भुवनेश्वर। भगवान जगन्नाथ से जुड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किए गए चित्रों और वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसार ने श्रद्धालुओं में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं के बीच बढ रहे आक्रोश एवं मामले की गंभीरता से लेते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने पुरी के सिंहद्वार थाना में एक सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।
मंदिर प्रशासन ने ‘vishvrajcreation’ नामक सोशल मीडिया हैंडल पर भगवान जगन्नाथ के कथित रूप से मनगढ़ंत, आपत्तिजनक और भ्रामक दृश्य प्रसारित करने का आरोप लगाया है। ये वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिन्हें श्रद्धालुओं ने अत्यंत अपमानजनक और आस्था को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
अयोध्या के राम कथा म्यूजियम को सौंपी गई 223 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण की दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपि
वायरल वीडियो में क्रेन की मदद से भगवान जगन्नाथ पर दूध चढ़ाते हुए दिखाया गया
एसजेटीए ने एक बयान में कहा कि प्रशासन के संज्ञान में आया है कि “भगवान जगन्नाथ के अस्वीकार्य एआई-जनित फोटो और वीडियो” ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन दृश्यों का मंदिर की परंपराओं, रीति-रिवाजों या धार्मिक आचरण से कोई संबंध नहीं है और इससे देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
मंदिर के विशेष सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, इन एआई-निर्मित दृश्यों के कारण श्रद्धालुओं में व्यापक असंतोष और भावनात्मक पीड़ा देखी जा रही है। सबसे विवादास्पद वीडियो में से एक में पुरी श्रीमंदिर के सामने क्रेन की मदद से भगवान जगन्नाथ पर दूध चढ़ाते हुए दिखाया गया है, जो पूरी तरह से काल्पनिक है और मंदिर की स्थापित परंपराओं से सर्वथा विपरीत है। जगन्नाथ संस्कृति पर शोध कर रहे एक शोधकर्ता ने इन दृश्यों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे चित्रण 12वीं सदी के इस पवित्र धाम से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराओं का घोर अपमान हैं। उन्होंने कहा कि ये दृश्य पूरी तरह अवास्तविक हैं और जगन्नाथ संस्कृति या धार्मिक आचार से इनका कोई लेना-देना नहीं है। इस तरह के नकली वीडियो ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
पुरी सहित पूरे ओडिशा में श्रद्धालुओं ने इस तरह की असंवेदनशील और भ्रामक सामग्री के प्रसार पर गहरा रोष जताया है। मंदिर परिसर के बाहर एक श्रद्धालु ने कहा कि भगवान जगन्नाथ ब्रह्मांड के भगवान हैं। इस तरह का चित्रण बिल्कुल अस्वीकार्य है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एक अन्य श्रद्धालु ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना ने भक्तों को गहराई से आहत किया है।
मंदिर अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी श्रीमंदिर के भीतर से अनधिकृत फोटोग्राफी और वीडियो प्रसारित होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन यह पहला मामला है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर भगवान का अपमान करने वाली सामग्री तैयार की गई है। इस घटना के मद्देनज़र श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी), जो मंदिर की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, ने कानून में संशोधन कर ऐसे कृत्यों को अवैध और दंडनीय बनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य उभरती तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आस्था की रक्षा करना है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है।

















