपुर इस पर्वत पर गिरा तो उसकी ज्वाला से जलकर असुर भस्म हो गये।नर्मदा के अवतरण की यह कथा द्वितीय कल्प के ही समान है।

माँ नर्मदा: नारी शक्ति का शाश्वत प्रवाह

इस बार भी नर्मदा ने भूतल पर उतरते समय प्रलयं कारी रूप धारण किया था, किंतु भगवान् भोलेनाथ ने उन्हें अपनी मर्यादा में रहने का आदेश दे दिया था, जिससे वे अत्यन्त संकुचित होकर पृथ्वी पर प्रकट हुई। माँ नर्मदा कन्या से लेकर माँ बनने तक संपूर्ण विश्व में महिला सशक्तिकरण की आदर्श हैं। इस संदर्भ में जनजातीय गाथा मार्गदर्शी है कि जब कन्या नर्मदा का विवाह शोणभद्र (सोनभद्र) से होने वाला तभी जोहिला ने शोणभद्र के साथ मिलकर कन्या नर्मदा के साथ छल किया और विवाह भी तय कर लिया, तब कन्या नर्मदा ने अविवाहित होने का निर्णय लिया और मानव कल्याण के लिए वे अमरकंटक से विपरीत दिशा में प्रवाहित होकर खंभात की खाड़ी में पुरुकुत्स में मिल गईं।  इस तरह कन्या नर्मदा -अन्नदा, वनदा और सुखदा बनी तथा जगत माता के रुप में प्रतिष्ठित हुईं। परंतु सोनभद्र और जोहिला कभी वह स्थान प्राप्त न कर सके जो कन्या नर्मदा ने प्राप्त किया।कन्या नर्मदा ने आत्महत्या नहीं की और न ही अवसादग्रस्त हुईं, इसलिए महिला जीवन के हर पड़ाव में अवसाद आने पर माँ नर्मदा की कहानी उसके शमन के लिए रामबाण है, जीवन में प्रेम और विवाह ही सब कुछ नहीं है और यदि है भी तो असफलता के उपरांत भी और भी बेहतर जिया जा सकता है यही सिखातीं हैं माँ नर्मदा!!शिव पुत्री माँ नर्मदा विश्व की एकमात्र नदी हैं जिसकी परिक्रमा होती है। उनके दर्शन मात्र से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है। वे श्राद्ध और मोक्ष की अधिष्ठात्री हैं। मां गंगा स्वयं वर्ष में एक बार माँ नर्मदा के दर्शन करने आती हैं। माँ नर्मदा पर पुराण लिखा गया। उनसे पहले संबद्ध हर कंकड़ शिव है। सनातन धर्म में माँ नर्मदा को जितना माहात्म्य मिला वह और किसी कन्या को नहीं मिल सका। माँ नर्मदा में चारों युगों का सौम्य समाहार दृष्टिगोचर होता है।

Topics: Sanatan DharmaAdi ShankaracharyaMaa NarmadaMaharishi MarkandeyaNarmadashtakShiva's daughter NarmadaNarmada philosophy of GangaNarmada culture.
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने अपनाया सनातन धर्म

Ghar Wapsi: “आओ, अब घर लौट चलें”: गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापसी

अमरनाथ यात्रा: भारत की सनातन आस्था और राष्ट्रभाव का अप्रतिम प्रतीक

मां भद्रकाली मंदिर

38 साल बाद कश्मीर में लौटी मां भद्रकाली, आतंकियों से कैसे वापस मिली सदियों पुरानी मूर्ति?

(AI-generated image)

रामराज्य और कौटिल्य का सप्तांग मॉडल कैसे एक समृद्ध सभ्यता का निर्माण कर सकते हैं?

मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म

घर वापसी: उज्जैन में सलमान ने छोड़ा इस्लाम; अपनाया सनातन धर्म, बना शांतनु

राधेश्याम शुक्ला

कौन हैं सनातन की साधना करने वाले राधेश्याम शुक्ला, जिनकी प्रेरक कहानी गीता प्रेस ने साझा की

Load More

ताज़ा समाचार

Suvendu Adhikari

पश्चिम बंगाल: श्रावण में शिव भक्तों पर हेलिकॉप्टर से फूल बरसाएगी सरकार, CM शुभेंदु अधिकारी का ऐलान

Suvendu Adhikari derected fir against police atrocities

पश्चिम बंगाल में गुंडा दमन एक्ट: अपराधियों की संपत्ति कुर्की से लेकर 12 माह की हिरासत तक और भी बहुत कुछ

दिल्ली दंगा: ‘हिन्दू था मेरा बेटा इसलिए उसकी हत्या की’, IB अधिकारी अंकित शर्मा के परिजनों की पीड़ा

Racism with indian trucker in austrelia

“भारतीयों को मार डालो, बच्चों को डुबो दो…औरतों को गुलामी में बेंचो”– ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों के साथ हिंसक नस्लवाद

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी ब्लॉकेड: ईरान पर तीसरी रात हमला, ट्रंप का 20% टैरिफ ऐलान; तेल की कीमतें 7.8% बढ़ी

Donald trump marco rubio cuba president

ट्रंप प्रशासन ने ICC को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम शुरू की, मार्को रुबियो बोले- अमेरिकी संप्रभुता पर खतरा

trump Administration returns 81 billian dollor tarrifs

ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार देने के बाद, अमेरिका को 81 अरब डॉलर वापस करने पड़े

मूर्खों की संगति, टॉक्सिक कल्चर और झूठे दोस्तों से परेशान हैं? मानसिक शांति का अचूक मंत्र है यह श्लोक

समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रतिवेदन सौंपा।

MP में लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन

सुधांशु त्रिवेदी, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा

मुंबई आतंकी हमले को कांग्रेस हिंदू टेरर का रंग देना चाहती थी, ISI और कांग्रेस के बीच फिक्स्ड मैच था : सुधांशु त्रिवेदी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies