शक्ति नहीं, जिम्मेदारी अब नेतृत्व की नई कसौटी
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शक्ति नहीं, जिम्मेदारी अब नेतृत्व की नई कसौटी

रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स 2026 लॉन्च: सिंगापुर पहले, भारत 16वें स्थान पर। यह इंडेक्स देशों की जिम्मेदारी (नागरिकों, पर्यावरण और विश्व के प्रति) मापता है। शक्ति से आगे जिम्मेदारी की नई परिभाषा जानें।

Written byपाञ्चजन्यपाञ्चजन्य — edited by कुलदीप सिंह
Jan 22, 2026, 11:32 am IST
inविश्लेषण
Responsible nations index

19 जनवरी को दुनिया भर के नीति-विशेषज्ञ, शोधकर्ता और वैश्विक मामलों में रुचि रखने वाले लोग एक महत्वपूर्ण पहल के सार्वजनिक होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी दिन दिल्ली स्थित थिंक टैंक वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन द्वारा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई के सहयोग से, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

यह इंडेक्स दुनिया को देखने का एक बिल्कुल नया नजरिया सामने रखता है। रिपोर्ट यह नहीं पूछती कि कौन-सा देश सबसे अमीर है, सबसे शक्तिशाली है या सबसे प्रभावशाली है। इसके बजाय, रिपोर्ट एक कहीं अधिक सरल और सार्थक प्रश्न उठाती है—देश अपने नागरिकों के प्रति, अन्य देशों के प्रति और उस धरती के प्रति, जिसे हम सभी साझा करते हैं, कितना जिम्मेदार व्यवहार करते हैं?

रिपोर्ट बताती है कि यह बदलाव इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज की अधिकांश वैश्विक समस्याएँ—जलवायु परिवर्तन, युद्ध और संघर्ष, बढ़ती असमानता और मानवीय संकट—संसाधनों या क्षमता की कमी से नहीं, बल्कि शक्ति के गलत उपयोग, दुरुपयोग या उपेक्षा से पैदा हुई हैं। जिम्मेदारी को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाकर, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स  अंतरराष्ट्रीय बातचीत की दिशा को प्रभुत्व और प्रतिस्पर्धा से हटाकर देखभाल, न्याय और दीर्घकालिक सोच की ओर मोड़ने का प्रयास करता है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आज के गहरे आपस में जुड़े विश्व में जिम्मेदारी कोई वैकल्पिक नैतिक सलाह नहीं रह गई है; यह वैश्विक स्थिरता और साझा कल्याण के लिए अनिवार्य बन चुकी है। अपनी निष्कर्षों, रैंकिंग और तुलनाओं के माध्यम से, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स  यह दिखाने का प्रयास करता है कि नेतृत्व का अर्थ किसी देश के आकार या ताकत से नहीं, बल्कि इस बात से तय होता है कि वह कितनी समझदारी, नैतिकता और दूरदर्शिता से शासन करता है, सहयोग करता है और भविष्य की रक्षा करता है।

केवल क्षमता अब सफलता की परिभाषा नहीं रही

दशकों से वैश्विक मूल्यांकन ढाँचे परिणामों से अधिक उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते रहे हैं। सकल घरेलू उत्पाद, प्रतिस्पर्धा सूचकांक, सैन्य व्यय और नवाचार रैंकिंग को राष्ट्रीय सफलता के संकेतक माना गया। रिपोर्ट यह स्वीकार करती है कि ये आँकड़े किसी देश की क्षमता और आकार को दर्शाते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि उस क्षमता का उपयोग कैसे किया गया और उसकी कीमत किसने चुकाई।

आर्थिक वृद्धि यह स्पष्ट नहीं करती कि समृद्धि समाज में समान रूप से बँटी या नहीं, पर्यावरणीय क्षति को रोका गया या भविष्य पर टाल दिया गया, और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ने शांति को बढ़ावा दिया या विघटन को। संक्षिप्त रिपोर्ट तर्क देती है कि आज यह कमी हानिरहित नहीं रह गई है। जब राष्ट्रीय निर्णय सीमाओं से परे असर डालने लगे हैं, तब जिम्मेदारी के बिना क्षमता एक तटस्थ स्थिति नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत जोखिम बन जाती है।

सभ्यतागत दावों से परे दार्शनिक आधार

पद्धति के लिहाज़ से आधुनिक होते हुए भी, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स  वैचारिक रूप से व्यापक है। रिपोर्ट इस इंडेक्स को एक ऐसे नैतिक विचार-क्रम में रखती है जो एक साझा निष्कर्ष पर पहुँचता है—सत्ता और दायित्व अलग-अलग नहीं हो सकते। भारतीय परंपरा में शासन को धर्म मानने की अवधारणा हो, कांट का कर्तव्य-नीति सिद्धांत, गांधी का ट्रस्टीशिप विचार, अफ्रीकी दर्शन ‘उबुन्टू’ या समकालीन वैश्विक न्याय सिद्धांत—सभी में वैधता को संयम, उत्तरदायित्व और सामूहिक हितों की देखभाल से जोड़ा गया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट किसी सभ्यता या संस्कृति की श्रेष्ठता का दावा नहीं करती। इंडेक्स में जिम्मेदारी को पहचान या ऐतिहासिक दर्जे से नहीं, बल्कि संस्थागत ढाँचे, नीति-निर्णयों और शासन की गुणवत्ता से आँका गया है। ध्यान इरादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिणामों पर केंद्रित रहता है।

नैतिक विचार से मापने योग्य परिणामों तक

रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स तीन वर्षों तक चले अकादमिक और नीति-स्तरीय प्रयास का परिणाम है, जिसे वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित किया और भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई द्वारा मान्य किया गया। यह इंडेक्स 154 देशों का मूल्यांकन तीन आपस में जुड़े स्तंभों पर करता है—आंतरिक जिम्मेदारी, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और बाह्य जिम्मेदारी।

संक्षिप्त रिपोर्ट बताती है कि इन स्तंभों को आगे 58 संकेतकों में विभाजित किया गया है, जो वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त डेटा स्रोतों पर आधारित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह जानबूझकर लिया गया निर्णय है कि धारणा-आधारित आकलन या शक्ति-केंद्रित मापदंडों के बजाय वास्तविक और देखे जा सकने वाले परिणामों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जिम्मेदारी को एक वास्तविक शासन-अनुभव के रूप में समझा जा सके।

रिपोर्ट का एक सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि संपन्नता और जिम्मेदारी के बीच कोई सीधा, रैखिक संबंध नहीं है। उच्च-आय वाले देश शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं में शामिल हैं, लेकिन यह पैटर्न समान नहीं है। कई विकसित देश वैश्विक औसत के आसपास या उससे नीचे पाए जाते हैं, विशेष रूप से पर्यावरणीय जिम्मेदारी और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आचरण के मामलों में।

रिपोर्ट बताती है कि अधिक कार्बन उत्सर्जन, सीमित जलवायु महत्वाकांक्षा और दबाव-आधारित या लेन-देन वाली विदेश नीति इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं, अनेक उच्च-मध्यम और निम्न-मध्यम आय वाले देश अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करते हैं और कई आयामों में अमीर देशों की बराबरी या उनसे बेहतर नतीजे देते हैं। निष्कर्ष स्पष्ट है—आर्थिक क्षमता जिम्मेदारी को संभव बना सकती है, लेकिन उसकी गारंटी नहीं देती।

जिम्मेदारी के क्षेत्रीय रास्ते

रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स जब क्षेत्रों के अनुसार देशों को देखता है, तो रिपोर्ट बताती है कि जिम्मेदारी का कोई एक वैश्विक पैटर्न नहीं है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारी निभाने के अलग-अलग तरीके दिखाई देते हैं, जो इतिहास, प्राथमिकताओं और रोज़मर्रा के शासन निर्णयों से आकार लेते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और मध्य एशिया में कई देश वैश्विक औसत से ऊपर हैं, जिसका कारण मज़बूत सार्वजनिक प्रणालियाँ, सामाजिक सुरक्षा और नियमों का अपेक्षाकृत बेहतर पालन है। फिर भी, रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि इस क्षेत्र के सभी देश समान प्रदर्शन नहीं करते।

पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में प्रदर्शन का फैलाव काफ़ी बड़ा है। कुछ देश बुनियादी सेवाओं और आर्थिक स्थिरता में अच्छा करते हैं, जबकि कुछ वैश्विक औसत के आसपास रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर समान आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद शासन विकल्पों के कारण उत्पन्न होता है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र की तस्वीर मिश्रित है। कई देश अपनी आय के स्तर से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, विशेषकर सामाजिक समावेशन और वैश्विक आर्थिक भागीदारी में, लेकिन पर्यावरणीय मुद्दों पर प्रदर्शन असमान रहता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका, जिन्हें अक्सर नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिम्मेदारी के कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय मजबूती दिखाते हैं। शांति-स्थापना, स्थानीय पर्यावरण संरक्षण और समुदाय-आधारित विकास में कई देशों का प्रदर्शन सराहनीय है। मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में सबसे अधिक विविधता दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर संपन्नता से अधिक आंतरिक स्थिरता, शासन गुणवत्ता और संघर्ष के स्तर से जुड़ा है। समग्र रूप से, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि जिम्मेदारी का निर्धारण स्थान या धन से नहीं, बल्कि शासन के चुनावों से होता है।

विकसित देशों में शक्ति-केंद्रित नेतृत्व की सीमाएँ

देश-स्तरीय रैंकिंग इन निष्कर्षों को और स्पष्ट करती है। सिंगापुर, जो समग्र रूप से पहले स्थान पर है, आंतरिक शासन और बाह्य जिम्मेदारी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है, हालांकि पर्यावरणीय सीमाएँ उसकी प्रोफ़ाइल को संतुलित करती हैं। स्विट्ज़रलैंड, डेनमार्क और स्वीडन भी लगातार शीर्ष स्थानों पर रहते हैं, जहाँ कल्याणकारी नीतियाँ, सतत विकास और बहुपक्षीय सहयोग लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इसके विपरीत, रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख विकसित देश, मजबूत संस्थानों के बावजूद, अधिक उत्सर्जन और असमान बाह्य जिम्मेदारी के कारण शीर्ष श्रेणी में स्थान नहीं बना पाते। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि किसी देश का वैश्विक प्रभाव जितना बड़ा होता है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी की अपेक्षा उतनी ही बढ़ जाती है।

ग्लोबल साउथ की जिम्मेदारी और नई वैश्विक दिशा

आज जब दुनिया लगातार बिखरती हुई दिखाई देती है, भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ को वैश्विक प्राथमिकताओं के निर्धारण में अधिक आवाज़ देने की बात करता रहा है। रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स इस दृष्टिकोण की मज़बूती से पुष्टि करता है।

रिपोर्ट बताती है कि जिम्मेदारी केवल अमीर या शक्तिशाली देशों तक सीमित नहीं है। कई ग्लोबल साउथ देश चुपचाप जिम्मेदार व्यवहार के मज़बूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं में, रिपोर्ट के अनुसार, देश एक-दूसरे से अलग रास्ते अपनाते हैं। भारत, जो 16वें स्थान पर है, को शांति-स्थापना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी सक्रिय भूमिका के लिए रेखांकित किया गया है, भले ही उसे विशाल जनसंख्या की सेवा और विकास-पर्यावरण संतुलन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता हो। इसके विपरीत, चीन, जो 68वें स्थान पर है, घरेलू सेवा-प्रदान में मज़बूत है, लेकिन पर्यावरणीय जिम्मेदारी और शांतिपूर्ण वैश्विक जुड़ाव में पीछे रहता है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि जॉर्जिया (10), अल्बानिया (18), मॉरीशस (27), कंबोडिया (33), बांग्लादेश (42), वियतनाम (44), कोस्टा रिका (47), उरुग्वे (57), घाना (63) और मोरक्को (41) जैसे देश कई समृद्ध राष्ट्रों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। समावेशी शासन, पर्यावरणीय देखभाल और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर ज़ोर देकर ये देश यह साबित करते हैं कि नेतृत्व केवल शक्ति से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भी अर्जित किया जा सकता है।

इस तरह, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स  दुनिया से आग्रह करता है कि वह नेतृत्व की परिभाषा बदले—और शक्ति के बजाय देखभाल, न्याय और जिम्मेदारी को उसका मानदंड बनाए।

नेतृत्व की नई कसौटी: जिम्मेदारी

नैतिक उद्देश्य को मापने योग्य परिणामों में बदलकर, रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वैश्विक विमर्श को शक्ति और प्रतिष्ठा से हटाकर उत्तरदायित्व और देखभाल की ओर ले जाता है। परस्पर निर्भरता और सीमित संसाधनों के इस युग में, रिपोर्ट तर्क देती है कि जिम्मेदारी से कटी हुई शक्ति एक प्रणालीगत खतरा बन चुकी है।

रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स  शक्ति के विरुद्ध नहीं है; वह केवल ऐसी शक्ति का विरोध करता है जो जिम्मेदारी के अनुपात में न हो। इसका केंद्रीय संदेश स्पष्ट है—इक्कीसवीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती शक्ति की कमी नहीं, बल्कि उसके अनुरूप जिम्मेदारी की कमी है। आज नेतृत्व इस बात से नहीं तय होता कि किसके पास सबसे अधिक संसाधन हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि कौन उन्हें सबसे जिम्मेदारी से संचालित करता है।

Topics: Responsible Nations Index RankingIndia Responsible NationsIndiaभारतरिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्सभारत रिस्पॉन्सिबल नेशंसResponsible Nations Index
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