सुनीता विलियम्स नासा की एक बहुत ही प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने करीब 27 साल तक नासा में काम किया और अब सेवानिवृत्ति ले ली है। उनका जीवन और करियर मेहनत, हौसले और अद्भुत उपलब्धियों से भरा हुआ है। सुनीता ने न केवल कई अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए, बल्कि लाखों लोगों के लिए, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए प्रेरणा भी बनीं। सुनीता ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा 2006 में शुरू की थी। उनका पहला मिशन STS-116 था, जिसमें उन्होंने स्पेस शटल डिस्कवरी से उड़ान भरी। इसके बाद वे STS-117 मिशन में भी शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कई मिशनों में काम किया।
अंतरिक्ष में रिकॉर्ड बनाने वाली महिला- सुनीता ने एक्सपेडिशन 14 और 15 में फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका निभाई और इस दौरान चार स्पेसवॉक किए। इसके बाद 2012 में एक्सपेडिशन 32 और 33 में उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन की कमान संभाली। अपने पूरे करियर में उन्होंने 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो किसी भी महिला के लिए सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, उन्होंने कुल 9 स्पेसवॉक किए, जिनका समय 62 घंटे से अधिक था। सुनीता वह पहली महिला बनीं, जिन्होंने अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ पूरी की।
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री की यात्रा- सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं और गुजरात के झूलासन गांव से हैं। उनकी मां स्लोवेनियाई हैं। बचपन से ही सुनीता को भारतीय संस्कृति से लगाव था। उन्होंने रामायण और महाभारत की कहानियां पढ़ीं और अपने अंतरिक्ष मिशन के दौरान भगवद गीता भी अपने साथ ले गईं। चपन में सुनीता को खेलकूद का बहुत शौक था। खासकर तैराकी में उन्हें बहुत आनंद आता था। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और पदक भी जीते। पढ़ाई में भी वे तेज रहीं। उन्होंने यूएस नेवल अकादमी से भौतिक विज्ञान में स्नातक और फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री ली। नौसेना में रहते हुए सुनीता ने 4,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया। यह अनुभव उन्हें अंतरिक्ष यात्री बनने में बहुत मददगार साबित हुआ। वे हमेशा कहती हैं कि अंतरिक्ष उनकी सबसे पसंदीदा जगह है।

















