बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर एक नई और हैरतअंगेज रिपोर्ट सामने आई है। वहां के ‘राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप’ (RRAG) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए बांग्लादेश के सुरक्षा हालातों और अल्पसंख्यकों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरआरएजी ने 15 जनवरी 2026 को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसका शीर्षक है: ’45 दिनों में 15 अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या, बांग्लादेश में समावेशी भागीदारी संभव नहीं।’
45 दिन में 15 हिंदुओं की हत्या
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1 दिसंबर 2025 से लेकर 15 जनवरी 2026 के बीच कम से कम 15 हिंदू नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ये हत्याएं केवल आपराधिक घटनाएं नहीं हैं,बल्कि सुनियोजित हत्या हैं जो धर्म पर आधारित हैं। आरआरएजी के निदेशक सुहास चकमा ने चेतावनी दी है कि ये हत्याएं केवल उस हिंसा का एक छोटा सा हिस्सा है, जो मीडिया तक पहुंच पाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ितों पर बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने हमले किए, जिनमें से कई हत्याएं ‘तालिबानी स्टाइल’ में गला रेतकर की गईं।
अंतरिम सरकार पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस रिपोर्ट में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उनकी भूमिका की कड़ी आलोचना की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉ. यूनुस सरकार इन हत्याओं के पीछे के धार्मिक उद्देश्यों को नजरअंदाज कर रही है। सरकार ने जांच पूरी होने से पहले ही इन घटनाओं को ‘साधारण अपराध’ या ‘पुरानी रंजिश’ करार दे दिया है। यह रिपोर्ट कहती है कि वाहन चोरी या डकैती के नाम पर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है ताकि इसे सांप्रदायिक हिंसा के बजाय सामान्य अपराध का रूप दिया जा सके।
मारे गए लोगों की सूची भी जारी की
इस रिपोर्ट को पीड़ितों के नाम और तारीख के आधार पर बनाया गया है, जिनमें समीर दास और प्रोले चाकी (11 जनवरी) और जॉय महापात्रा (10 जनवरी) का नाम शामिल हैं। पीड़ितों में बुजुर्ग महिलाओं से लेकर नौजवान पुरुष तक शामिल थे, जिनमें 18 वर्षीय शांतो चंद्र दास भी शामिल थे।
आरआरएजी के निदेशक सुहास चकमा ने कहा, ‘ये हत्याएं हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ दैनिक हिंसा का सिर्फ एक छोटा सा सिरा है जो शायद ही कभी मीडिया तक पहुंचता है।’
यही नहीं वहां की सरकार अक्सर इन घटनाओं को भारत द्वारा चलाए जा रहे एक ‘दुष्प्रचार अभियान’ का हिस्सा बताया है। यहां तक कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से चुनाव के दौरान इस ‘दुष्प्रचार’ को रोकने के लिए मदद भी मांगी है। एक अन्य संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के 116 लोगों की हत्या की गई। साफ है कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार थम नहीं रहे हैं।
आगामी चुनाव में बढ़ सकती हैं हिंसक घटनाएं
बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के लिए प्रचार 22 जनवरी 2026 से शुरू होने वाला है। RRAG ने चेतावनी दी है कि जैसे ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ेगी, हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और तेज हो सकती है। संगठन का कहना है कि इन धार्मिक हमलों को अक्सर ‘राजनीतिक संघर्ष’ का रंग देकर छुपाने की कोशिश की जाती है, जिससे दोषियों को बचने का मौका मिल जाता है। ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष चुनाव कराना लगभग असंभव लगता है।

















