असम में वोटर लिस्ट की स्पेशल रिवीजन (SR) को लेकर विपक्ष लगातार झूठ फैला रहा है। असम में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट रोल जारी किया था। इसके तहत वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम चल रहा है। फॉर्म 7 इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसी को लेकर विपक्षी पार्टियां झूठ फैला रही हैं कि इस फॉर्म का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इस पर अब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि ये नोटिस केवल मियां (बांग्लादेशी मुसलमान) को ही भेजा गया है।
विपक्ष का आरोप क्या है?
विपक्षी दल, खासकर लेफ्ट पार्टियां (CPI(M), CPI, CPI(ML), Forward Bloc और SUCI(C)) ने मिलकर बयान दिया है कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल अल्पसंख्यक वोटरों, खासकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को टारगेट करने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे असली वोटरों को हैरान किया जा रहा है। कांग्रेस ने तो बोको-छयगांव इलाके में पुलिस में शिकायत तक दर्ज कराई है। उन्होंने स्थानीय बीजेपी नेताओं और अधिकारियों पर बिना वजह नाम हटाने और जोड़ने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग से मांग की है कि 2 फरवरी की डेडलाइन बढ़ाई जाए, ताकि क्लेम्स और आपत्तियों को ठीक से निपटाया जा सके और कोई योग्य वोटर बाहर न रहे।
केवल मियाओं को दिया नोटिस
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावोस से लौटते ही इस पर साफ-साफ बात की। उन्होंने कहा कि कोई विवाद नहीं है। नोटिस सिर्फ “मिया” (बांग्लादेश मूल के मुस्लिम प्रवासियों) को दिए जा रहे हैं, न कि असली असमिया लोगों या हिंदू परिवारों को। उन्होंने पूछा – “किस हिंदू परिवार को नोटिस मिला है? किस असमिया मुस्लिम घराने को नोटिस आया है?” उनका कहना था कि ये नोटिस इसलिए दिए जा रहे हैं ताकि ऐसे लोग दबाव में रहें और समझें कि असम के लोग उनका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें परेशान कर रहे हैं, इसमें कोई छिपाने वाली बात नहीं।”
सीएम ने आगे कहा कि ये सब कानून के दायरे में हो रहा है – कभी नोटिस से, कभी बेदखली से, कभी बॉर्डर पुलिस से। उनका मतलब था कि राज्य की अस्मिता बचाने के लिए ये कदम जरूरी हैं। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि गरीब और मजलूम लोगों के साथ हैं, पर जो “जाति” को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, उनके साथ नहीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
असम के चुनाव विभाग ने एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें साफ लिखा है कि फॉर्म 7 भरने से नाम अपने आप नहीं कटता। हर आपत्ति पर सख्त कानूनी प्रक्रिया होती है – फील्ड वेरिफिकेशन होता है, जिस व्यक्ति पर आपत्ति है, उसे नोटिस भेजा जाता है और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं, वेरिफिकेशन वाले अधिकारी आएं तो सहयोग करें। गलत जानकारी देने या झूठे दावे करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत सजा हो सकती है। विभाग का कहना है कि मकसद साफ, सही और सबको शामिल करने वाली वोटर लिस्ट बनाना है।
फॉर्म 7 और SR की बेसिक जानकारी
फॉर्म 7 वो फॉर्म है जिससे कोई वोटर किसी के नाम को चुनौती दे सकता है या खुद का/दूसरे का नाम हटवाने के लिए आवेदन कर सकता है। स्पेशल रिवीजन (SR) असम में चल रही ये खास एक्सरसाइज है। ड्राफ्ट रोल 12 दिसंबर 2025 को आया था। आपत्तियां और क्लेम्स 2 फरवरी तक निपटाए जाएंगे, और फाइनल रोल 10 फरवरी को पब्लिश होगा।

















