ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। अगर आप इसका नाम सुनते हैं, तो शायद आपके दिमाग में हरी-भरी जमीन, पेड़-पौधे और हरियाली की तस्वीर उभरती होगी। लेकिन सच ये है कि ग्रीनलैंड पूरी तरह बर्फ और ग्लेशियरों से ढका हुआ है। यहां की जमीन पर हरियाली बहुत कम मिलती है। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर फैली रहती है और यहां की ठंडी हवाओं से कड़कड़ाती सर्दी रहती है। ऐसे में ये सवाल उठता है कि इतनी बर्फीली जगह का नाम “ग्रीनलैंड” क्यों रखा गया?
बर्फीले द्वीप का नाम “ग्रीनलैंड”
इस कहानी की शुरुआत लगभग 1000 साल पहले, 10वीं सदी में होती है। उस समय एक वाइकिंग योद्धा और नाविक था, जिसका नाम एरिक द रेड (Erik the Red) था। एरिक आइसलैंड में रहता था, लेकिन किसी कारणवश उसे वहां से निकाल दिया गया। उसने पश्चिम की तरफ नाव लेकर यात्रा की और एक नई जमीन की खोज की। लंबी समुद्री यात्रा के बाद एरिक एक विशाल द्वीप पर पहुंचे। लेकिन समस्या ये थी कि उस बर्फीले द्वीप पर कोई कैसे बसता? चारों तरफ बर्फ और ठंड थी, खाने-पीने की चीजें सीमित थीं, और यह जगह मुश्किल हालात वाली थी। इसे सोचकर एरिक ने अपनी चालाकी दिखाई। उन्होंने सोचा कि अगर इस जगह का नाम डरावना रखा गया, तो कोई भी यहां बसने नहीं आएगा। इसलिए उन्होंने एक मार्केटिंग की तरह का तरीका अपनाया। उन्होंने इस बर्फीले द्वीप का नाम “ग्रीनलैंड” रख दिया।
नाम सुनकर ऐसा लगता है कि यह जमीन हरी-भरी और सुंदर है। वास्तव में, नाम का मकसद यही था कि लोग यहां बसने के लिए आकर्षित हों। यह एक तरह से पहली बार इस्तेमाल किया गया मार्केटिंग ट्रिक थी। लोगों को विश्वास दिलाया गया कि यह जगह बसने के लिए अच्छी है, जबकि सच में यह बहुत ठंडी और बर्फ से ढकी थी। हालांकि, ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों में थोड़ी हरियाली भी है। खासकर दक्षिणी हिस्से में गर्मियों में बर्फ पिघल जाती है। वहां घास उगती है और थोड़ी हरियाली नजर आती है। इसलिए यह भी माना जाता है कि एरिक ने ग्रीनलैंड के इस छोटे हिस्से को देखकर इसका नाम रखा हो। लेकिन ज्यादातर इतिहासकार यही मानते हैं कि यह नाम ज्यादा तर मार्केटिंग की वजह से रखा गया था, ताकि लोग वहां बसने के लिए आएं। ग्रीनलैंड के ग्लेशियर और बर्फ के मैदान इतने बड़े हैं कि यहां के पर्यावरण और दुनिया की जलवायु पर इसका बड़ा असर पड़ता है। जब यहां की बर्फ पिघलती है, तो समुद्र का पानी बढ़ता है, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पानी के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ भी ग्रीनलैंड पर ध्यान देते हैं। आज ग्रीनलैंड एक महत्वपूर्ण जगह है।











