अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर आठ यूरोपीय देशों पर लगाने वाली टैरिफ की धमकी को अचानक वापस ले लिया है। उन्होंने नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ बैठक के बाद कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर एक “फ्यूचर डील” का फ्रेमवर्क तैयार हो गया है। इसी वजह से 1 फरवरी से शुरू होने वाली 10% टैरिफ अब नहीं लगेगी। यह अपडेट 21 जनवरी 2026 को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान आया।
ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि रुट्टे के साथ “बहुत प्रोडक्टिव” मीटिंग हुई। इसमें ग्रीनलैंड और आर्कटिक पर फ्रेमवर्क ऑफ अ फ्यूचर डील बन गया। ट्रंप ने लिखा: “इस समझ के आधार पर मैं 1 फरवरी से लगने वाली टैरिफ नहीं लगाऊंगा।” उन्होंने इसे अमेरिका के लिए “बहुत अच्छी डील” बताया, लेकिन डिटेल्स नहीं दिए। कहा कि यह थोड़ा कॉम्प्लेक्स है, बाद में सब पता चलेगा।
दावोस स्पीच में ग्रीनलैंड पर जोरदावोस में अपनी स्पीच के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड का फिर ज़िक्र किया। कहा कि अमेरिका को “वर्ल्ड प्रोटेक्शन” के लिए ग्रीनलैंड का एक हिस्सा चाहिए। मिलिट्री फोर्स से लेने से इनकार किया, लेकिन इकोनॉमिक और डिप्लोमैटिक दबाव की बात कही। ट्रंप बोले, “हमने कभी कुछ और नहीं मांगा।” उन्होंने तुरंत नेगोशिएशंस की डिमांड की और टैरिफ को “फेयर” बताया।
टैरिफ धमकी की वजह
कुछ दिन पहले ट्रंप ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड पर 1 फरवरी से 10% टैरिफ और 1 जून से 25% तक बढ़ाने की धमकी दी थी। वजह बताई कि ये देश ग्रीनलैंड को डेनमार्क का ऑटोनॉमस टेरिटरी बनाए रखने का सपोर्ट कर रहे हैं, जबकि ट्रंप इसे अमेरिका में शामिल करना चाहते हैं।
यूरोपीय और नाटो की प्रतिक्रिया
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने ट्रंप के इस कदम को पॉजिटिव बताया। कहा कि ट्रंप ट्रेड वॉर रोक रहे हैं और ग्रीनलैंड पर अटैक नहीं करेंगे। नाटो की तरफ से मीटिंग की पुष्टि हुई, जिसमें आर्कटिक सिक्योरिटी फ्रेमवर्क पर फोकस था – रूस या चीन को ग्रीनलैंड में कोई फुटहोल्ड न मिले। रुट्टे ने मीटिंग को “बहुत अच्छी” कहा, लेकिन बोले कि अभी बहुत काम बाकी है।
क्या है पूरा मामला
ग्रीनलैंड डेनमार्क का ऑटोनॉमस टेरिटरी है। ट्रंप का पुराना क्लेम है कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में अमेरिका ने डिफेंस में मदद की थी, इसलिए ग्रीनलैंड अमेरिका को मिलना चाहिए – लेकिन यह क्लेम गलत साबित हो चुका है। ट्रंप नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर ग्रीनलैंड चाहते हैं, खासकर मिसाइल डिफेंस और मिनरल्स के लिए।
नेगोशिएशंस की संभावित दिशा
अभी बात चल रही है कि ग्रीनलैंड के कुछ छोटे-छोटे हिस्सों पर अमेरिका को संप्रभुता मिले। यूरोपियन पार्लियामेंट ने अमेरिका-यूरोपीय ट्रेड डील को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। मार्केट्स में पहले गिरावट आई थी, अब रिकवरी हो रही है।

















